काशी में विश्वनाथ से प्रेरित क्रिकेट स्टेडियम का अर्थव्यवस्था पर मुमकिन प्रभाव

गतिशीलता और व्यायाम/जिम
12-05-2026 09:30 AM
काशी में विश्वनाथ से प्रेरित क्रिकेट स्टेडियम का अर्थव्यवस्था पर मुमकिन प्रभाव

क्या आपको मालूम है कि साल 1983 में जब भारत ने क्रिकेट विश्व कप जीता था, तब खिलाड़ियों को भत्ते के रूप में रोज़ाना केवल 200 रुपये और मैच फ़ीस के तौर पर 1500 रुपये मिलते थे। लेकिन आज यह खेल एक बहु-अरब डॉलर का उद्योग बन चुका है, जहां खिलाड़ियों को 1 से 7 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम भुगतान किया जाता है। भारत में क्रिकेट अब सिर्फ़ एक खेल नहीं बल्कि एक विशाल अर्थव्यवस्था बन चुका है। जौनपुर और पूर्वांचल के खेल प्रेमियों के लिए यह जानना और भी दिलचस्प होगा कि उनके नज़दीक वाराणसी में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम आकार ले रहा है, ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स का महत्व क्या है, जिस पिच पर मैच खेले जाते हैं वह कैसे तैयार होती है, और कैसे दुनिया भर की कंपनियाँ इस खेल में अंधाधुंध पैसा लगा रही हैं। 

जौनपुर और आस-पास के क्षेत्रों के लिए क्रिकेट के बुनियादी ढांचे में क्या बदलाव आ रहा है? 
भले ही वर्तमान में जौनपुर शहर में कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम नहीं है, लेकिन इसके ठीक बगल में स्थित वाराणसी शहर में एक नए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य ज़ोरों पर चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह स्टेडियम मई 2026 तक पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। इसके पूरा होने पर यह कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम, लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम, ग्रेटर नोएडा और इटावा के सैफई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के बाद उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बन जाएगा। इस स्टेडियम की दर्शक क्षमता 30,000 होगी, जिसे ज़रूरत पड़ने पर 40,000 तक बढ़ाया जा सकेगा। चूंकि यह वाराणसी के पवित्र शहर में बन रहा है, इसलिए इसका वास्तुशिल्प डिज़ाइन भगवान शिव से प्रेरित है। इसमें त्रिशूल के आकार की फ़्लडलाइट्स, अर्धचंद्र के आकार का रूफ़ कवर, घाट की सीढ़ियों जैसी बैठने की व्यवस्था, और मुखौटे पर बेलपत्र के आकार की धातु की चादरें होंगी। इसके अलावा इसका मीडिया सेंटर डमरू के आकार का होगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2023 को सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर और रवि शास्त्री जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में इस स्टेडियम की आधारशिला रखी थी। 

मैचों को प्रभावित करने वाली क्रिकेट पिच कैसे बनाई जाती है?
क्रिकेट का पूरा खेल मैदान के बीचों-बीच मौजूद 22 गज़ लंबी और 10 फ़ुट चौड़ी पिच पर निर्भर करता है। इसे बनाना एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें काफ़ी धैर्य की आवश्यकता होती है। सबसे पहले ज़मीन से घास, मिट्टी, कंकड़ और अन्य मलबे को हटाकर जगह को साफ़ किया जाता है। इसके बाद मिट्टी को समतल और संकुचित करके एक चिकनी सतह तैयार की जाती है। इस सतह पर अलग-अलग तरह की मिट्टी की परतें बिछाई जाती हैं। सबसे निचली परत में नरम मिट्टी का मिश्रण होता है जो स्थिरता प्रदान करता है, जबकि सबसे ऊपरी परत महीन और अच्छी तरह से ग्रेडेड मिट्टी की होती है, जो खेलने के लिए मुख्य सतह बनाती है। एक अच्छी सतह बनाए रखने के लिए नियमित रूप से पानी देना, घास काटना और रोलिंग करना ज़रूरी होता है। इसके लिए बड़े रोलर्स का उपयोग किया जाता है ताकि सतह को चपटा किया जा सके। 
 


पिच कितने प्रकार की होती हैं और खेल पर इनका क्या असर पड़ता है?
खेल के दौरान पिच की नमी, दरारें और धूल मैच का रुख़ तय करते हैं। हरी पिच पर घास और नमी होती है जो तेज़ गेंदबाज़ों को फ़ायदा पहुंचाती है। इसके विपरीत फ़्लैट ट्रैक पिच पर घास लगभग नहीं होती और यह बल्लेबाज़ी के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। सूखी पिच में नमी नहीं होती है और इस पर दरारें आसानी से बन जाती हैं, जो तेज़ गेंदबाज़ों और अनुभवी बल्लेबाज़ों दोनों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं। इसके अलावा गीली पिच पर नमी के कारण गेंद अप्रत्याशित रूप से फिसलती और उछलती है, जिससे बल्लेबाज़ों को मुश्किल होती है। धूल भरी पिचें नरम होती हैं और कम रोल की जाती हैं, जिससे स्पिनरों को गेंद घुमाने में काफ़ी मदद मिलती है। भारत जैसे देशों में गर्मी और सूखे के कारण पिचें धीमी होती हैं और स्पिनरों के लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित होती हैं। आजकल हाइब्रिड पिचें भी चलन में हैं, जिन्हें सिंथेटिक फ़ाइबर और प्राकृतिक घास को मिलाकर बनाया जाता है ताकि वे लंबे समय तक टिक सकें और जल निकासी बेहतर हो सके।  

