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मेरठ के कई लोग इस बात से सहमत होंगे कि जूते हमारे परिधान का एक ऐसा हिस्सा हैं, जो उन्हें आत्म-अभिव्यक्ति का एक शक्तिशाली माध्यम प्रदान करते हैं। इनके अद्वितीय डिज़ाइन, रंग और सीमित-संस्करण, लोगों के व्यक्तित्व को निखारने के साथ विभिन्न रुझानों और उपसंस्कृतियों से जुड़ने में उनकी मदद करते हैं। भारत में जूता निर्माण के लिए कई प्रमुख केंद्र हैं, जिनमें आगरा, कानपुर, चेन्नई और पंजाब (विशेष रूप से जालंधर और लुधियाना) शामिल हैं। आगरा, चमड़े के जूतों के निर्यात का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। जूता उत्पादन के सटीक चरण, कारखाने, उपकरण, सामग्री और जूते के डिज़ाइन के अनुसार अलग-अलग होते हैं। सबसे सरल जूते के डिज़ाइन में भी शुरू से अंत तक लगभग 100 चरण होते हैं। अधिक जटिल डिज़ाइनों में 400 या उससे अधिक चरण हो सकते हैं। हालांकि, जूते के डिज़ाइन बहुत भिन्न होते हैं, लेकिन अधिकांश जूतों में कुछ सामान्य, बुनियादी भाग होते हैं, जैसे कि उनक सोल (sole), इनसोल (insole), आउटसोल (outsole), मिडसोल (midsole), हील (heel) और अपर (upper)। विशिष्ट डिज़ाइनों के आधार पर, जूतों में लाइनिंग (lining), टंग (tongue), क्वार्टर (quarter), वेल्ट (welt) या बैकस्टे (backstay) भी हो सकते हैं। जूता-निर्माण प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाने के लिए, आधुनिक कारखाने नेस्टिंग (nesting) नामक एक विनिर्माण प्रक्रिया का उपयोग करते हैं, जो जूते के उत्पादन के कई चरणों को कारखाने में कई अलग-अलग विभागों में विभाजित करती है। इन विभागों के नाम आमतौर पर उनके द्वारा किए जाने वाले विशिष्ट कार्यों को दर्शाते हैं, जैसे कि डिज़ाइनिंग, कटिंग, मशीनिंग, सिलाई, असेंबलिंग और फ़िनिशिंग। तो आइए, आज हम विभिन्न चलचित्रों की मदद से, जूतों की विनिर्माण प्रक्रिया को समझने की कोशिश करेंगे। फिर हम, दिल्ली में मौजूद एक जूता कारखाने का दौरा करेंगे। इसके बाद हम देखेंगे कि आगरा के प्रसिद्ध चमड़े के जूते कैसे बनते हैं। साथ ही, एक अन्य वीडियो के माध्यम से, हम जूता उत्पादन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तकनीकों और विवरणों जैसे कच्चा माल, निर्माण के लिए आवश्यक समय, आवश्यक निवेश, लाभ मार्जिन आदि के बारे में जानेंगे। अंत में, हम समझेंगे कि अपना खुद का जूता निर्माण कारखाना कैसे शुरू किया जा सकता है।
संदर्भ:
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