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यह एक आम भ्रम है कि जब पृथ्वी अपनी कक्षा के दौरान भौतिक रूप से सूर्य के अधिक निकट पहुंचती है, तब ग्रीष्म ऋतु (गर्मी) होती है। वास्तव में, पृथ्वी की कक्षा लगभग वृत्ताकार है, और मौसमी तापमान में पृथ्वी की सूर्य से दूरी की भूमिका नगण्य होती है। ऋतुएँ इसलिए बदलती हैं, क्योंकि पृथ्वी 23.5 डिग्री के अक्षीय झुकाव (Axial tilt) पर घूर्णन करती है। जैसे-जैसे पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है, उत्तर एवं दक्षिण गोलार्ध प्रत्यक्ष सौर किरण की ओर या उससे दूर झुकती है, जिससे वर्ष भर हमें तापमान में बदलाव देखने को मिलते हैं।

यह समझने के लिए कि पूरे वर्ष स्थानीय तापमान क्यों बदलते हैं, हमें ग्रहीय ज्यामिति (Planetary geometry) पर गौर करना होगा। पृथ्वी के अक्ष का 23.5° झुकाव बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह काफी हद तक ऋतुओं के क्रम और दुनिया को जलवायु क्षेत्रों को निर्धारित करता है। लेकिन इस संदर्भ में ‘झुकाव’ (Tilt) का वास्तव में क्या अर्थ है? दरअसल, ‘झुकाव’ किसी अन्य चीज़ के सापेक्ष होना चाहिए। यदि हमारी पृथ्वी ब्रह्मांड में केवल एकमात्र ग्रह होती, तो इसके अक्ष के झुकने का विचार अर्थहीन होता। पृथ्वी का अक्ष उसके केंद्र से गुजरने वाली एक ऊर्ध्वाधर रेखा से 23.5° दूर झुका होता है। ऊर्ध्वाधर कोण (Vertical orientation) को पृथ्वी के केंद्र की ओर इशारा करने वाले कोण रूप में परिभाषित किया जाता है। पृथ्वी का अक्ष, उस क्षैतिज रेखा के साथ 66.5° का कोण बनाता है, जो ऊर्ध्वाधर रेखा के लंबवत है और पृथ्वी के केंद्र से भी गुजरती है। ये दोनों कोण - 23.5° और 66.5° भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अक्षांश रेखाओं के रूप में, वे क्रमशः कर्क और मकर रेखाओं तथा आर्कटिक और अंटार्कटिक वृत्तों को परिभाषित करते हैं।
ग्रह के अक्ष के झुकाव के विपरीत, पृथ्वी पर ‘गुरुत्वाकर्षण’ एक परिभाषित विशेषता है। परंतु, अंतरिक्ष में पृथ्वी के झुकाव को गुरुत्वाकर्षण के संबंध में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। इसके बजाय, इसे उस काल्पनिक समतल (Plane) के सापेक्ष परिभाषित किया जाता है, जिस पर पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। इसे तकनीकी रूप से क्रांतिवृत्त (Ecliptic) कहा जाता है। पृथ्वी का अक्ष इस कक्षीय समतल के लंबवत एक काल्पनिक रेखा से 23.5° झुका हुआ है। चूँकि क्रांतिवृत्त समतल के साथ आगे बढ़ते समय, अक्ष एक ही दिशा में इशारा करता है, इसलिए वर्ष के दौरान सूर्य के संबंध में इसका कोण बदलता रहता है। जून के अंत में उत्तरी गोलार्ध की ग्रीष्मकालीन संक्रांति (Summer solstice) या अयनांत के दिन, उत्तरी ध्रुव 23.5° के कोण पर सूर्य की ओर झुकता है। जबकि दिसंबर के अंत में शीतकालीन संक्रांति (Winter solstice) के दिन, यह 23.5° के कोण पर सूर्य से दूर झुकता है। सितंबर और मार्च में, पृथ्वी न तो सूर्य की ओर और न ही उससे दूर झुकती है। इसलिए, दोनों गोलार्धों को समान रूप से धूप मिलती है।

इस प्रकार, जैसे-जैसे पृथ्वी परिक्रमा करती है, सीधी धूप का कोण उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के बीच बदलता रहता है। सरल शब्दों में, पृथ्वी का घूर्णन अक्ष इसके कक्षीय समतल के लंबवत से, लगभग 23.4° झुका हुआ है, या परिक्रमा के समतल के सापेक्ष लगभग 66.5° झुका हुआ है। यह झुकाव गोलार्धों के बीच सौर सांद्रता को स्थानांतरित करता है, जिससे मौसमी विविधताएँ पैदा होती हैं। जैसे-जैसे पृथ्वी एक दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) कक्षा में परिक्रमा करती है, विभिन्न अक्षांशों को वर्ष भर अलग-अलग सौर किरणों (Solar exposure) का अनुभव होता है। सौर तीव्रता में मौसमी परिवर्तन इस कक्षीय गति और अक्षीय झुकाव के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न होते हैं। निचले अक्षांशों पर सूर्य का प्रकाश, सतह पर लगभग लंबवत रूप से पड़ता है, जिससे एक छोटे क्षेत्र पर ऊर्जा केंद्रित होती है। दूसरी ओर, उच्च अक्षांशों में किरणें तिरछी रूप से पहुँचती हैं, जिससे बड़े सतह क्षेत्रों पर ऊर्जा फैलती है और प्रति इकाई क्षेत्र में गर्मी कम होती है।
21 जून को, सूर्य पूर्वोत्तर दिशा में उगता है और पश्चिम के उत्तर में अस्त होता है। पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध के दर्शकों के लिए, सूर्य संयुक्त राज्य अमेरिका में क्षितिज से लगभग 15 घंटे ऊपर रहता है। इसका अर्थ है कि दिन का प्रकाश अधिक समय तक रहता है। 21 दिसंबर को, सूर्य पूर्व के दक्षिण में उगता है और पश्चिम के दक्षिण में अस्त होता है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका में 9 घंटे क्षितिज के ऊपर बिताता है, जिसका अर्थ है कि उत्तरी क्षेत्रों में दिन के उजाले के घंटे कम और रात के घंटे अधिक होते हैं।

ग्रहीय झुकाव सीधे तौर पर स्थानीय जलवायु और मौसमी बदलावों को नियंत्रित करता है। अर्थात, ये खगोलीय सिद्धांत, सीधे तौर पर उत्तरी भारत में भी मौसम के पूर्वानुमान और खेती के चक्रों पर लागू होते हैं, क्योंकि हमारा भारत उत्तरी गोलार्ध में स्थित है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/2hpnhyt5
2. https://tinyurl.com/5n7d6vye
3. https://tinyurl.com/yhswdjfv
4. https://tinyurl.com/yhswdjfv
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