आखिर क्यों सेमीकंडक्टर को 'नया तेल' कहा जा रहा है?

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आखिर क्यों सेमीकंडक्टर को 'नया तेल' कहा जा रहा है?

आज के डिजिटल युग में, एक मनुष्य के नाखून के बराबर क्षेत्र में समाए छोटे से सेमीकंडक्टर चिप के भीतर अरबों ट्रांजिस्टर मौजूद हो सकते हैं। यह तथ्य सुनने में किसी विज्ञान कथा जैसा लगता है, लेकिन यही आधुनिक तकनीक की वास्तविकता है। सेमीकंडक्टर चिप्स आज हमारे स्मार्टफ़ोन, कंप्यूटर, वाहनों और यहाँ तक कि घरेलू उपकरणों के 'दिमाग' के रूप में कार्य करते हैं। इनके बिना हमारी डिजिटल दुनिया थम सकती है। यही कारण है कि आज भारत अपनी 'सेमीकंडक्टर मिशन' के ज़रिए इस वैश्विक रेस में मज़बूती से कदम रख रहा है।

सेमीकंडक्टर चिप्स क्या हैं और ये हमारे जीवन में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
सेमीकंडक्टर या अर्धचालक एक ऐसी सामग्री है जिसकी विद्युत चालकता (electrical conductivity) एक सुचालक (जैसे तांबा) और एक कुचालक (जैसे कांच) के बीच की होती है। विकिपीडिया के अनुसार, सिलिकॉन सबसे आम अर्धचालक सामग्री है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बनाने के लिए किया जाता है। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि डोपिंग (अशुद्धियों को मिलाना) के ज़रिए इनकी चालकता को बदला और नियंत्रित किया जा सकता है।

https://sceh.net/ 

ये छोटी सी चिप्स बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। जब हम अपने फ़ोन पर कोई ऐप खोलते हैं या कंप्यूटर पर कोई फाइल सेव करते हैं, तो ये चिप्स ही उन निर्देशों को प्रोसेस करती हैं। आईबीईएफ (IBEF) के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर की अपरिहार्य भूमिका के कारण इन्हें अक्सर 'नया तेल' कहा जाता है।

इनकी शुरुआत कैसे हुई और यह तकनीक कैसे विकसित हुई?
सेमीकंडक्टर तकनीक का इतिहास 19वीं शताब्दी से शुरू होता है, लेकिन असली क्रांति 20वीं सदी के मध्य में आई। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार, 1947-48 में बेल लेबोरेटरीज में अमेरिकी भौतिक विज्ञानी जॉन बर्दीन, वाल्टर ब्रेटन और विलियम शॉकली ने पहले ट्रांजिस्टर का आविष्कार किया था। यह आविष्कार वैक्यूम ट्यूबों का एक छोटा, कम बिजली खपत वाला और अधिक विश्वसनीय विकल्प साबित हुआ।

इसके बाद 1958 में जैक किल्बी ने पहला वर्किंग इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) प्रदर्शित किया और 1959 में रॉबर्ट नॉयस ने पहला 'मोनोलिथिक' आईसी चिप विकसित किया। इन आविष्कारों ने इलेक्ट्रॉनिक्स के लघुकरण (miniaturization) का रास्ता खोल दिया। मूर के नियम (Moore’s Law) के अनुसार, हर दो साल में एक चिप पर ट्रांजिस्टर की संख्या लगभग दोगुनी होती गई, जिससे चिप्स की गति लाखों गुना बढ़ गई और उनकी लागत कम होती गई।

File:Dallas Semiconductor DS12887 Real Time Clock.jpg

चिप बनाने की वैश्विक रेस में कौन आगे है?
दुनिया की सबसे उन्नत चिप्स का निर्माण वर्तमान में कुछ ही दिग्गजों के हाथों में है। टीएसएमसी (TSMC - Taiwan Semiconductor Manufacturing Company) वर्तमान में दुनिया की सबसे उन्नत चिप्स का लगभग 90% हिस्सा बनाती है। एनवीडिया (Nvidia), एप्पल (Apple), टेस्ला (Tesla) और एएमडी (AMD) जैसी बड़ी कंपनियाँ अपनी चिप्स के लिए टीएसएमसी की निर्माण तकनीक पर निर्भर हैं। टीएसएमसी के संस्थापक मॉरिस चांग, जिन्हें ताइवान के सेमीकंडक्टर उद्योग का 'गॉडफादर' कहा जाता है, का मानना है कि उनकी कंपनी उन्नत प्रक्रिया तकनीक और कुशल निर्माण के कारण अगले कुछ वर्षों तक अपनी बढ़त बनाए रखेगी।

