मोर के पंख क्यों बदलते हैं रंग: संस्कृति, प्रकृति और विज्ञान का इंद्रधनुषी रहस्य

पक्षी
21-01-2026 09:20 AM
मोर के पंख क्यों बदलते हैं रंग: संस्कृति, प्रकृति और विज्ञान का इंद्रधनुषी रहस्य

जौनपुरवासियों, प्रकृति ने हमें ऐसे अनेक अद्भुत दृश्य और रहस्य दिए हैं, जो देखने में जितने सुंदर लगते हैं, समझने में उतने ही रोचक भी हैं। मोर और उसके रंग-बिरंगे पंख भी ऐसा ही एक प्राकृतिक चमत्कार हैं, जिन्हें देखकर सदियों से मनुष्य आकर्षित होता आया है। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक प्रतीकों और वैज्ञानिक जिज्ञासा - तीनों के केंद्र में रहने वाला मोर केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि सौंदर्य और विज्ञान का अनोखा संगम है। विशेष रूप से इसके इंद्रधनुषी पंख आज भी लोगों के मन में यह सवाल पैदा करते हैं कि आखिर ये रंग बदलते हुए इतने चमकदार क्यों दिखाई देते हैं।
इस लेख में हम सबसे पहले मोर के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व को समझेंगे। इसके बाद, मोर के पंखों की बनावट और उनके धात्विक नीले-हरे रंग के पीछे छिपी संरचना पर चर्चा करेंगे। आगे, हम जानेंगे कि संरचनात्मक रंगाई क्या होती है और यह साधारण पिगमेंट (pigment) से कैसे अलग है। फिर, प्रकाश के कोण और हस्तक्षेप के माध्यम से मोर पंखों में दिखने वाली इंद्रधनुषीता के विज्ञान को समझेंगे। इसके साथ ही, प्रकृति में पाए जाने वाले अन्य इंद्रधनुषी उदाहरणों पर नज़र डालेंगे। अंत में, इस रंग प्रभाव की वैज्ञानिक समझ के विकास और मोर पंखों के शिल्प, सजावट व वैश्विक फैशन में उपयोग पर बात करेंगे।

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मोर का सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व
मोर भारतीय संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक विरासत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में मोरपंख को पवित्रता, सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक समझा जाता है, जिसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में सजा मोरपंख है। पौराणिक कथाओं में इंद्र देव के सिंहासन से लेकर स्वर्गीय वैभव तक मोर का उल्लेख मिलता है, जो इसकी दिव्यता को दर्शाता है। प्राकृतिक दृष्टि से मोर एक वन्य पक्षी है, जो प्रायः खुले वनों, खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है। नर मोर की लंबी, रंगीन और आकर्षक पूँछ केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं है, बल्कि वह प्रणय निवेदन और प्रजाति संरक्षण का भी महत्वपूर्ण साधन है। भारत और श्रीलंका का राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण नीले मोर को विशेष कानूनी संरक्षण प्राप्त है। जैव विविधता की दृष्टि से भारतीय मोर, दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला ग्रीन पीकॉक (green peacock) और अफ्रीका के कांगो बेसिन (Congo Basin) में रहने वाला कोंगो मोर - ये सभी प्रजातियाँ मोर की प्राकृतिक विविधता और वैश्विक उपस्थिति को दर्शाती हैं।

मोर के पंखों की बनावट और उनका धात्विक नीला-हरा रंग
मोर के पंख पहली नज़र में धात्विक नीले-हरे रंग के अत्यंत चमकदार और आकर्षक दिखाई देते हैं, लेकिन इस सुंदरता के पीछे एक अत्यंत जटिल सूक्ष्म संरचना छिपी होती है। वास्तव में, मोर के पंखों का मूल रंग भूरा होता है, किंतु उनकी सतह पर उपस्थित सूक्ष्म आँख-नुमा आकृतियाँ और हजारों बारीक शाखाएँ प्रकाश के साथ विशेष प्रकार की अंतःक्रिया करती हैं। प्रत्येक पंख में मौजूद सूक्ष्म संरचनाएँ प्रकाश को सीधे परावर्तित न करके उसे विभिन्न दिशाओं में विभाजित करती हैं, जिससे अलग-अलग रंग दिखाई देने लगते हैं। इन संरचनाओं के भीतर मौजूद बेहद छोटे कटोरेनुमा गड्ढे और परतें प्रकाश की तरंगों को नियंत्रित करती हैं। इसी कारण मोरपंख स्थिर अवस्था में भी जीवंत, गहराई से भरे और लगातार चमकते हुए प्रतीत होते हैं, मानो उनमें स्वयं प्रकाश समाया हो।

