जानिए, कैसे समुद्र सतह का अधिक तापमान और संवहन वर्षा हमारे कृषि मैदानों को सींचते हैं?

जलवायु और मौसम
21-09-2026 09:30 AM
जानिए, कैसे समुद्र सतह का अधिक तापमान और संवहन वर्षा हमारे कृषि मैदानों को सींचते हैं?

क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी पर विषुवत रेखा के पास स्थित क्षेत्रों में, भूमध्य रेखा से ऊपर स्थित समशीतोष्ण (Temperate) क्षेत्रों की तुलना में अधिक और भारी वर्षा होती है। यह अंतर, प्रत्यक्ष सौर विकिरण द्वारा नियंत्रित होता है। चूँकि भूमध्य रेखा पर वर्ष भर सीधी धूप (सौर किरण) पड़ती है, इसलिए यहाँ की सतह का पानी अत्यधिक दर से वाष्पित होता है। गर्म हवा में ठंडी हवा की तुलना में काफी अधिक जलवाष्प होती है। जैसे ही यह संतृप्त भूमध्यरेखीय हवा ऊष्मीय संवहन (Thermal convection) के माध्यम से तेजी से ऊपर उठती है, ऊपरी वायुमंडल में ठंडी हो जाती है। इससे बने घने बादलों के कारण भारी मात्रा में वर्षा होती है।

उष्णकटिबंधीय ‘समुद्र की सतह का तापमान (SST’) भूमध्यरेखीय क्षेत्र में वायुमंडलीय संवहन के निर्माण, तीव्रता और वितरण पर एक नियंत्रक प्रभाव डालता है। समुद्र सतह का गर्म या अधिक तापमान वाष्पीभवन को बढ़ाकर नमी की मात्रा बढ़ाता है, और गहरे संवहनी बहाव को बढ़ावा देता है। यह लेटेंट ऊष्मा (Latent heat) को मुक्त करके ऊर्ध्वाधर गति को संचालित करता है। यह प्रक्रिया वॉकर और हैडली चक्रों (Walker and Hadley cells), मानसूनी प्रवाह और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति जैसी प्रमुख संचलन विशेषताओं को रेखांकित करती है। इंडो-पैसिफिक वार्म पूल (Indo Pacific Warm Pool), समुद्र सतह के 28 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के साथ दुनिया के सबसे बड़े विस्तार के रूप में, एक ‘ऊष्मा इंजन’ के रूप में कार्य करता है।

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ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) के प्रभाव में, औसत समुद्र सतह तापमान और क्षोभमंडल (Troposphere) में तापमान का स्तरीकरण दोनों समायोजित होता है। आज, ग्लोबल वार्मिंग के युग में क्षेत्रीय वर्षा, चरम घटनाओं और बड़े पैमाने पर होने वाले वायुमंडलीय संचलन परिवर्तनों के अनुमानों में सुधार करने के लिए, समुद्र सतह तापमान प्रेरित गतिशीलता को समझना बेहद महत्वपूर्ण है।

भूमध्य रेखा से दूरी बढ़ने के साथ वर्षा की मात्रा कम हो जाती है। इसी कारण, उष्णकटिबंधीय क्षेत्र मौसमी, अंतर-वार्षिक और एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में होने वाले वर्षा के बड़े बदलावों के लिए जाने जाते हैं। ये स्थानिक-कालिक (Spatio-temporal) विविधताएँ दुनिया की आधी से अधिक आबादी के लिए पानी की उपलब्धता को नियंत्रित करती हैं। उष्णकटिबंधीय वर्षा में बदलाव वायुमंडलीय संचलन के साथ जुड़े हुए हैं, जो उस पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं, जो एक क्षेत्र में वाष्पित होकर दूसरे में वर्षा के रूप में गिरता है। उदाहरण के लिए, निचले-क्षोभमंडल अभिसरण (Convergence) के क्षेत्रों में ‘अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (Intertropical Convergence Zone - ITCZ)’ जैसे वर्षा क्षेत्र में होने वाली बारिश, इसी चक्र द्वारा संचालित होती है।

जैसे-जैसे जलवायु अधिक गर्म होती है, वायुमंडल अधिक जलवाष्प धारण कर सकता है, जिससे नम और सूखे क्षेत्रों के बीच तथा नम या बरसाती और सूखी अवधि के बीच का अंतर बढ़ जाता है। हालाँकि, वायुमंडलीय संचलन में परिवर्तन के कारण, नम या सूखे क्षेत्रों में बदलाव आ सकता है। उदाहरण के लिए, उष्णकटिबंधीय परिसंचरण के पूर्णतः कमजोर होने से उष्णकटिबंधीय वर्षा की स्थानिक परिवर्तनशीलता उतनी तेजी से नहीं बढ़ती है, जितनी कि वायुमंडलीय नमी की मात्रा में वृद्धि से उम्मीद की जाती है।

यहाँ यह जानना दिलचस्प होगा कि संवहनी नमी का क्षेत्र, भूमध्य रेखा पर प्रत्येक समय स्थिर नहीं रहता है। वह अपने आसपास के मौसम को भी प्रभावित करता है। वसंत ऋतु (अप्रैल-जून) के दौरान, उत्तर की ओर होने वाला प्रवाह एक ‘नम बेल्ट’ (Moisture belt) बनाता है, जो कुछ जगहों पर नमी के प्रवाह को स्थानांतरित करता है। चरम मानसून के मौसम (जुलाई-सितंबर) में, इसका दक्षिणी परिवहन कमजोर हो जाता है, लेकिन पश्चिमी परिवहन बढ़ जाता है। यह पश्चिम तट से दूर पश्चिम अफ्रीकी जेट (African jet) के मजबूत होने के कारण 20° उत्तर अक्षांश तक बढ़ जाता है।

कुल जलवाष्प प्रवाह घटकों के मौसमी तत्व बताते हैं कि क्षेत्रीय भौगोलिक घटक, कई जगहों पर औसत नमी परिवहन में सबसे बड़ा योगदान देते हैं। जबकि अनुदैर्ध्य या उत्तर-दक्षिण दिशा में प्रवाह, अन्य जगहों पर अधिक योगदान देता है।

 

संदर्भ

1. https://tinyurl.com/5fx7rant

2. https://tinyurl.com/36z6kuvs

3. https://tinyurl.com/y6fkbsaj

 

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