हम, आज कुश्ती के इतिहास को समझेंगे, और पढ़ेंगे कि यह कुछ पुराने लड़ाकू खेलों में से एक के रूप में कैसे विकसित हुआ। फिर, हम यह पता लगाएंगे कि, भारत में कुश्ती कैसे विकसित हुई, और इसका पारंपरिक अखाड़ों से क्या संबंध है। लेख में आगे, हम देखेंगे कि महाभारत जैसे भारतीय महाकाव्यों में कुश्ती किस प्रकार वर्णित की गई है। इसके पश्चात, हम आधुनिक कुश्ती के नियमों और तकनीकों को देखेंगे। जबकि अंत में, हम कुश्ती में भारत की उपलब्धियों और हमारे राज्य उत्तर प्रदेश में इस खेल को बढ़ावा देने हेतु उठाए जा रहे कदमों की जांच करेंगे।
कुश्ती की उत्पत्ति, संभवतः हाथों या आमने–सामने की लड़ाई से हुई थी। यह विशेषतः लड़ाई के एक ऐसे खेल के रूप में उभरी, जिसमें प्रतिद्वंद्वी की मृत्यु के बजाय उसे हार स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जाता है। 3000 ईसा पूर्व की कुछ कलाकृतियां बेबीलोनिया (Babylonia) और मिस्र (Egypt) में प्रचलित ‘बेल्ट कुश्ती’ को दर्शाती हैं। सुमेरियन गिलगमेश (Sumerian Gilgamesh) महाकाव्य में भी ऐसी कुश्ती का वर्णन है। भारत में 1500 ईसा पूर्व से ही कुश्ती चली आ रही है। 700 ईसा पूर्व के चीनी दस्तावेज़ ‘लूज कुश्ती’ (loose wrestling) का वर्णन करते हैं, जबकि, पहली शताब्दी ईसा पूर्व के जापानी रिकॉर्ड भी ऐसा वर्णन करते हैं। बीसवीं शताब्दी में उत्तरी एवं पूर्वी यूरोप (Europe) तथा जापान में स्थानीय स्तर पर प्रचलित बेल्ट कुश्ती, 2500 ईसा पूर्व में मिस्रवासियों की कुश्ती से मेल खाती थी।

कुश्ती, संभवतः प्राचीन यूनानियों (Greeks) का सबसे लोकप्रिय खेल था। यूनानी युवा पुरुष, अपने सामाजिक जीवन के केंद्र बिंदु के रूप में पैलेस्ट्रास (Palaestras) या कुश्ती प्रशिक्षण केंद्रों से संबंधित थे। प्राचीन यूनानी फूलदानों और सिक्कों पर भी लूज कुश्ती के चित्र आम हैं। बाद में, 776 ईसा पूर्व से कुश्ती ओलंपिक खेलों का हिस्सा थी। दूसरी तरफ, कुश्ती यूनानियों की तुलना में रोमनों (Romans) के बीच कम लोकप्रिय थी। रोमन साम्राज्य के पतन के साथ, लगभग 800 ईस्वी तक यूरोप में कुश्ती के संदर्भ गायब हो गए।
जब फारस (Persia) के इस्लामी शासकों ने लगभग 800 ईसा पूर्व में तुर्क (Turk) सैनिकों को नियुक्त करना शुरू किया, तो वे सैनिक अपने साथ लूज कुश्ती की एक शैली लेकर आए। इसे कोरेश (Koresh) कहा जाता था। धीरे-धीरे तुर्कों ने पूरे मुस्लिम प्रभुत्व पर कब्ज़ा कर लिया, और वहां उनकी कुश्ती शैली फैल गई। बाद में, तेरहवीं शताब्दी में मंगोलियाई आक्रमणों (Mongolian invasions) से मंगोलियाई कुश्ती की शुरुआत हुई, जिसे शाही संरक्षण प्राप्त हुआ। इस प्रकार, कुश्ती आधुनिक ईरान (Iran) का राष्ट्रीय खेल बन गया।
जापानी बेल्ट-कुश्ती शैली - सूमो (Sumo), शाही संरक्षण (710-1185) के तहत एक लोकप्रिय दर्शक खेल था। सत्रहवीं शताब्दी तक सूमो कुश्ती, जापान में एक पेशेवर खेल बन गया था। जूडो (Judo) एक अन्य प्रमुख जापानी कुश्ती शैली है, जो बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में एक अंतरराष्ट्रीय खेल बन गई।
मध्य युग में, पूरे यूरोप में कई शैलियों में कुश्ती होती थी। पहला दर्ज इंग्लिश मैच, तेरहवीं सदी की शुरुआत में लंदन (London) में आयोजित किया गया था। इंग्लैंड (England) और ब्रिटनी (Brittany) में ‘जैकेट कुश्ती’ का एक रूप, जिसे ‘कॉर्नवाल व डेवोन (Cornwall and Devon)’ कहा जाता है, चौथी या पांचवीं शताब्दी से प्रख्यात है। रोमन साम्राज्य के शूरवीरों को, एक मार्शल कौशल के रूप में कुश्ती सिखाई जाती थी। मुद्रण की शुरुआत से पहले पांडुलिपियों में और उसके बाद प्रिंट में भी, कुश्ती नियम पुस्तकें दिखाई देती थीं। जबकि, भारत में 1526 की मुगल विजय के बाद, यहां शुरू की गई मंगोलियाई लूज कुश्ती, भारत और पाकिस्तान में ज्ञात है।
