आखिर क्यों राग सूर मल्हार को वर्षा ऋतु के शांत और मननशील रागों में गिना जाता है?

ध्वनि I - कंपन से संगीत तक
19-07-2026 09:15 AM

अगर मल्हार राग-परिवार के शांत और गंभीर रागों की चर्चा की जाए, तो राग सूर मल्हार एक विशिष्ट स्थान रखता है। इसे प्रायः “सूरदासी मल्हार” के नाम से भी जाना जाता है। परंपरागत रूप से इसका संबंध वर्षा ऋतु से माना जाता है, और इसकी मधुर तथा भावपूर्ण प्रकृति इसे मल्हार परिवार के अन्य रागों से अलग पहचान देती है।

सूर मल्हार अपनी सहज, शांत और आत्ममंथनपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है। इसकी स्वर-संरचना में वर्षा की कोमल फुहारों, ठंडी हवाओं और प्रकृति की ताजगी का आभास मिलता है। कलाकार आलाप, बंदिश और तानों के माध्यम से इस राग के विविध भावों को अभिव्यक्त करते हैं, जिससे प्रत्येक प्रस्तुति में इसकी अलग छटा दिखाई देती है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में इसे वर्षा ऋतु के उपयुक्त रागों में गिना जाता है, जो श्रोताओं को एक शांत और मननशील वातावरण का अनुभव कराता है।

इस राग की विभिन्न प्रस्तुतियाँ इसकी बहुमुखी प्रकृति को उजागर करती हैं। पंडित वेंकटेश कुमार की गायकी में सूर मल्हार की गंभीरता और विस्तार का सुंदर परिचय मिलता है। पंडित भीमसेन जोशी की प्रसिद्ध प्रस्तुति "गरजत आए" इस राग के भावों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है, जबकि कृष सुगंथ का सितार वादन इसकी मधुरता और प्रवाहपूर्ण स्वर-यात्रा को वाद्य संगीत के माध्यम से अनुभव कराने का अवसर देता है।

यदि आप वर्षा ऋतु से जुड़े ऐसे राग की खोज में हैं, जो तीव्रता से अधिक शांति और आत्मचिंतन का अनुभव कराए, तो राग सूर मल्हार की ये प्रस्तुतियाँ एक उत्कृष्ट परिचय हैं। इनमें भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा, वर्षा ऋतु का सौंदर्य और सुरों की गहन अभिव्यक्ति का सुंदर संगम सुनाई देता है।

संदर्भ -
https://tinyurl.com/rxhfy9fm
https://tinyurl.com/3yb4brt4
https://tinyurl.com/msjzccre
https://tinyurl.com/jt2spv7s 

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