समय - सीमा 295
मानव और उनकी इंद्रियाँ 1078
मानव और उनके आविष्कार 844
भूगोल 271
जीव-जंतु 325
मेरठ से महज़ कुछ किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग 58 (NH 58) पर एक बेमिसाल शहर बसा है, जिसका नाम है ‘मोदीनगर'। उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद ज़िले में आने वाला यह शहर सिर्फ एक औद्योगिक केंद्र नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे महंगी और चकाचौंध से भरी क्रिकेट लीग 'इंडियन प्रीमियर लीग' (Indian Premier League) की नींव के तार भी इसी शहर के इतिहास से जुड़े हैं। साल 1933 में राय बहादुर गूजरमल मोदी (Rai Bahadur Gujarmal Modi) ने बेगमाबाद नामक गाँव की जगह पर एक चीनी मिल की स्थापना की थी। बाद में इसी जगह का नाम उनके सम्मान में मोदीनगर रखा गया। गूजरमल मोदी ने यहाँ कई बड़े उद्योग स्थापित किए और इस पूरे इलाके को एक नई पहचान दी। इन्हीं गूजरमल मोदी के परिवार से ताल्लुक रखने वाले उनके पोते का नाम ललित मोदी (Lalit Modi) है, जिन्हें आज पूरी दुनिया में क्रिकेट के सबसे बड़े और सबसे अमीर टूर्नामेंट के जन्मदाता के रूप में जाना जाता है।

ललित मोदी कौन हैं और उन्होंने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर कैसे बदली?
ललित कुमार मोदी एक भारतीय क्रिकेट प्रशासक और व्यवसायी हैं। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ललित मोदी का नाम एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दर्ज है जिसने खेल और व्यापार को एक साथ मिलाकर एक नया साम्राज्य खड़ा कर दिया। वे साल 2005 से 2010 तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) के उपाध्यक्ष रहे। इसके अलावा वे राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (Rajasthan Cricket Association) के अध्यक्ष पद पर भी काबिज रहे। लेकिन क्रिकेट की दुनिया में उनका सबसे बड़ा और ऐतिहासिक योगदान इंडियन प्रीमियर लीग की स्थापना करना था। वे इस लीग के पहले अध्यक्ष और कमिश्नर थे। उन्होंने साल 2008 से लेकर 2010 तक शुरुआती तीन सालों के लिए इस टूर्नामेंट का सफलतापूर्वक संचालन किया और इसे ज़मीन से उठाकर एक वैश्विक ब्रांड बना दिया। उनकी इसी व्यावसायिक सोच ने क्रिकेटरों को रातों-रात करोड़पति बना दिया और खेल को देखने का नज़रिया पूरी तरह से बदल दिया।

इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें कौन सी टीमें शामिल थीं?
भारत में इस नई और अनोखी क्रिकेट लीग के शुरू होने के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। साल 2007 में जब ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises) ने अपनी खुद की 'इंडियन क्रिकेट लीग' (Indian Cricket League) शुरू करने का ऐलान किया, तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इसे आधिकारिक मान्यता देने से साफ़ इनकार कर दिया। इसके जवाब में और अपने क्रिकेटरों को इस नई बागी लीग में जाने से रोकने के लिए, बोर्ड ने एक नई फ्रेंचाइज़ी आधारित ट्वेंटी-ट्वेंटी प्रतियोगिता शुरू करने का फैसला किया। 13 सितंबर 2007 को बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर इंडियन प्रीमियर लीग की घोषणा कर दी। ललित मोदी, जिन्हें इस पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य रणनीतिकार माना जाता है, ने इस टूर्नामेंट के हर छोटे-बड़े पहलू को डिज़ाईन किया। साल 2008 में इसका पहला सीज़न खेला गया। इस पहले ऐतिहासिक सीज़न में कुल आठ टीमों ने हिस्सा लिया था। इन शुरुआती आठ टीमों के नाम चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings), दिल्ली डेयरडेविल्स (Delhi Daredevils), किंग्स इलेवन पंजाब (Kings XI Punjab), कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders), मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians), राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals), रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (Royal Challengers Bangalore) और डेक्कन चार्जर्स (Deccan Chargers) थे। 
आईपीएल को बुलंदियों पर ले जाने वाले ललित मोदी विवादों में कैसे घिरे?