भारत का सबसे पुराना और ऐतिहासिक क्रिकेट स्टेडियम कौन सा है?
भारत में क्रिकेट के इतिहास की बात करें तो कोलकाता का ईडन गार्डन्स सबसे ऐतिहासिक मैदान है। साल 1864 में स्थापित यह भारत का सबसे पुराना और नरेंद्र मोदी स्टेडियम के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। वर्तमान में इस स्टेडियम की दर्शक क्षमता 68,000 है। इसे भारतीय क्रिकेट का मक्का भी कहा जाता है क्योंकि यह क्रिकेट खेल के लिए आधिकारिक तौर पर बनाया गया भारत का पहला मैदान था। ईडन गार्डन्स ने विश्व कप, वर्ल्ड ट्वेंटी-20 और एशिया कप सहित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के मैचों की मेज़बानी की है। 1987 में यह विश्व कप फ़ाइनल की मेज़बानी करने वाला दूसरा स्टेडियम बन गया था। 22 नवंबर 2019 को इसी मैदान पर भारत और बांग्लादेश के बीच देश का पहला डे-नाइट टेस्ट मैच खेला गया था। ईडन गार्डन्स को इसके बड़े भावुक दर्शकों के लिए भी जाना जाता है। 1996 के विश्व कप सेमीफ़ाइनल में भारत और श्रीलंका के मैच के दौरान यहां 110,564 दर्शकों की रिकॉर्ड भीड़ देखी गई थी। इस मैदान पर स्टैंड्स का नाम प्रमुख स्थानीय क्रिकेटरों और सैनिकों के नाम पर रखा गया है, और साल 2024 में मशहूर भारतीय महिला तेज़ गेंदबाज़ झूलन गोस्वामी के नाम पर भी एक स्टैंड समर्पित करने का फ़ैसला लिया गया था।  

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विदेशी निवेशक और कंपनियाँ भारतीय क्रिकेट में इतना पैसा क्यों लगा रही हैं?
भारत में क्रिकेट अब महज़ एक शगल से विकसित होकर एक प्रमुख आर्थिक ताक़त बन गया है। विशेष रूप से टी-20 प्रारूप और 2008 में शुरू हुई इंडियन प्रीमियर लीग ने क्रिकेट की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है। आईपीएल आज दुनिया की सबसे अमीर और सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली क्रिकेट लीगों में से एक है। 2022 की मीडिया नीलामी में डिज़नी स्टार और वायकॉम 18 ने मिलकर टीवी और डिजिटल अधिकार 5.64 बिलियन डॉलर में ख़रीदे, जिससे आईपीएल दुनिया की दूसरी सबसे अमीर खेल लीग बन गई। इस अपार लोकप्रियता और राजस्व को देखते हुए विदेशी निवेशक भारतीय क्रिकेट में भारी निवेश कर रहे हैं। जो देश पारंपरिक रूप से क्रिकेट नहीं खेलते हैं, वे भी अब इस खेल में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।  

क्रिकेट से भारत की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को कैसे बढ़ावा मिल रहा है? 
विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल प्रसारण अधिकारों तक सीमित नहीं है। वे टी-20 लीगों में फ़्रैंचाइज़ी ख़रीदने में भी काफ़ी रुचि दिखा रहे हैं। उदाहरण के लिए, ब्रिटिश प्राइवेट इक्विटी फ़र्म सीवीसी कैपिटल पार्टनर्स ने अक्टूबर 2021 में 5625 करोड़ रुपये की भारी बोली लगाकर आईपीएल में गुजरात टाइटन्स फ़्रैंचाइज़ी ख़रीदी थी। इसके अलावा, विदेशी निवेशक प्रायोजन, एंडोर्समेंट, क्रिकेट अकादमियों के निर्माण, फ़ैंटेसी क्रिकेट प्लेटफ़ॉर्म और क्रिकेट पर्यटन पैकेजों के माध्यम से भी पैसा लगा रहे हैं। विराट कोहली, रोहित शर्मा और एमएस धोनी जैसे शीर्ष क्रिकेटरों के पास प्रमुख ब्रांड्स के साथ करोड़ों डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट हैं, जो उन्हें देश के सबसे अधिक भुगतान पाने वाले एथलीट बनाते हैं। कोटक सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिकेट विश्व कप 2023 से भारतीय अर्थव्यवस्था में 1.619 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक का योगदान मिलने का अनुमान लगाया गया था, जिसका एक बड़ा हिस्सा यात्रा और आतिथ्य क्षेत्रों से आना था। कुल मिलाकर, क्रिकेट की अर्थव्यवस्था भारत में विकास, रोज़गार और बुनियादी ढांचे के लिए एक मज़बूत स्तंभ साबित हो रही है।  


संदर्भ 
https://tinyurl.com/278dcy73
https://tinyurl.com/279mqjez
https://tinyurl.com/2b5ek3ty
https://tinyurl.com/24kds387
https://tinyurl.com/2a2to8vb 

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