राग रामदासी मल्हार: अनूठे स्वर-विन्यास से सजा वर्षा ऋतु का विशिष्ट राग

ध्वनि I - कंपन से संगीत तक
19-07-2026 09:12 AM
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अगर मल्हार राग-परिवार के अपेक्षाकृत कम प्रस्तुत किए जाने वाले रागों की बात की जाए, तो राग रामदासी मल्हार अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यह राग वर्षा ऋतु से जुड़े मल्हार अंग की मधुरता को अपने अनूठे स्वर-विन्यास के साथ प्रस्तुत करता है। यद्यपि इसकी प्रस्तुतियाँ मियाँ की मल्हार या मेघ मल्हार की तुलना में कम सुनने को मिलती हैं, फिर भी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में इसे एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली राग माना जाता है।

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रामदासी मल्हार अपनी गंभीर, संतुलित और भावपूर्ण प्रकृति के लिए जाना जाता है। इसकी रचना में मल्हार के विशिष्ट स्वरांगों के साथ ऐसे स्वर-प्रयोग मिलते हैं, जो इसे अन्य मल्हार रागों से अलग पहचान देते हैं। आलाप, बंदिश और तानों के माध्यम से कलाकार इस राग के विभिन्न भावों को विस्तार देते हैं, जिससे प्रत्येक प्रस्तुति में नई कल्पनाशीलता और संगीतात्मक सौंदर्य उभरकर सामने आता है।

इस राग की विविध प्रस्तुतियाँ इसकी गहराई और अभिव्यक्ति को समझने का अवसर प्रदान करती हैं। पंडित वेंकटेश कुमार की गायकी में रामदासी मल्हार का गंभीर और विस्तृत स्वरूप सुनाई देता है। पंडिता पद्मा तलवलकर अपनी सधी हुई शैली में इसकी कोमलता और भाव-संपन्नता को प्रस्तुत करती हैं, जबकि उस्ताद अमीर ख़ाँ की प्रस्तुति राग की विलंबित विस्तार शैली और सूक्ष्म स्वर-विन्यास का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

यदि आप मल्हार राग-परिवार के कम परिचित लेकिन अत्यंत समृद्ध रागों का अनुभव करना चाहते हैं, तो राग रामदासी मल्हार की ये प्रस्तुतियाँ एक उत्कृष्ट शुरुआत हैं। इनमें वर्षा ऋतु का सौंदर्य, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गहराई और कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम सुनाई देता है।

संदर्भ -
https://tinyurl.com/32tr7655
https://tinyurl.com/553dyhr6
https://tinyurl.com/5ywpp8nm
https://tinyurl.com/yjz9b4m8 

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