1000 साल, 7 शहर और इतने साम्राज्य: क्या आप जानते हैं हमारी राजधानी दिल्ली का यह इतिहास?

प्रारंभिक मध्यकाल : 1000 ई. से 1450 ई.
30-05-2026 09:10 AM
1000 साल, 7 शहर और इतने साम्राज्य: क्या आप जानते हैं हमारी राजधानी दिल्ली का यह इतिहास?

जब हम इतिहास के पन्नों को पलटते हैं, तो दिल्ली की एक बेहद अनोखी तस्वीर सामने आती है। दिल्ली के पुरातात्विक निष्कर्षों और हालिया खुदाइयों ने यह साबित कर दिया है कि यहाँ तीसरी और चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर मुग़ल काल तक सांस्कृतिक परतों की एक निरंतर और अटूट श्रृंखला मौजूद रही है। इतिहासकार और पुरातत्वविद उस समय और भी हैरान रह गए जब यहाँ खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तनों के ऐसे अवशेष (पॉटरी फ्रैगमेंट्स) मिले जिनका समय काल लगभग एक हज़ार से पाँच सौ ईसा पूर्व माना जाता है। ये प्राचीन अवशेष इस बात की गवाही देते हैं कि दिल्ली महज़ कुछ सौ साल पुराना शहर नहीं है, बल्कि यह हज़ारों सालों से मानव सभ्यता और संस्कृति का एक बेहद महत्वपूर्ण और जीवंत केंद्र रहा है। शासक बदलते रहे, लेकिन इस ज़मीन ने हर दौर की संस्कृति को अपने भीतर संजो कर रखा।
 

दिल्ली के सात शहर – गॉर्डन रिस्ले हर्न, 1906

दिल्ली के सात शहर:
तोमर और चौहान वंश ने दिल्ली के पहले शहर 'लाल कोट' की नींव कैसे रखी?
अगर हम दिल्ली के पहले आधिकारिक शहर की बात करें, तो इसका निर्माण ग्यारहवीं शताब्दी में हुआ था। दिल्ली के इस सबसे पहले शहर को 'लाल कोट' के नाम से जाना जाता था, जिसकी स्थापना साल एक हज़ार साठ ईस्वी में तोमर वंश के शासकों द्वारा की गई थी। तोमर वंश ने इस शहर को अपनी सत्ता का एक मज़बूत केंद्र बनाया था। लेकिन बारहवीं शताब्दी के मध्य में इतिहास ने फिर करवट ली और चौहान वंश ने तोमर शासकों को सत्ता से हटाकर इस क्षेत्र पर अपना कब्ज़ा जमा लिया। चौहान शासकों ने इस शहर को केवल जीता ही नहीं, बल्कि इसका विस्तार भी किया। उन्होंने लाल कोट की पुरानी सीमाओं को और आगे बढ़ाया और इस नई व विस्तारित संरचना को 'क़िला राय पिथौरा' का नाम दिया। यह क़िला आज भी दिल्ली के शुरुआती राजनीतिक और सैन्य इतिहास का एक सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

दिल्ली सल्तनत के दौर में 'सीरी' और 'तुग़लक़ाबाद' का निर्माण कैसे हुआ?
दिल्ली ने सही मायनों में एक विशाल साम्राज्य की राजधानी का रूप तब लिया जब यहाँ 'दिल्ली सल्तनत' की स्थापना हुई। इसी दौर में दिल्ली का दूसरा शहर बसाया गया जिसे 'सीरी' के नाम से जाना गया। सत्ता के गलियारों में बदलाव का दौर जारी रहा और ख़िलजी वंश के पतन के बाद सत्ता तुग़लक़ वंश के हाथों में आ गई। साल तेरह सौ बीस से लेकर तेरह सौ चौबीस ईस्वी तक राज करने वाले ग़यासुद्दीन तुग़लक़ इस वंश के पहले शासक थे। अपनी सामरिक और प्रशासनिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने दिल्ली के तीसरे शहर की नींव रखी, जिसे आज हम 'तुग़लक़ाबाद' के नाम से जानते हैं। इसके विशाल और ऊँचे खंडहर आज भी तुग़लक़ वंश की वास्तुकला और उनके भव्य इरादों की गवाही देते हैं।

