लखनऊ में ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती लोकप्रियता: सेहत, खेती और भविष्य की नई उम्मीद

फल और सब्जियाँ
22-01-2026 09:22 AM
लखनऊ में ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती लोकप्रियता: सेहत, खेती और भविष्य की नई उम्मीद

लखनऊवासियों, हाल के वर्षों में आपने बाज़ारों, फ़लों की दुकानों और सुपरमार्केट में एक नए, गुलाबी-लाल रंग के फल की बढ़ती मौजूदगी ज़रूर महसूस की होगी। यह फल है ड्रैगन फ्रूट (dragon fruit), जो अब सिर्फ़ महानगरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लखनऊ जैसे शहरों में भी लोगों की पसंद बनता जा रहा है। बेहतर सेहत की चाह, नए स्वाद के प्रति बढ़ती रुचि और किसानों के लिए इसके लाभकारी होने ने इस फल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यही कारण है कि आज ड्रैगन फ्रूट केवल एक विदेशी फल नहीं, बल्कि भारत की उभरती बागवानी फ़सलों में गिना जाने लगा है।
आज इस लेख में हम समझेंगे कि भारत में ड्रैगन फ्रूट की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है और इसमें सरकार की क्या भूमिका है। इसके बाद, हम इसके पोषण और स्वास्थ्य लाभों पर नज़र डालेंगे। आगे, ड्रैगन फ्रूट की खेती की विशेषताओं, उत्पादन और किस्मों की जानकारी लेंगे। अंत में, आयात-निर्यात, वैश्विक बाज़ार में भारत की स्थिति और किसानों की आय में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

भारत में ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती लोकप्रियता और सरकारी समर्थन
भारत में ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र और कई राज्य सरकारों ने इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम उठाए हैं। गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों की पहल के बाद केंद्र सरकार ने भी इस फल की खेती के विस्तार का निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि इसकी लागत प्रभावशीलता, पोषण मूल्य और वैश्विक मांग को देखते हुए भारत में इसकी खेती का बड़ा भविष्य है।
केंद्र सरकार राज्यों को अच्छी गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग कर रही है और बागवानी क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं के तहत किसानों को सहायता देने पर ज़ोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही, खेती के क्षेत्र को आने वाले वर्षों में हज़ारों हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

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ड्रैगन फ्रूट को “सुपर फ्रूट” बनाने वाले पोषण और स्वास्थ्य लाभ
ड्रैगन फ्रूट को “सुपर फ्रूट” (super fruit) कहा जाना यूँ ही नहीं है। यह फल कैलोरी (calorie) में कम होता है और आयरन (iron), कैल्शियम (calcium), पोटेशियम (potassium) और जिंक (zinc) जैसे ज़रूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी इसे लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इसमें शर्करा की मात्रा संतुलित होती है। लखनऊ जैसे शहरों में, जहाँ लोग अब सेहत को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं, ड्रैगन फ्रूट एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर रहा है। इसके पोषण मूल्यों के कारण न सिर्फ़ घरेलू, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी इसकी मांग लगातार बनी हुई है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती की खासियतें और भारतीय परिस्थितियों में अनुकूलता
ड्रैगन फ्रूट की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पौधे को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। इसे बंजर और वर्षा आधारित भूमि दोनों में उगाया जा सकता है, जिससे यह उन क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी बन जाता है जहाँ पारंपरिक खेती कठिन होती है। यह पौधा कैक्टस (cactus) परिवार से संबंधित है और सूखी तथा अर्ध-शुष्क जलवायु में भी अच्छी तरह बढ़ सकता है। एक बार रोपण के बाद, यह पौधा 20 वर्षों से अधिक समय तक फल देता है, जिससे किसानों को लंबे समय तक लाभ मिलता है।

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उत्पादन, किस्में और उपज: खेती से बाज़ार तक का सफ़र
भारत में किसान मुख्य रूप से ड्रैगन फ्रूट की तीन किस्मों की खेती करते हैं - गुलाबी त्वचा वाला सफेद गूदे का फल, गुलाबी त्वचा वाला लाल गूदे का फल और पीली त्वचा वाला सफेद गूदे का फल। अच्छी तरह से प्रबंधित बाग़ानों में पौधे पहले वर्ष से ही फल देना शुरू कर सकते हैं, जबकि तीसरे वर्ष से अच्छी पैदावार मिलने लगती है। फलन सामान्यतः जून से नवंबर के बीच होता है और एक फल का वज़न 200 से 700 ग्राम तक हो सकता है। बाज़ार में इसके दाम फल के आकार और गूदे के रंग के अनुसार बदलते रहते हैं, जिससे किसानों को अच्छे भाव मिलने की संभावना रहती है।

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आयात, निर्यात और वैश्विक बाज़ार में भारत की स्थिति
वर्तमान में भारत में ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन सीमित है, जिसके कारण देश को इसकी एक बड़ी मात्रा आयात करनी पड़ती है। वहीं, वियतनाम और चीन जैसे देशों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। बावजूद इसके, भारत में भी इतनी क्षमता मौजूद है कि आने वाले समय में आयात पर निर्भरता कम की जा सके। भारत से इस फल का निर्यात फ़ारस की खाड़ी के देशों, यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे बाज़ारों में किया जा सकता है। हाल के वर्षों में निर्यात की शुरुआती पहल भी हो चुकी है, जो इसके उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करती है।

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किसानों की आय और आत्मनिर्भर भारत में ड्रैगन फ्रूट की भूमिका
ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के लिए कम जोखिम और अधिक लाभ वाली मानी जाती है। इस पर कीटों और बीमारियों का प्रभाव कम होता है, जिससे रखरखाव का ख़र्च भी घटता है। इसके साथ ही, नर्सरी व्यवसाय के रूप में भी यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बन रहा है। खेती और उत्पादन के क्षेत्र में इसके विस्तार से न केवल किसानों की आय बढ़ सकती है, बल्कि आयात में कमी लाकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी यह फल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इन्हीं सभी कारणों से ड्रैगन फ्रूट की लोकप्रियता भारत में लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की उम्मीद की जा रही है।

संदर्भ–
https://bit.ly/3vFzbqk 
https://bit.ly/3Crumo9
https://tinyurl.com/tz2rxfpj 

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