शाहजहाँपुर की हरियाली के नीचे कौन सा 'गुप्त नक्शा' छिपा है? किसानों के लिए बड़ी चेतावनी!

भूमि और मिट्टी के प्रकार : कृषि योग्य, बंजर, मैदान
20-01-2026 09:36 AM
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शाहजहाँपुर की हरियाली के नीचे कौन सा 'गुप्त नक्शा' छिपा है? किसानों के लिए बड़ी चेतावनी!

जब हम शाहजहाँपुर की लहलहाती फ़सलों को देखते हैं, तो हमें लगता है कि यह पूरा ज़िला एक समान उपजाऊ मैदान है। गन्ने की मिठास और धान-गेहूं की बालियां हमें यह मानने पर मजबूर कर देती हैं कि यहाँ की मिट्टी में कोई कमी नहीं है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस हरियाली की चादर के नीचे एक "गुप्त नक्शा" (Secret Map) छिपा हुआ है? यह नक्शा सड़कों या इमारतों का नहीं, बल्कि उस मिट्टी की फितरत का है जो कहीं रेतीली है, कहीं चिकनी, तो कहीं धीरे-धीरे अपनी जान खो रही है।

शाहजहाँपुर की कृषि की असली ताकत इसी छुपे हुए नक्शे को समझने में है। यहाँ एक तरफ गोमती और गर्रा नदियों के किनारे की 'दोमट' मिट्टी है जो सोना उगलती है, तो दूसरी तरफ रेतीले टीले और ऊसर के पैच (patch) भी हैं जो किसान की मेहनत पर पानी फेर सकते हैं। आज हम इसी "सॉइल मैप" (Soil Map) की पड़ताल करेंगे और समझेंगे कि कैसे हमारी ज़मीन धीरे-धीरे उपजाऊ से बंजर होने की कगार पर पहुँच रही है। विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार, ज़िले की मिट्टी की यह विविधता ही इसकी कृषि साख का आधार है।
 

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इतिहास गवाह है कि मानव सभ्यताएं वहीं फली-फूलीं जहाँ की मिट्टी ने उनका साथ दिया। हमारे पूर्वजों ने मिट्टी की नब्ज़ को पहचाना था।
अगर हम वैज्ञानिक नज़रिए से शाहजहाँपुर की ज़मीन को देखें, तो कृषि वैज्ञानिकों के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। यह ज़िला एक समान नहीं है। यहाँ मुख्य रूप से चार तरह की मिट्टी पाई जाती है:
- सेंडी लोम (Sandy Loam): जिसे हम बलुई दोमट कहते हैं।
- लोम (Loam): यानी शुद्ध दोमट मिट्टी।
- सिल्टी लोम (Silty Loam): गाद वाली मिट्टी।
- क्ले लोम (Clay Loam): चिकनी मिट्टी।

ज़िले का 'सदर', 'तिलहर' और 'पुवायां' का इलाका अपनी उपजाऊ दोमट मिट्टी के लिए मशहूर है। वहीं, नदियों के किनारे रेतीली ज़मीन मिलती है, जिसे स्थानीय भाषा में हम 'भूड' कहते हैं। भू-वैज्ञानिक इसे 'फ़ाइन सिल्टी' (Fine Silty) और 'कोर्स लोमी' (Coarse Loamy) की श्रेणी में रखते हैं।

अब सवाल यह है कि क्या यह "गुप्त नक्शा" बदल रहा है? क्या हमारी उपजाऊ ज़मीन बीमार हो रही है? 
समस्या दोतरफा है। एक तरफ, जलभराव वाले इलाकों में ज़मीन में क्षारीयता (Alkalinity) बढ़ रही है, जिससे अच्छे-खासे खेत 'ऊसर' में बदल रहे हैं। दूसरी तरफ, सघन खेती (Intensive Farming) के कारण मिट्टी से 'ऑर्गेनिक कार्बन' (Organic Carbon) और ज़रूरी पोषक तत्व गायब हो रहे हैं। शाहजहाँपुर के किसानों के लिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि 'रेतीली' और 'दोमट' ज़मीन के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रेतीली मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता बहुत कम होती है। अगर हम कुदरत के खिलाफ जाकर खेती करेंगे तो हम असल में अपनी ज़मीन को बंजर बनाने का रास्ता खुद तैयार कर रहे हैं।

हाल ही में हुए अध्ययनों ने पूरे देश के साथ-साथ हमारे क्षेत्र के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारतीय मिट्टी में जिंक (Zinc), आयरन (Iron) और मैंगनीज (Manganese) जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भारी कमी हो रही है। शाहजहाँपुर भी इससे अछूता नहीं है। लगातार एक ही तरह की फ़सलें जैसे धान और गेहूं का चक्रलेने से ज़मीन थक चुकी है। मिट्टी की यह 'भूख' केवल रासायनिक खादों से नहीं, बल्कि सही प्रबंधन और जैविक खादों से मिटेगी।

अंधेरा घना है, लेकिन उम्मीद की किरण भी मौजूद है। प्रशासन अब इस समस्या की जड़ तक जाने के लिए कमर कस चुका है। शाहजहाँपुर की 300 ग्राम पंचायतों में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत हर गांव से मिट्टी के 100-100 नमूने लिए जाएंगे।

यह एक क्रांतिकारी कदम है। इसका मकसद एक विस्तृत 'विलेज-वाइज सॉइल मैप' (Village-Wise Soil Map) तैयार करना है। जब हर किसान को पता होगा कि उसके खेत की मिट्टी में किस तत्व की कमी है, तो वह 'अंधाधुंध यूरिया' डालने के बजाय 'लक्षित पोषण' देगा।

शाहजहाँपुर को अगर अपनी कृषि विरासत बचानी है, तो हमें बंजर होती ज़मीन को वापस हरियाली की तरफ मोड़ना होगा। विशेषज्ञों का सुझाव साफ़ है फ़सल चक्र को मिट्टी के प्रकार के अनुसार अपनाना होगा। रेतीली ज़मीन पर कम पानी वाली फ़सलें (जैसे दालें, मोटे अनाज) और अच्छी दोमट ज़मीन पर गन्ना-गेहूं यही सही रणनीति है।

किसानों को अपनी मिट्टी की जाँच रिपोर्ट को गंभीरता से लेना चाहिए। कुल मिलाकर शाहजहाँपुर की ज़मीन का नक्शा हमारे भविष्य का दस्तावेज़ है। हमारी मिट्टी मूक है, वह अपनी तकलीफ बोल नहीं सकती, लेकिन गिरती पैदावार उसकी चीख है। आज अगर हम इस 'गुप्त नक्शे' को पढ़ लेंगे और समझदारी से कदम उठाएंगे, तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को बंजर ज़मीन का सामना नहीं करना पड़ेगा।

सन्दर्भ 
https://tinyurl.com/2crkwgg8
https://tinyurl.com/2488r4np
https://tinyurl.com/29crgu32
https://tinyurl.com/24w5h2dq
https://tinyurl.com/2b5rqym7
https://tinyurl.com/2xnmm4ry

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