पहलवानी या कुश्ती, आज इस खेल का भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित एक पारंपरिक रूप है। इस खेल ने मुगल साम्राज्य के दौरान आकार लिया, जो फारसी कोष्टी पहलवानी और मल्ल-युद्ध की प्राचीन भारतीय परंपरा के मिश्रण से विकसित हुआ है। सदियों से, पहलवानी एक अनुशासन के रूप में विकसित हुई है। यह न केवल शारीरिक शक्ति और सहनशक्ति की परीक्षा है, बल्कि अनुष्ठान, अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत में निहित जीवन का एक तरीका भी है।
अखाड़े, न केवल कुश्ती प्रशिक्षण मैदान के रूप में, बल्कि कई युवा पहलवानों के लिए आश्रय के रूप में भी काम करते हैं। लड़के नौ या दस साल की उम्र से ही प्रशिक्षण शुरू कर देते हैं, ताकि भविष्य में वे पेशेवर पहलवान बन सकें। जब छात्र अखाड़े में रहते हैं, तो वे अधिक अनुशासित हो जाते हैं। परंतु आज भारत ने, अखाड़ों की मिट्टी कुश्ती को अंतरराष्ट्रीय मैट कुश्ती में परिवर्तित होतेे देखा है।
हाल के वर्षों में, महिलाएं भी इस खेल के केंद्र में रही हैं। साक्षी मलिक, फोगाट बहनें तथा अंतिम पंघाल जैसी महिला कुश्ती खिलाड़ियों का नाम हमने सुना ही हैं।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि, भारत में कुश्ती का एक उल्लेख, महाकाव्य महाभारत में, श्री कृष्ण के समय में भी मिलता है। एक बार, भीम, अर्जुन और कृष्ण, ब्राह्मणों के वेश में मगध की राजधानी - राजगृह गए थे। वहां जरासंध राजा ने उनका स्वागत किया, जो कृष्ण के दुश्मन थे। भीम, अर्जुन और कृष्ण ने अपनी असली पहचान बताए बिना, जरासंध को बताया कि भीम उसके साथ कुश्ती करना चाहते थे। दरअसल, भीम जरासंध को मारना चाहते थे। फिर भी, जरासंध ने अपने मेहमानों की तरह उनका शानदार आतिथ्य किया। कुछ दिनों बाद, कुश्ती का मुकाबला शुरू हुआ।
जरासंध के मुकाबले, भीम छोटा और कम ताकतवर था, और जरासंध की जान लेने में सक्षम नहीं था। छब्बीस दिनों तक, वे प्रतिदिन तीन घंटे तक युद्ध या कुश्ती करते रहे। तब कृष्ण ने, उस युद्ध को समाप्त करने का सोचा, क्योंकि, उन्हें एहसास हुआ कि वे कुश्ती में जरासंध को नहीं मार सकते। इसलिए उन्होंने गदाओं से युद्ध करने का सुझाव दिया। लेकिन भीम के असंख्य प्रहारों से भी जरासंध नहीं मरा।

अमावस्या की रात, जरासंध को अलौकिक शक्तियां प्राप्त होती थी। जब अमावस्या आती है, तो वह अपराजेय होता है। जरासंध भी, भीम को अमावस्या पर मारने का सोच रहा था। इसलिए, कृष्ण ने भीम से उसे अमावस्या के पहले दिन मारने को कहा। उस निर्णायक कुश्ती में, भीम ने जरासंध के पैर को तोड़ा, और उसे विपरीत दिशा में फेंक दिया। अतः जरासंध की मृत्यु हो गई।
आधुनिक कुश्ती, दरअसल इन सभी शैलियों से थोड़ी अलग है। एक सामान्य फ्रीस्टाइल कुश्ती मुकाबले को, तीन-तीन मिनट की दो अवधियों में विभाजित किया जाता है और बीच में 30 सेकंड का विराम होता है। आधिकारिक अंडर-15, कैडेटों और अनुभवी प्रतियोगिताओं के लिए, इस अवधि को दो-दो मिनट तक कम कर दिया गया है। दो प्रतिस्पर्धी पहलवान, नौ मीटर व्यास वाली एक चटाई पर एक-दूसरे का सामना करते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी के कंधों को थोड़े समय के लिए चटाई पर टिकाना होता है, जिससे प्रतिस्पर्धी पहलवान को गिराकर तत्काल जीत मिलती है।