टीएसएमसी के अलावा, इंटेल (Intel) और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung) भी इस रेस के प्रमुख खिलाड़ी हैं। ये कंपनियाँ भारी अनुसंधान और विकास (R&D), अत्याधुनिक 'फैब्स' (Fabs) और बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था (economies of scale) के कारण दूसरों से आगे हैं। उन्नत चिप्स के लिए 'अल्ट्रा-वायलेट लिथोग्राफी' और परमाणु-स्तर की इंजीनियरिंग की ज़रूरत होती है, जिसे वर्तमान में दुनिया की बहुत कम कंपनियाँ सफलतापूर्वक कर पाती हैं।

File:Tsmc factory hsinchu.JPG
टीएसएमसी (TSMC - Taiwan Semiconductor Manufacturing Company)

भारत इस क्षेत्र में कहाँ खड़ा है?
वर्तमान में, भारत अपनी सेमीकंडक्टर ज़रूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। इसका मुख्य कारण देश में 'सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन' सुविधाओं का अभाव रहा है। हालाँकि, अब यह स्थिति तेज़ी से बदल रही है। भारत सरकार ने 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' विज़न के तहत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने के लिए भारी निवेश और नीतिगत प्रोत्साहन दिए हैं।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स इस दिशा में सबसे बड़ा नाम बनकर उभरा है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने ताइवान की पीएसएमसी (PSMC) के साथ साझेदारी की है और गुजरात के धोलेरा में भारत का पहला एआई-सक्षम 300mm (12 इंच) फैब (Fab) स्थापित कर रहा है। यहाँ प्रति माह 50,000 वेफर्स बनाने की योजना है, जो एनालॉग और लॉजिक आईसी चिप्स का निर्माण करेंगे। यह प्लांट ऑटोमोटिव, कंप्यूटिंग, डेटा स्टोरेज और वायरलेस कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों की ज़रूरतों को पूरा करेगा।

इसके अतिरिक्त, माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Technology) गुजरात के साणंद में लगभग 22,516 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक एटीएमपी (ATMP - Assembly, Testing, Marking, and Packaging) सुविधा स्थापित कर रही है। वहीं, टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (TSAT) असम के मोरीगांव में एक ओसैट (OSAT) सुविधा शुरू कर रहा है।

भारत को इस क्षेत्र में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
इतनी बड़ी महत्वाकांक्षाओं के बावजूद, भारत के सामने कई कठिन चुनौतियाँ हैं। सबसे पहली चुनौती भारी पूंजी निवेश की है। एक सिंगल फैब बनाने में अरबों डॉलर खर्च होते हैं। दूसरी चुनौती अत्याधुनिक तकनीक का हस्तांतरण है। उन्नत चिप निर्माण के लिए गहरी विशेषज्ञता और वैश्विक दिग्गजों के भरोसे की ज़रूरत होती है।

इसके अलावा, अत्यधिक शुद्ध पानी की विशाल मात्रा, निर्बाध बिजली आपूर्ति और एक बहुत ही कुशल कार्यबल (जैसे वीएलएसआई डिज़ाइनर और प्रोसेस इंजीनियर) की आवश्यकता होती है। आईबीईएफ की रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला और फैब्रिकेशन तकनीक में मौजूदा कमियों के कारण भारत को अभी भी हाई-एंड चिप्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

भविष्य की राह क्या है और सरकार क्या कदम उठा रही है?
भारत इन कमियों को दूर करने के लिए 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के ज़रिए सक्रिय कदम उठा रहा है। फरवरी 2026 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'ISM 2.0' की घोषणा की है। इस नए मिशन का उद्देश्य केवल चिप्स बनाना ही नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर उपकरण, सामग्री और पूर्ण 'इंडियन आईपी' (Indian IP) विकसित करना भी है।

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के परिव्यय को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया है। इसके अलावा, उद्योग के नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि एक कुशल वर्कफोर्स तैयार किया जा सके। धोलेरा और साणंद जैसे क्षेत्रों को अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ तैयार किया जा रहा है ताकि वे वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक भारत के पास अपनी खुद की ऑपरेशनल एटीएमपी और ओसैट सुविधाएँ होंगी, और फैब्रिकेशन प्लांट का काम भी काफी आगे बढ़ चुका होगा। यह न केवल रोज़गार के लाखों अवसर पैदा करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में एक विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।

संदर्भ

1. https://tinyurl.com/ns7o5vr 

2. https://tinyurl.com/ttv5w88 

3. https://tinyurl.com/ctprjx5 

4. https://tinyurl.com/2dhsn6xs 

5. https://tinyurl.com/22cn2twf 

6. https://tinyurl.com/2arpppx3 

7. https://tinyurl.com/2bqno4k7 

8. https://tinyurl.com/2cqkgute 

9. https://tinyurl.com/2d4wdft9 

10. https://tinyurl.com/2983ffgh 

11. https://tinyurl.com/29tvvsb8 

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