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संरचनात्मक रंगाई (Structural Coloration) क्या है?
संरचनात्मक रंगाई वह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी जीव का रंग रासायनिक पिगमेंट के कारण नहीं, बल्कि उसकी सतह की सूक्ष्म भौतिक संरचना के कारण उत्पन्न होता है। मोर के पंख इस प्रक्रिया का सबसे प्रसिद्ध और जटिल उदाहरण माने जाते हैं। जब प्रकाश की तरंगें पंखों की सूक्ष्म परतों और संरचनाओं से टकराती हैं, तो कुछ तरंगदैर्ध्य अवशोषित हो जाती हैं, जबकि कुछ परावर्तित या प्रकीर्णित हो जाती हैं। इस चयनात्मक परावर्तन के कारण ही नीले, हरे और फ़िरोज़ी रंग दिखाई देते हैं। पिगमेंट आधारित रंग जहाँ समय के साथ फीके पड़ सकते हैं, वहीं संरचनात्मक रंगाई लंबे समय तक स्थिर रहती है और देखने के कोण के अनुसार बदलती रहती है। यही विशेषता मोरपंख को साधारण रंगीन पंखों से अलग और अधिक आकर्षक बनाती है।

प्रकाश का कोण और मोर पंखों की इंद्रधनुषीता का विज्ञान
मोरपंखों की सबसे रोचक विशेषता उनकी इंद्रधनुषीता है, अर्थात् अलग-अलग कोणों से देखने पर रंगों का बदल जाना। यह प्रभाव प्रकाश की तरंगों के रचनात्मक और विघटनकारी हस्तक्षेप के कारण उत्पन्न होता है। जब किसी विशेष कोण पर प्रकाश की तरंगें एक-दूसरे के साथ तालमेल में होती हैं, तो वे एक-दूसरे को मजबूत करती हैं और रंग अधिक चमकीले दिखाई देते हैं। इसके विपरीत, कुछ अन्य कोणों पर तरंगें एक-दूसरे को कमजोर कर देती हैं, जिससे रंग हल्के या भिन्न प्रतीत होते हैं। इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण मोरपंख चलते समय, नाचते समय या केवल देखने की दिशा बदलने पर भी अलग-अलग रंगों की झलक दिखाते हैं। यह गुण मोरपंख को जीवंत और गतिशील सौंदर्य प्रदान करता है।

इंद्रधनुषीता के अन्य प्राकृतिक उदाहरण
मोर के अलावा प्रकृति में अनेक ऐसे जीव और पदार्थ हैं, जिनमें इंद्रधनुषी रंग दिखाई देते हैं। मोर्फो तितली (Morpho Butterfly) के पंख इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण हैं, जो चमकीले नीले रंग में प्रकाश को परावर्तित करते हैं। इसी प्रकार कुछ विशेष पक्षियों के पंख, भृंग (बीटल) की सतह और समुद्री जीवों की बाहरी परतों में भी संरचनात्मक रंगाई पाई जाती है। इन सभी में रंग किसी रासायनिक तत्व से नहीं, बल्कि सूक्ष्म संरचनाओं और प्रकाश के तरंग हस्तक्षेप से उत्पन्न होते हैं। ये उदाहरण यह दर्शाते हैं कि प्रकृति ने सौंदर्य और भौतिक विज्ञान को कितनी कुशलता से एक साथ जोड़ा है।

इंद्रधनुषी रंगों की वैज्ञानिक समझ का विकास
इंद्रधनुषी रंगों की वैज्ञानिक व्याख्या का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है। सबसे पहले रॉबर्ट हुक (Robert Hook) और आइज़ैक न्यूटन (Isaac Newton) ने प्रकाश और रंगों के व्यवहार पर अपने प्रयोगों के माध्यम से इस दिशा में आधार तैयार किया। बाद में थॉमस यंग ने “तरंग हस्तक्षेप” के सिद्धांत को प्रस्तुत किया, जिसने यह स्पष्ट किया कि पतली सतहों पर प्रकाश की तरंगें कैसे आपस में क्रिया करके विभिन्न रंग उत्पन्न करती हैं। यंग के अनुसार, कुछ कोणों पर प्रकाश की तरंगें रचनात्मक रूप से मिलती हैं, जिससे रंग अधिक तीव्र दिखाई देते हैं। इस सिद्धांत ने मोरपंख, तितलियों और अन्य प्राकृतिक संरचनाओं में दिखने वाली इंद्रधनुषीता को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

मोर पंखों का शिल्प, सजावट और वैश्विक फैशन में उपयोग
मोर के पंखों की सुंदरता केवल प्राकृतिक विज्ञान तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिल्प, कला और वैश्विक फैशन में भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। पारंपरिक भारतीय सजावट, धार्मिक अनुष्ठानों और हस्तकलाओं में मोरपंख का विशेष स्थान रहा है। ऐतिहासिक रूप से, लेडी कर्ज़न (Lady Curzon) की प्रसिद्ध पोशाक में मोरपंखों और बीटलविंग का उपयोग पश्चिमी फैशन में भारतीय कढ़ाई और सौंदर्य को वैश्विक पहचान दिलाने का उदाहरण है। इस पोशाक ने यह सिद्ध किया कि भारतीय शिल्पकला न केवल सांस्कृतिक बल्कि सौंदर्यात्मक दृष्टि से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली रही है। समय के साथ मोरपंख की चमक, संरचना और प्रतीकात्मकता ने कला, फैशन और डिज़ाइन की दुनिया को निरंतर प्रेरित किया है।

संदर्भ:
https://bit.ly/327MlNJ 
https://bit.ly/3uN6sNy 
https://bit.ly/3sdEvNe 
https://bit.ly/3wPoLDN 
https://tinyurl.com/2fctfxtx  

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