आइए, आज प्राकृतिक, कृत्रिम और नैनोफाइबर जैसे धागों के प्रकारों का पता लगाते हैं, और समझते हैं कि उन्हें कैसे बनाया जाता हैं। फिर, हम उनकी लागत, आराम सुविधा और व्यावहारिकता की तुलना करेंगे, और देखेंगे कि क्यों कुछ कपड़े रोज पहनने के लिए अधिक उपयुक्त हैं। और लेख के अंत में, हम जांच करेंगे कि मशीन से बने कपड़ों का उदय पारंपरिक कारीगरों और उनकी आजीविका को कैसे प्रभावित कर रहा है।
रेशों (Fibers) को धागे में पिरोने के लिए ज़रूरी आवश्यकताओं में, कम से कम 5 मिलीमीटर की लंबाई, लचीलापन, एकजूटता या मजबूती और पर्याप्त ताकत होना शामिल है। धागे बनाने के लिए तंतुओं को आम तौर पर संयोजित किया जाता हैं और मोड़ा जाता है; जबकि इस प्रकार बने रेशों को काता जाता है। फिर धागे को आम तौर पर बुना जाता है, या कपड़े में बुना जाता है। कपड़े के एक टुकड़े में, असंख्य रेशे होते हैं। रेशे या धागे सभी कपड़ा उत्पादों की नींव हैं, और प्राकृतिक या मानव निर्मित हो सकते हैं। इस प्रकार, रेशों के तीन मूल प्रकार हैं:
1. प्राकृतिक रेशे
2. पुनर्निर्मित तंतु या मानव-निर्मित रेशे, और
3. कृत्रिम रेशे
आम तौर पर पुनर्निर्मित और कृत्रिम रेशों को सामूहिक रूप से मानव निर्मित रेशों के रूप में जाना जाता है। प्राकृतिक रेशे प्रकृति में पाए जाते हैं, जैसे कि - भेड़ से ऊन या कपास के पौधों से कपास। पुनर्निर्मित रेशे प्राकृतिक पॉलिमर (Polymer) से बने होते हैं, जो अपने मूल रूप में उपयोग करने योग्य नहीं होते हैं। लेकिन उपयोगी रेशे बनाने के लिए इनमें सुधार किया जा सकता है। कुछ सबसे पहले पुनर्निर्मित रेशों में से एक रेयोन (Rayon) था, जिसे विस्कोस (Viscose) या विस्कोस रेयोन भी कहा जाता है। इसे लकड़ी के गूदे से पुनर्निर्मित किया गया था।

अब एक ऐसे कपड़े की कल्पना करें, जो इतना हल्का हो कि आपको मुश्किल से ही महसूस हो; फिर भी यह इतना मजबूत हो कि, आपको हानिकारक रोगजनकों, चरम मौसम और यहां तक कि रासायनिक खतरों से भी बचा सके। दरअसल, नैनोफाइबर (Nanofiber) तकनीक इसे सामने ला रही है। नैनोफाइबर, इलेक्ट्रोस्पिनिंग (Electrospinning) नामक प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किए गए, एवं मानव बाल से भी छोटे और पतले फाइबर होते हैं। यह विधि एक विद्युत क्षेत्र का उपयोग करके, एक पॉलिमर घोल को अविश्वसनीय रूप से महीन धागों में बदलती है। इसके परिणामस्वरूप ऐसे फाइबर बनते हैं, जो हल्के, लचीले और बेहद टिकाऊ होते हैं।
सुरक्षात्मक वस्त्र, संतुलन बनाने के बारे में है, जिससे आप कवच जैसी सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन आप उसे महसूस नहीं करना चाहते हैं। नैनोफाइबर यहीं पर काम आते हैं। भारी महसूस होने वाले पारंपरिक सुरक्षात्मक कपड़ों के विपरीत, नैनोफाइबर वस्त्र सुरक्षा से समझौता किए बिना उच्च गतिशीलता प्रदान करते हैं। उनका सूक्ष्म आकार एक घनी एवं आपस में जुड़ी हुई संरचना बनाता है, जो बैक्टीरिया, वायरस और यहां तक कि महीन धूल कणों जैसे दूषित पदार्थों को रोकती है। साथ ही, ये फाइबर टूट-फूट और अधिक धुलाई का प्रतिरोध करते हैं, जो उन्हें उच्च जोखिम वाले व्यवसायों के लिए आदर्श बनाते हैं।