'जहाँपनाह' और 'फ़िरोज़ाबाद' के ज़रिए दिल्ली का भूगोल कैसे बदला गया?
तुग़लक़ वंश के शासकों ने दिल्ली के भूगोल और इसके शहरों के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। ग़यासुद्दीन तुग़लक़ के बाद जब मुहम्मद-बिन-तुग़लक़ सत्ता में आए, तो उन्होंने साल तेरह सौ छब्बीस-सत्ताईस ईस्वी में एक बहुत ही अनूठा निर्माण कार्य करवाया। उन्होंने दिल्ली के दो पुराने शहरों, यानी लाल कोट और सीरी को दो विशाल दीवारों के ज़रिए आपस में जोड़ दिया। इस तरह लाल कोट और सीरी के बीच की ज़मीन को सुरक्षित करके दिल्ली का चौथा शहर बसाया गया, जिसे 'जहाँपनाह' नाम दिया गया। इसके बाद साल तेरह सौ इक्यावन से तेरह सौ अट्ठासी तक शासन करने वाले फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने वास्तुकला की इस परंपरा को और आगे बढ़ाया। उन्होंने यमुना नदी के शांत तटों पर दिल्ली के पाँचवें शहर 'फ़िरोज़ाबाद' का निर्माण करवाया। हालांकि, यह भी एक ऐतिहासिक सत्य है कि दिल्ली पर राज करने वाले हर वंश ने अपना कोई नया शहर नहीं बसाया। पंद्रहवीं शताब्दी में राज करने वाले सैय्यद वंश और पंद्रहवीं शताब्दी के मध्य में राज करने वाले लोधी वंश ने अपने पीछे दिल्ली में कोई विशेष नया शहर या राजधानी नहीं छोड़ी।

दिल्ली का नक्शा – मिसेज़ शूस्मिथ का बनाया मज़ेदार कार्टून नक्शा (1930)

मुग़ल साम्राज्य ने 'दीनपनाह' और 'शाहजहाँनाबाद' की भव्यता को कैसे तराशा?
सोलहवीं शताब्दी के मध्य से लेकर सत्रहवीं शताब्दी के मध्य तक दिल्ली ने मुग़ल साम्राज्य की राजधानी के रूप में एक बहुत ही अस्थिर दौर देखा, जहाँ सत्ता का केंद्र अक्सर बदलता रहता था। मुग़ल बादशाह हुमायूँ ने वास्तुकला के इस ऐतिहासिक सफ़र में अपना योगदान देते हुए साल पंद्रह सौ तैंतीस ईस्वी में 'दीनपनाह' का निर्माण करवाया, जिसे दिल्ली का छठा शहर माना जाता है। लेकिन दिल्ली का सबसे भव्य और ऐतिहासिक रूप तब सामने आया जब मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने सत्ता सँभाली। साल सोलह सौ उनतालीस ईस्वी में बादशाह शाहजहाँ ने मुग़ल साम्राज्य की राजधानी को वापस दिल्ली लाने का एक बड़ा ऐतिहासिक फ़ैसला किया। इसी फ़ैसले के तहत उन्होंने एक पूरी तरह से चारदीवारी से घिरे हुए नए शहर का निर्माण करवाया। इस शहर को 'शाहजहाँनाबाद' का नाम दिया गया, जो मुग़ल वास्तुकला का सबसे बेहतरीन नमूना बना और इसे दिल्ली का सातवाँ शहर कहा गया।
 

