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आज हम आपको ऐसे समुद्री जीव से परिचित कराने जा रहे हैं, जिसे पहली नज़र में देखकर अक्सर लोग पत्थर समझ लेते हैं, जबकि वास्तविकता में वह एक जीवित प्राणी होता है। ये हैं — मूंगे (Corals)। अपनी अद्भुत बनावट, चमकदार रंगों और हज़ारों-लाखों वर्षों में बनी विशाल संरचनाओं के कारण मूंगे समुद्र के “गहने” कहलाते हैं। वैज्ञानिक इन्हें “ओशन फ़ॉरेस्ट” यानी समुद्र का जंगल कहते हैं, क्योंकि ये समुद्री जीवन को ठीक उसी तरह आश्रय देते हैं जैसे धरती पर पेड़-पौधे। मूंगे न केवल समुद्र की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि असंख्य जीवों के लिए भोजन, सुरक्षा और रहने की जगह भी प्रदान करते हैं। इनका महत्व इतना गहरा है कि यदि मूंगे नष्ट हो जाएँ, तो पूरा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो सकता है। इस लेख में हम मूंगों की इसी अद्भुत दुनिया को समझेंगे—कि वे वास्तव में क्या हैं, कैसे बनते हैं, क्यों इतने आवश्यक हैं और धरती के भविष्य में उनकी भूमिका कितनी अहम है।
मूंगा (Coral) क्या है और इसकी जैविक संरचना
मूंगा पहली नज़र में पत्थर की तरह दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में यह एक जीवित समुद्री प्राणी है। यह निडारिया (Cnidaria) नामक जीव समूह का सदस्य है, जिसमें जेलीफ़िश (Jelly fish) और सी एनेमोन (Sea Anemone) भी शामिल हैं। मूंगा कई छोटे-छोटे जीवों की कॉलोनियों से बना होता है, जिन्हें पॉलिप्स (Polyps) कहा जाता है। प्रत्येक पॉलिप का शरीर नलिका जैसा होता है और इसके मुंह के चारों ओर टेंटेकल्स (tentacles) होते हैं, जिनका उपयोग भोजन पकड़ने और खुद की सुरक्षा के लिए किया जाता है। पॉलिप्स कैल्शियम कार्बोनेट (calcium carbonate) का स्राव करते हैं, जिससे कठोर संरचना बनती है जिसे हम कोरल रॉक (choral rock) या रीफ (reef) के नाम से पहचानते हैं। जब एक पॉलिप के पास नया पॉलिप विकसित होता है और यह प्रक्रिया बार-बार होती है, तो इसे बडिंग (Budding) कहते हैं। इसी प्रक्रिया के माध्यम से मूंगा हजारों वर्षों में विशाल संरचनाएँ बनाता है, जो कभी-कभी अंतरिक्ष से भी दिखाई देती हैं।

कोरल के प्रमुख प्रकार और उनकी विशेषताएँ
मूंगों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता है - हार्ड कोरल (Hard Corals) और सॉफ्ट कोरल (Soft Corals)। हार्ड कोरल, जिन्हें रीफ बिल्डिंग कोरल भी कहा जाता है, समुद्र में विशाल संरचनाएँ बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह कोरल कैल्शियम कार्बोनेट से कठोर ढांचा बनाते हैं और आमतौर पर साफ, गर्म और सूर्य की रोशनी वाले उथले पानी में पाए जाते हैं। इनके प्रजातियों में एक्रोपोरा (Acropora) और पोरोइटीज़ (Porites) प्रमुख हैं। इसके विपरीत, सॉफ्ट कोरल की संरचना मुलायम होती है और ये कठोर चट्टान नहीं बनाते। ये विभिन्न रंगों और आकृतियों में दिखाई देते हैं और इनके शरीर में लचीले तंतु होते हैं, जिससे ये पानी की धारा के साथ हिलते हुए प्रतीत होते हैं। उदाहरण के रूप में सी फ़ैन्स और पॉलिप्स को देखा जा सकता है। हार्ड कोरल मुख्य रूप से ठोस रीफ संरचना बनाते हैं, जबकि सॉफ्ट कोरल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का जैविक संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं।