रेशे से कपड़ा बनाने की विधि में, कताई, बुनाई, रंगाई, मुद्रण या छपाई, और फिनिशिंग शामिल हैं। कताई वह प्रक्रिया है, जिसमें रेशों को सूत या धागे में बदला जाता है। साफ और संरेखित रेशे कताई मशीन में डाले जाते हैं। फिर, इन रेशों को आगे संरेखित करने और वांछित मोटाई प्राप्त करने के लिए बाहर निकाला जाता है, या लंबा किया जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि, वे रेशे चिकने और सुसंगत हों। निकाले गए रेशों को एक साथ घुमाकर धागा बनाया जाता है। रेशों को घुमाने से उन्हें मजबूती और एकजुटता मिलती है, जिससे धागा टिकाऊ बनता है और बुनाई के लिए उपयुक्त हो जाता है।
मशीन वाली कताई के विपरीत, पारंपरिक कताई विधियों का उपयोग सदियों से किया जाता रहा है। तकली और चरखा जैसे सरल उपकरणों का उपयोग करके, रेशों को मानवीय रूप से धागे में घुमाया जाता है। यह विधि श्रम-गहन और समय साध्य है, लेकिन अद्वितीय धागे का उत्पादन करती है। परंतु, प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति ने कताई प्रक्रिया में क्रांति ला दी है।
एक बार धागा बन जाने पर इसकी बुनाई की जाती है। बुनाई, धागों की संरचनाओं को एक-दूसरे से समकोण पर जोड़ने की प्रक्रिया है। ये दो संरचनाएं, ताना (अनुदैर्ध्य सूत) और बाना (अनुप्रस्थ सूत) हैं। कपड़ा बनाने के लिए, ताने के धागों को करघे पर तनाव में रखा जाता है, जबकि बाने के धागों को ताने के ऊपर और नीचे पिरोया या डाला जाता है। बुनाई की कई तकनीकें हैं, जिनमें से प्रत्येक में अलग-अलग बनावट, पैटर्न और विशेषताओं के साथ कपड़े बनाएं जाते है। सबसे सरल और बुनियादी बुनाई ऊपर उल्लेखित है। सादे बुनाई वाले कपड़े मजबूत और टिकाऊ होते हैं, और उनकी सतह सख्त और समतल होती है।

इसके अलावा, टवील बुनाई (Twill weave), साटन बुनाई (Satin weave), जैक्वार्ड बुनाई (Jacquard weave), और डॉबी बुनाई (Dobby weave) अन्य प्रमुख प्रकार हैं। समय के साथ बुनाई में करघे से लेकर, उन्नत स्वचालित मशीनों तक काफी विकास हुआ है।
इसके अलावा, जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा हैं, नैनोफाइबर के निर्माण के लिए इलेक्ट्रोस्पिनिंग एक परिवर्तनकारी तकनीक के रूप में उभरी है। यह तकनीक उनकी आकृति विज्ञान, संरचना और कार्यक्षमता पर सटीक नियंत्रण प्रदान करती है। यह बहुमुखी प्रक्रिया विविध सामग्रियों को एकीकृत करते हुए, अनुकूलित नैनोफाइबर उत्पादन की सुविधा प्रदान करती है। कोएक्सियल इलेक्ट्रोस्पिनिंग (Coaxial electrospinning), संरेखित इलेक्ट्रोस्पिनिंग (Aligned electrospinning), यार्न इलेक्ट्रोस्पिनिंग (Yarn electrospinning) और रोल-टू-रोल प्रक्रियाओं (Roll‐to‐roll processes) जैसी उन्नत इलेक्ट्रोस्पिनिंग तकनीकें, अगली पीढ़ी के नैनोमटेरियल के विकास का वादा करती हैं। इस प्रकार बने नैनोफाइबर को सक्रिय रूप से कार्यात्मक झिल्ली (Membrane), गैस सेंसर, ऊर्जा प्रणालियों और उत्प्रेरक प्रक्रियाओं पर लागू किया जा रहा है, जिससे इन संबंधित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान किया जा रहा है। जबकि, पर्यावरण के अनुकूल "हरित" पॉलिमर घोल के उपयोग के साथ, रोबोटिक्स-आधारित एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा संचालित अनुकूलन को एकीकृत करने की क्षमता पर जोर देना आवश्यक माना जा रहा है।