चूंकि ऐसी जीत दुर्लभ होती है, इस खेल को अन्य तरीकों से भी जीता जा सकता है। कोई पहलवान, नियम होल्ड (Legal hold), थ्रो (Throw), या टेकडाउन (Takedown) की मदद से प्रतिद्वंद्वी को कुछ सेकंड के लिए, उसे मैट पर पीठ के बल गिराने या रिवर्सल (Reversal) तकनीक अपनाकर, अंक हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। जबकि, उलटफेर में, रक्षात्मक स्थिति से प्रतिद्वंद्वी की लाभ स्थिति को नकारना और उस स्थिति पर नियंत्रण हासिल करना शामिल है।
कुश्ती की चालें, उनकी कठिनाई के अनुसार अंक प्रदान करती हैं। साथ ही, यदि प्रतिद्वंद्वी किसी नियम का उल्लंघन करता है, तो खिलाड़ी ज्यादा अंक प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, एक मुकाबले के दौरान, तीन चेतावनियां पाने पर दोषी पहलवान को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।
छह मिनट की अवधि के अंत में, कुल अंकों का मिलान किया जाता है, और अधिक अंक वाला पहलवान जीत जाता है। बराबरी की स्थिति में, जिस पहलवान ने एक ही चाल में सबसे अधिक अंक बनाए हैं, उसे विजेता घोषित किया जाता है।
आठ ओलंपिक पदक जीतने के बाद, ग्रीष्मकालीन खेलों में, हॉकी के बाद कुश्ती भारत का दूसरा सबसे सफल खेल है। के. डी. जाधव ने भारत को पहला ओलंपिक पदक, पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 57 किलो श्रेणी में, हेलसिंकी 1952 (Helsinki 1952) में कांस्य पदक जीतकर दिया था। बीजिंग 2008 (Beijing 2008) में, पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 66 किलो श्रेणी में सुशील कुमार ने भी कांस्य पदक जीता था। सुशील कुमार ने ही, समान श्रेणी में लंदन 2012 (London 2012) में रजत पदक पाया। उसी ओलंपिक में, पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 60 किलो श्रेणी में योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक जीता।

दूसरी ओर, साक्षी मलिक ने रियो 2016 (Rio 2016) में महिलाओं की फ़्रीस्टाइल 58 किलो श्रेणी में कांस्य पदक जीता था। टोक्यो 2020 (Tokyo 2020) के दौरान, पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 57 किलो श्रेणी में, रवि कुमार दहिया रजत पदक पाकर जीतते है। उसी ओलंपिक में, बजरंग पुनिया पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 65 किलो श्रेणी में कांस्य पदक जीतते है। जबकि, पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 57 किलो श्रेणी में अमन सहरावत ने, हाल ही में पेरिस 2024 (Paris 2024) में कांस्य पदक जीता है।
इन्हीं उपलब्धियों के कारण, भारतीय कुश्ती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने हेतु, हमारी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2032 ओलंपिक तक पहलवानों के बुनियादी ढांचे और समर्थन में 170 करोड़ रुपये का निवेश करने की उम्मीद है। भारतीय कुश्ती महासंघ ने हमारी सरकार से यह समर्थन मांगा था। यह प्रायोजन केवल देश के विशिष्ट पहलवानों को ही नहीं, बल्कि कैडेट स्तर के पहलवानों को भी मिलेगा। इससे, राष्ट्रीय चैंपियनों को भी पुरस्कार राशि मिल पाएगी। साथ ही, कैडेट पहलवानों को प्रशिक्षण और प्रदर्शन के लिए विदेश भेजा जा सकता है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/a8xsyz66
2. https://tinyurl.com/3fu7dm5w
3. https://tinyurl.com/4w2r8c29
4. https://tinyurl.com/5cpsajc3
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