विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं? जानिए सरकार की ये खास स्कॉलरशिप्स

विचार II - दर्शन/गणित/चिकित्सा
13-10-2026 09:45 PM
विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं? जानिए सरकार की ये खास स्कॉलरशिप्स

उच्च शिक्षा प्राप्त करना किसी भी विद्यार्थी के जीवन का एक बहुत बड़ा कदम होता है। आज के समय में भारत या विदेश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाना कई युवाओं का सपना है। लेकिन ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, यात्रा और किताबों के बढ़ते खर्चों के कारण उच्च शिक्षा के लिए धन जुटाना कई परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस आर्थिक दूरी को पाटने के लिए सरकार और बैंक कई तरह की योजनाएं, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन लेकर आए हैं। इन वित्तीय सुविधाओं की मदद से धन की कमी अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की राह में बाधा नहीं बन सकती।

छात्रों के लिए पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना क्या है और इसके क्या लाभ हैं?
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने छह नवंबर को प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी दी है। यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि पैसे की कमी के कारण भारत का कोई भी युवा उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। यह योजना एक मिशन मोड के तहत काम करती है और देश के शीर्ष गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले हर साल 22 लाख से अधिक छात्रों को एजुकेशन लोन की सुविधा प्रदान करेगी।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना किसी गारंटी या कोलैटरल के एजुकेशन लोन उपलब्ध कराती है। इसके लिए एक पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और छात्रों के अनुकूल आवेदन प्रक्रिया बनाई गई है। योजना के तहत 7.5 लाख रुपये तक के लोन पर भारत सरकार 75% क्रेडिट गारंटी प्रदान करेगी, जिससे बैंकों को अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। जिन छात्रों के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये तक है, उन्हें 10 लाख रुपये तक के लोन पर 3% ब्याज सब्सिडी भी दी जाएगी। यह लाभ उन छात्रों को मिलने वाली पूर्ण ब्याज सब्सिडी के अतिरिक्त है जिनके परिवार की आय 4.5 लाख रुपये तक है। यह योजना सभी अनुसूचित बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों पर लागू है।

विदेशों में पढ़ाई के लिए कौन सी प्रमुख सरकारी और ट्रस्ट स्कॉलरशिप उपलब्ध हैं?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक भारतीय नागरिकों के लिए कई स्कॉलरशिप उपलब्ध हैं। जेएन टाटा एंडोमेंट स्कॉलरशिप (Endowment Scholarship) विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भारतीय नागरिकों को लोन स्कॉलरशिप प्रदान करती है। यह स्कॉलरशिप व्यक्तिगत योग्यता के आधार पर मानविकी, विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और कानून जैसे कई विषयों के लिए उपलब्ध है। योग्यता के आधार पर यह राशि 10 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक हो सकती है।

https://sceh.net/ 

आगा खान फाउंडेशन का इंटरनेशनल स्कॉलरशिप प्रोग्राम उन प्रतिभाशाली छात्रों की मदद करता है जिनके पास पुर्तगाल, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता नहीं है। इसमें 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है और मास्टर डिग्री के लिए चयनित छात्रों को 50% लोन और 50% अनुदान मिलता है।

इसी तरह, इनलक्स शिवदासानी फाउंडेशन द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में मास्टर या पीएचडी के लिए इनलक्स स्कॉलरशिप दी जाती है। यह ट्यूशन फीस के साथ रहने और यात्रा का खर्च भी उठाती है। इसके अलावा, नरोत्तम सेखसरिया स्कॉलरशिप प्रोग्राम छात्रों को भारत और विदेश में स्नातकोत्तर के लिए 20 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त लोन देता है। महिलाओं के लिए विशेष रूप से द लेडी मेहरबाई डी टाटा एजुकेशन ट्रस्ट स्कॉलरशिप है, जो समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जेंडर स्टडीज जैसे विषयों में यूरोप, ब्रिटेन या अमेरिका में मास्टर डिग्री करने वाली भारतीय महिला स्नातकों को दी जाती है।

अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए प्राइवेट बैंकों के एजुकेशन लोन कैसे काम करते हैं?
अंडरग्रेजुएट कोर्स आमतौर पर 3-4 साल के होते हैं और इसमें ट्यूशन फीस के अलावा भी कई बड़े खर्च शामिल होते हैं। आईसीआईसीआई बैंक जैसे वित्तीय संस्थान छात्रों को एजुकेशन लोन प्रदान करते हैं ताकि परिवार की जमा पूंजी सुरक्षित रहे। ये बैंक भारतीय संस्थानों के लिए 2 करोड़ रुपये और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के लिए 3 करोड़ रुपये तक का लोन देते हैं। इस लोन में ट्यूशन फीस, हॉस्टल का खर्च, यात्रा, किताबें, उपकरण और विदेश में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बीमा भी कवर होता है।