ललित मोदी ने अपने असीम आत्मविश्वास और ऊंचे संपर्कों के ज़रिए आईपीएल को एक बहुत बड़ा ब्रांड बना दिया था। उन्होंने अपनी चतुराई के बल पर बड़े-बड़े क्रिकेट प्रशासकों, दिग्गज उद्योगपतियों और बॉलीवुड के नामचीन सितारों को एक ही मंच पर ला खड़ा किया था। लेकिन यह कामयाबी ज़्यादा समय तक बेदाग नहीं रह सकी। आईपीएल के तीसरे सीज़न के ठीक बाद, साल 2010 में ललित मोदी पर वित्तीय अनियमितताओं, अनुशासनहीनता और कदाचार के बेहद गंभीर आरोप लगे। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। जब उनके खिलाफ कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की जांच शुरू हुई, तो गिरफ्तारी से बचने के लिए वे साल 2010 में ही भारत छोड़कर लंदन भाग गए। इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने के लिए बोर्ड ने एक विशेष अनुशासन समिति का गठन किया था। लंबी जांच के बाद इस समिति ने ललित मोदी को कई आरोपों में दोषी पाया। इसके परिणामस्वरूप, साल 2013 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन पर भारत में क्रिकेट से जुड़े किसी भी पद को धारण करने पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया।
यह टूर्नामेंट अरबों रुपये कैसे कमाता है और इसका बिज़नेस मॉडल क्या है?
ललित मोदी के जाने और तमाम विवादों के बावजूद, आज यह टूर्नामेंट प्रति मैच मूल्य के हिसाब से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी खेल लीग बन चुकी है। इसका बिज़नेस मॉडल (Business Model) बहुत ही सुगठित और बहुआयामी है, जिसे मुख्य रूप से दो बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है। पहला हिस्सा 'सेंट्रल पूल' (Central Pool) कहलाता है, जिसे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड संचालित करता है। लीग की कमाई का सबसे बड़ा ज़रिया मीडिया अधिकार (Media rights) हैं, जो इसी सेंट्रल पूल का हिस्सा हैं। बड़े प्रसारणकर्ता इस टूर्नामेंट को टीवी और डिजिटल प्लैटफॉर्म (digital platform) पर दिखाने के लिए बोर्ड को अरबों डॉलर का भारी-भरकम भुगतान करते हैं। इसके अलावा लीग के मुख्य प्रायोजक और अन्य आधिकारिक साझेदार भी इसी पूल में पैसा डालते हैं। इस कुल भारी कमाई का एक बड़ा और तय हिस्सा बाद में सभी फ्रेंचाइज़ी टीमों के बीच बराबर बांट दिया जाता है, जिससे टीमों को एक पक्की आमदनी होती है। ![]()
फ्रेंचाइज़ी टीमें अपने स्तर पर पैसा कैसे जुटाती हैं?
सेंट्रल पूल से मिलने वाले पैसे के अलावा, हर फ्रेंचाइज़ी टीम अपने स्तर पर भी पैसा कमाने के कई तरीके अपनाती है। स्टेडियम में होने वाले मैचों के टिकटों की बिक्री से होने वाली आमदनी का एक बड़ा हिस्सा सीधे उस टीम को जाता है जिसके घरेलू मैदान पर मैच हो रहा होता है। इसके साथ ही टीम की जर्सी, टोपी और अन्य सामानों की बिक्री से भी उन्हें सीधी आमदनी होती है। इसके अलावा, हर टीम अपनी जर्सी, हेलमेट और पैड पर कई तरह के स्थानीय और राष्ट्रीय ब्रांड्स के विज्ञापन लगाती है। इस प्रायोजन के ज़रिए भी टीमें करोड़ों रुपये जुटाती हैं। खिलाड़ियों की नीलामी से लेकर स्टेडियम में दर्शकों के मनोरंजन तक, इस पूरे व्यापार को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि हर साल बोर्ड और फ्रेंचाइज़ी, दोनों ही भारी मुनाफा कमाते रहें और यह क्रिकेट लीग दुनिया में अपना दबदबा बनाए रखे।
संदर्भ
https://tinyurl.com/2abusthm
https://tinyurl.com/2yfudd29
https://tinyurl.com/27addcsw
https://tinyurl.com/22ehol4y
https://tinyurl.com/y9awmzkz
A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.
B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.
D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.
E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.