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मेरठ का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले गजक, रेवड़ी, चाट, और बिरयानी की खुशबू तैरने लगती है। लेकिन मेरठ का खानपान सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं, यह यहां के सांस्कृतिक इतिहास और परंपराओं की भी झलक दिखाता है। सदियों पहले, जब मुगल और नवाबी संस्कृति का असर उत्तर भारत में फैला, तब मेरठ ने भी इस पाक-यात्रा में अपना खास स्थान बनाया। मुगलई और अवधी व्यंजनों का असर आज भी यहां के किचन से लेकर होटल-रेस्तरां तक साफ झलकता है। यहां के खानपान में खेत-खलिहान की सादगी और शहरी स्वाद का अद्भुत मेल है। दिन की शुरुआत अक्सर घर के ताज़ा बने पराठों और दही से होती है, जबकि शामें स्ट्रीट फूड (street food) और चाय की महफिलों में गुजरती हैं। सिंधु-गंगा के उपजाऊ मैदानों में पैदा होने वाला गेहूं, गन्ना, चावल, ये सब मेरठ की थाली में सीधे खेत से आते हैं। यही वजह है कि यहां का खाना ताज़गी और देसीपन का अलग ही स्वाद लिए होता है।
इस लेख में हम सबसे पहले जानेंगे कि मेरठ के खानपान का सांस्कृतिक मिश्रण किस तरह मुगलई, अवधी, और आधुनिक विदेशी व्यंजनों को एक साथ जोड़ता है। इसके बाद, हम घूमेंगे मेरठ की चाट और स्ट्रीट फूड संस्कृति में, जहां मटर चाट, टिक्की और पानी के बताशों की महक गलियों में बसती है। फिर, हम देखेंगे मेरठ की गजक और रेवड़ी की पहचान, जो सर्दियों की मिठास और शहर की शान दोनों है। अंत में, हम चखेंगे गर्मियों का स्वाद, कुल्फी और शिकंजी, जो तपती धूप में भी ताजगी का एहसास दिलाते हैं।
मेरठ की चाट और स्ट्रीट फूड संस्कृति
अगर आप मेरठ आएं और यहां की चाट न खाएं, तो मानिए आपकी यात्रा अधूरी रह गई। यहां की चाट सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि एक रिवाज़ है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। शाम होते ही छावनी के चाट बाज़ार में रौनक बढ़ जाती है, सदर की गलियों में भीड़ उमड़ पड़ती है, और अबू लेन में फैली मसालों व इमली की खुशबू आपको दूर से ही खींच लाती है। मटर चाट यहां की शान है, उबले मटर, पुदीना, इमली की मीठी-खट्टी चटनी और ऊपर से डाला गया मसालों का खास मिश्रण, हर निवाले में स्वाद का धमाका कर देता है। इसके साथ आलू टिक्की, मेथी टिक्की, बन (Bun) टिक्की, और पानी के बताशे (जिन्हें यहां प्यार से ‘पानी के बताशे’ कहा जाता है) हर उम्र के लोगों के फेवरेट (favorite) हैं। मेरठ का स्ट्रीट फूड सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं है, यह दोस्तों के मिलने-जुलने, हंसी-ठिठोली करने और रिश्तों को और गहरा बनाने का ज़रिया भी है।

मेरठ के खानपान की विशेष पहचान
मेरठ की सबसे बड़ी खूबी है कि यहां का हर स्वाद अपनी अलग पहचान रखता है। यहां के खाने में देसीपन के साथ एक खास नफ़ासत भी है। हाजी मुन्ना की बिरयानी का ज़िक्र हो और मुंह में पानी न आए, ऐसा नामुमकिन है, लंबे दाने वाले चावल, मसालों की खुशबू और नर्म मांस के टुकड़े आपको लखनऊ की गलियों में ले जाते हैं। वहीं, मोती महल की मुगलई डिशेज़ मसालों के सही संतुलन और बेहतरीन पकाने की कला का बेहतरीन उदाहरण हैं। और हां, मेरठ में खाने के विकल्प इतने विविध हैं कि आपको यहां शुद्ध शाकाहारी ढाबों से लेकर इटैलियन पिज़्ज़ा (Italian Pizza) और चाइनीज़ नूडल्स (Chinese Noodles) तक सब मिल जाएगा। यही विविधता इसे एक असली फूड-लवर (Food-Lover) का स्वर्ग बनाती है।

मेरठ की गजक और रेवड़ी की पहचान
सर्दियों का नाम लेते ही मेरठ में सबसे पहले गजक और रेवड़ी का ख्याल आता है। यह सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि शहर की पहचान और गर्व है। लगभग 150 साल पहले राम चंद्र सहाय नाम के एक मिठाईकार ने मेरठ में गजक बनाने की शुरुआत की थी, और आज यह परंपरा यहां के हर घर और हर गली में ज़िंदा है। तिल और गुड़ से बनी गजक सर्दियों में खास स्वाद देती है, लेकिन इसकी किस्में देखकर आप चौंक जाएंगे, खस्ता गजक, चॉकलेट (chocolate) गजक, काजू गजक, मलाई गजक और ड्राई फ्रूट (dry fruit) गजक तक यहां मिलती हैं। आज मेरठ में करीब 500 से ज्यादा दुकानें गजक बेचती हैं और यह मिठाई 18 से अधिक देशों में निर्यात होती है। लोग उम्मीद करते हैं कि इसे जल्द ही जीआई टैग (GI Tag) मिलेगा, ताकि इसकी विरासत और भी मज़बूत हो सके।
गर्मियों का स्वाद: कुल्फी और शिकंजी
अगर सर्दियों में गजक मेरठ की जान है, तो गर्मियों में यहां की कुल्फी और शिकंजी रूह को ठंडक देती है। मलाई, दूध और मेवे से बनी कुल्फी में कभी-कभी गुलाब या केसर का फ्लेवर (flavor) डालकर उसे और भी खास बना दिया जाता है। तपती दोपहर में यह कुल्फी एक ठंडी मिठास का एहसास कराती है। दिलचस्प बात यह है कि मेरठ की कुल्फी का नाम दिल्ली तक में मशहूर है, और दरियागंज की गलियों में ‘मेरठ की कुल्फी’ के बोर्ड (board) गर्व से लगे होते हैं। वहीं, मोदीनगर की जैन शिकंजी तो गर्मियों का अमृत है, नींबू, मसाले और बर्फ का ऐसा संतुलन कि पहला घूंट लेते ही जैसे शरीर में नई जान आ जाती है।
संदर्भ-
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