एजुकेशन लोन में छात्रों को मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium Period) की सुविधा मिलती है। इसका मतलब है कि कोर्स की अवधि खत्म होने के 6-12 महीने बाद तक ईएमआई चुकाने की छूट होती है। छात्रों के पास 15 साल तक की लचीली पुनर्भुगतान अवधि होती है जिससे वे आसानी से अपना लोन चुका सकते हैं। छोटे लोन आमतौर पर बिना किसी गारंटी के मिल जाते हैं, लेकिन बड़ी राशि के लिए प्रॉपर्टी या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी गारंटी देनी पड़ सकती है। आवेदन के लिए छात्र का भारतीय नागरिक होना और उसकी उम्र 16-35 वर्ष के बीच होना अनिवार्य है। इसके साथ ही किसी मान्यता प्राप्त कोर्स में एडमिशन का प्रमाण, अच्छे अकादमिक रिकॉर्ड और एक सह-आवेदक की आवश्यकता होती है।

समाज के कमजोर वर्गों के लिए नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के क्या फायदे हैं?
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप भारत सरकार की एक ऐसी पहल है जो हाशिए पर रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सहायता प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश जनजातियों, भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और पारंपरिक कारीगरों के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में मास्टर या पीएचडी करने का अवसर देना है।

इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों की ट्यूशन फीस पूरी तरह से कवर की जाती है। इसके अलावा छात्रों को रहने, खाने और व्यक्तिगत खर्चों के लिए मासिक भत्ते दिए जाते हैं। पढ़ाई के लिए किताबें और रिसर्च से जुड़े खर्चों के लिए कंटिंजेंसी अलाउंस (contingency allowance - आकस्मिकता भत्ता) भी मिलता है। योजना में भारत से गंतव्य देश तक जाने और पढ़ाई पूरी होने के बाद वापस आने का इकोनॉमी क्लास का हवाई किराया भी शामिल है। वीज़ा शुल्क की भरपाई और पढ़ाई के दौरान मेडिकल खर्च के लिए स्वास्थ्य बीमा भी इस योजना का हिस्सा है।

https://sceh.net/ 

इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने वाले छात्र की उम्र 35 वर्ष से कम होनी चाहिए और परिवार की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। मास्टर डिग्री के लिए पिछले कोर्स में 60% अंक होना जरूरी है। हर साल लगभग एक सौ पच्चीस छात्रों को यह स्कॉलरशिप दी जाती है। यह स्कॉलरशिप इंजीनियरिंग, प्रबंधन, शुद्ध विज्ञान, कृषि विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अध्ययन का समर्थन करती है। इसके माध्यम से विदेश में पढ़ने वाले कई छात्र उच्च कौशल प्राप्त करके वापस भारत आते हैं और देश के विकास में अपना योगदान देते हैं।

विदेशों में पढ़ाई के लिए सरकारी फंड के उपयोग पर क्या बहस चल रही है?
सरकारी फंड और विदेश में पढ़ाई के लिए दिए जाने वाले सब्सिडी वाले एजुकेशन लोन को लेकर देश में एक बड़ी बहस भी चल रही है। विचार इस बात पर किया जा रहा है कि क्या इस वित्तीय सहायता को परिवार की आय, क्षेत्रीय विकास के स्तर, भविष्य की संभावित कमाई और छात्रों द्वारा भारत लौटकर दिए जाने वाले आर्थिक लाभों से जोड़ा जाना चाहिए।

इस विचार के समर्थकों का तर्क है कि कम आय वाले परिवारों या कम विकसित क्षेत्रों के छात्रों को प्राथमिकता देने से शैक्षिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग उन लोगों के लिए किया जा रहा है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि फंडिंग के निर्णय लेते समय छात्र द्वारा चुने गए विषय से मिलने वाले आर्थिक रिटर्न पर भी विचार किया जाना चाहिए, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो राष्ट्रीय विकास में सीधा योगदान दे सकते हैं।

दूसरी ओर, इस दृष्टिकोण के आलोचकों का मानना है कि अत्यधिक प्रतिबंध लगाने से शैक्षिक अवसरों तक पहुंच सीमित हो सकती है और फंडिंग प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत जटिल हो जाएगी। उनका तर्क है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ नहीं होना चाहिए बल्कि ज्ञान का वैश्विक विस्तार भी जरूरी है। यह बहस इस व्यापक सवाल को दर्शाती है कि कैसे सार्वजनिक संसाधनों को निष्पक्ष रूप से बांटा जा सकता है ताकि विदेशों में शिक्षा प्राप्त करने के दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक लाभों को अधिकतम किया जा सके।

इन तमाम योजनाओं और चर्चाओं के बीच यह बात स्पष्ट है कि आज के दौर में सरकार और वित्तीय संस्थाएं छात्रों के सपनों को उड़ान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सही जानकारी, उचित मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।

संदर्भ
1. https://tinyurl.com/2xr44ok4 
2. https://tinyurl.com/23aec327 
3. https://tinyurl.com/29z6uf6v 
4. https://tinyurl.com/29y2ye6z 
5. https://tinyurl.com/2y4dm5dp 

Definitions of the Post Viewership Metrics

A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.

B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.

C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.

D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.

E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.