मानव निर्मित धागों में हो रही प्रगति के बावजूद, प्राकृतिक रेशे, कई कारणों से लोकप्रिय बने हुए हैं। प्राकृतिक रेशों में उच्च अवशोषण क्षमता होती है, क्योंकि पौधों और जानवरों के रेशों में पानी के प्रति गहरा आकर्षण होता है। यह प्राकृतिक रेशों को चादरों और तौलियों के लिए एक बढ़िया विकल्प बनाता है, क्योंकि इन वस्तुओं के लिए अवशोषण क्षमता एक महत्वपूर्ण कारक है। प्राकृतिक रेशों का पर्यावरणीय प्रभाव आमतौर पर मानव निर्मित रेशों की तुलना में कम होता है, क्योंकि प्राकृतिक रेशों की उत्पादन प्रक्रिया के दौरान अधिक रसायनों का उपयोग नहीं होता है। अधिकांश पौधे-आधारित रेशे मजबूत होते हैं। रेशम और ऊन जैसे पशु-आधारित रेशे भी मजबूत होते हैं।
दूसरी ओर, हमारे दैनिक जीवन में मानव निर्मित धागों के भी कई फायदे हैं। अधिकांश शुद्ध प्राकृतिक रेशे महंगे हो सकते हैं, जबकि, मानव निर्मित रेशे प्राकृतिक उत्पादों के सस्ते विकल्प हैं। कई सिंथेटिक कपड़े ऊन और रेशम जैसे प्राकृतिक कपड़ों के नकली संस्करण भी हैं। मानव निर्मित कपड़े अधिक दाग प्रतिरोधी होते हैं, और कुछ कपड़ों को दाग प्रतिरोधी बनाने के लिए ही डिज़ाइन किया गया है। इसलिए, ऐसे कपड़े दैनिक तौर पर एवं नियमित पहनावे के लिए बहुत अच्छे हो सकते हैं। जबकि कुछ प्राकृतिक रेशे पानी का प्रतिरोध करते हैं, मानव निर्मित रेशों को लगभग पूरी तरह से जलरोधी बनाने के लिए डिज़ाइन किया जा सकता है। इस कारण, वे बाहरी वातावरण और बारिश के लिए बहुत अच्छे हैं।
तेज़ फैशन के लिए, डिज़ाइन से लेकर उत्पादन तक त्वरित बदलाव की आवश्यकता होती है। स्वचालित मशीनें उन कार्यों को मिनटों में पूरा कर सकती हैं, जिनमें मानवीय रूप से घंटों लगते हैं। इससे समय की बचत होती है। उत्पादित कपड़ों का प्रत्येक टुकड़ा समान गुणवत्ता बनाए रखता है, जिससे सुसंगति रहती है। साथ ही, सटीक कटाई और सिलाई कपड़े के अपशिष्ट को कम करती है, जिससे प्रक्रिया अधिक कुशल हो जाती है। दूसरी ओर, उन्नत मशीनरी के साथ, तेजी से और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर नई शैलियां पेश की जा सकती हैं।
शायद, इन्हीं कारणों की वजह से भारत में स्वदेशी कला, शिल्प और हथकरघा उत्पादों की मांग और बाजार में, हाल के वर्षों में भारी गिरावट देखी गई है। ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से मशीन-निर्मित उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता, और उत्पाद की गुणवत्ता के लिए निगरानी की कमी के कारण, कला और शिल्प क्षेत्र सामान्य हो गया है। यह स्वदेशी और पारंपरिक हस्तशिल्प व्यवसायों के लिए हानिकारक है। इसके साथ ही, उत्पाद में विश्वास की कमी के कारण यह उपभोक्ता मांग भी कम करता है। अतः एक उपभोक्ता के रूप में आज यह हमारी जिम्मेदारी है कि, हम इन पारंपरिक बुनकरों से कपड़े खरीदकर उनकी मदद करें, और उनका रोज़गार बरकरार रखें।
संदर्भ
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2. https://tinyurl.com/mr3xneeb
3. https://tinyurl.com/8dz87x3h
4. https://tinyurl.com/483uba6k
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