अलेक्जेंडर राउज़ (Alexander Rouse), पीडब्ल्यूडी (PWD), दिल्ली का नक्शा


अंग्रेज़ों ने अपनी राजधानी के रूप में कलकत्ता छोड़कर आधुनिक 'नई दिल्ली' की रूपरेखा कैसे तैयार की?
समय का पहिया घूमता रहा और भारत के राजनीतिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ा बदलाव तब आया जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी ताक़त बढ़ानी शुरू की। साल अठारह सौ तीन ईस्वी में अंग्रेज़ों ने मराठों को एक निर्णायक युद्ध में हरा दिया और दिल्ली की ऐतिहासिक ज़मीन पर अपना पूरा कब्ज़ा कर लिया। लंबे समय तक अंग्रेज़ों की राजधानी कलकत्ता ही रही, लेकिन साल उन्नीस सौ ग्यारह ईस्वी में ब्रिटिश साम्राज्य ने एक बहुत ही अहम रणनीतिक फ़ैसला लिया। उन्होंने अपनी राजधानी को कलकत्ता से हटाकर पूरी तरह से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया। प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने और ब्रिटिश सत्ता की भव्यता को दर्शाने के लिए मुग़लों द्वारा बसाए गए पुराने शहर 'शाहजहाँनाबाद' के दक्षिण-पश्चिम इलाके में एक बिल्कुल नया शहर बसाया गया। इस नए और आधुनिक शहर को 'नई दिल्ली' का नाम दिया गया, जो आज भी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की गौरवशाली राजधानी के रूप में शान से खड़ा है।

दिल्ली को 'सात शहरों' (Seven Cities of Delhi) के रूप में देखने का नज़रिया आखिर मशहूर कैसे हुआ? 
दरअसल, इस पहचान को लोकप्रिय बनाने का बहुत बड़ा श्रेय गॉर्डन रिस्ले हर्न (Gordon Risley Hearn) को जाता है। सर गॉर्डन रिस्ले हर्न भारत में तैनात एक ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारी (इंजीनियर) और कर्नल थे। उनके पिता का नाम चार्ल्स शकबर्ग हर्न (1829–1884) और माता का नाम मार्गरेट मिलर मेगौन (1844–1932) था। उन्होंने अपनी शिक्षा विंचेस्टर कॉलेज, वूलविच मिलिट्री अकादमी और स्कूल ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग से पूरी की। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध किताब 'द सेवन सिटीज़ ऑफ़ दिल्ली' में सबसे पहले इस मुहावरे को गढ़ा था और दिल्ली के इस ऐतिहासिक सफर की तुलना सात पहाड़ियों वाले 'रोम' (Rome) शहर से की थी।

हर्न के इस ऐतिहासिक विचार को एक बेहद दिलचस्प और विज़ुअल रूप तब मिला, जब 1931 में 'नई दिल्ली' के औपचारिक उद्घाटन के मौके पर मिसेज शूस्मिथ (Mrs. Shoosmith) ने एक अद्भुत नक्शा तैयार किया। मिसेज शूस्मिथ, दिल्ली के निर्माण से जुड़ी प्रमुख ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स टीम (लुटियंस-बेकर) के एक सदस्य की पत्नी थीं। कॉमिक और मज़ेदार अंदाज़ में हाथ से बनाए गए इस नक़्शे (non-scale map) में दिल्ली के सभी 7 ऐतिहासिक शहरों के सफर को एक ही पन्ने पर बेहद बारीकी से कैद किया गया था। समय के उस दुर्लभ पल को दर्शाने वाले इस शानदार नक़्शे की इकलौती ज्ञात प्रति आज कैम्ब्रिज (Cambridge) में मिसेज शूस्मिथ के लिगेसी बॉक्स में सुरक्षित रखी गई है।

 

संदर्भ 
1. https://tinyurl.com/28aadpb6
2. https://tinyurl.com/2bcg3z3k
3. https://tinyurl.com/25bztq5l
4. https://tinyurl.com/6d8ewjn9 

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