मूंगों का पोषण तंत्र और शिकार करने की प्रक्रिया
मूंगा एक अनोखा जीव है क्योंकि यह दो तरीकों से पोषण प्राप्त करता है - सीधे शिकार करके और अप्रत्यक्ष रूप से प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से। इसके ऊतकों के अंदर ज़ूज़ैन्थेले (Zooxanthellae) नामक शैवाल रहते हैं, जो सूर्य की रोशनी का उपयोग करके ऊर्जा उत्पन्न करते हैं और उस ऊर्जा का एक हिस्सा मूंगे को प्रदान करते हैं। इस प्रक्रिया से मूंगे को लगभग 90% ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा मूंगे अपने टेंटेकल्स में मौजूद निडोब्लास्ट्स (Nidoblasts - नीडल कोशिकाएँ) की मदद से पानी में तैरने वाले छोटे जीवों, ज़ोप्लैंकटन (Zooplankton) या सूक्ष्म केंचुओं को पकड़ लेते हैं। इन कोशिकाओं में विषैले तंतु होते हैं, जो शिकार को तुरंत निष्क्रिय कर देते हैं। यह दोहरा पोषण तंत्र मूंगों को समुद्री वातावरण में अत्यंत कुशल और अनुकूलनशील बनाता है।
कोरल प्रजनन और नई कॉलोनी का निर्माण
मूंगों का प्रजनन दो प्रमुख तरीकों से होता है - लैंगिक (Sexual) और अलैंगिक (Asexual)। लैंगिक प्रजनन में मूंगे सामूहिक रूप से समुद्र में अंडे और शुक्राणु छोड़ते हैं। इस घटना को स्पॉनिंग (Spawning) कहते हैं और यह अक्सर पूर्णिमा या विशिष्ट मौसमी चक्रों में होती है। अंडे और शुक्राणु मिलकर एक प्लैनुला लार्वा (Planula Larva) बनाते हैं, जो पानी में तैरता रहता है। कुछ समय बाद यह किसी कठोर सतह पर चिपककर एक नई पॉलिप कॉलोनी बनाना शुरू करता है। अलैंगिक प्रजनन मुख्य रूप से कॉलोनी को बड़ा करने के लिए होता है, जहाँ एक पॉलिप विभाजित होकर दो हो जाता है और धीरे-धीरे संपूर्ण संरचना फैलती जाती है। यही प्रक्रिया सदियों में भव्य कोरल रीफ्स तैयार करती है।

कोरल रीफ का पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व
कोरल रीफ पृथ्वी के सबसे समृद्ध और जटिल पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं। ये लाखों समुद्री जीवों को आश्रय, भोजन और सुरक्षा प्रदान करते हैं। इन्हें अक्सर "समुद्र के वर्षावन" कहा जाता है, क्योंकि इनमें अनगिनत प्रजातियाँ रहती हैं। कोरल रीफ न केवल प्रकृति के लिए, बल्कि मनुष्यों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। औषधीय उद्योग में कैंसर, वायरल संक्रमण और सूजन संबंधी रोगों के इलाज के लिए इनका उपयोग बढ़ रहा है। इसके साथ ही ये पर्यटन, मछली उद्योग और तटीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ये समुद्री तूफानों और लहरों से तटों की रक्षा करते हैं, जिससे भूमि कटाव कम होता है। यदि ये नष्ट हुए, तो समुद्र और मानव जीवन दोनों को भारी नुकसान होगा।

विश्व की प्रमुख और प्रसिद्ध कोरल रीफ़ प्रणालियाँ
दुनिया की कुछ सबसे सुंदर और विशाल कोरल रीफ प्रणालियाँ लाखों वर्षों के विकास का परिणाम हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध है ग्रेट बैरियर रीफ (Australia), जो दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे पुराना कोरल नेटवर्क माना जाता है। इसके अलावा रेड सी रीफ़ (Red Sea Reef) अपनी अत्यधिक गहराई और कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने वाले कोरल प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है। मालदीव, अपनी सुंदर द्वीप श्रृंखला और समृद्ध कोरल जीवन के लिए विश्वभर में पर्यटकों को आकर्षित करता है। बेलीज़ बैरियर रीफ और राजा अम्पैट (Indonesia) जैव विविधता और वैज्ञानिक अनुसंधान के केंद्र हैं, जहाँ नई प्रजातियाँ लगातार खोजी जा रही हैं।
संदर्भ
https://tinyurl.com/2b3xgb7k
https://tinyurl.com/2ckqu552
https://tinyurl.com/2ngjqdqj
https://tinyurl.com/2bbooexg
https://tinyurl.com/2whymhuz
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