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| 1987 | 60 | 0 | 2047 | |
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निरमा के संस्थापक – कसानभाई पटेल का जन्म, 1945 में, गुजरात के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने आगे रसायन विज्ञान में बीएससी(BSc) की पढ़ाई पूरी की, और लैब टेक्नीशियन के रूप में काम किया। 1969 उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण वर्ष था, क्योंकि, उन्होंने फ़ॉस्फ़ेट (Phosphate) मुक्त कृत्रिम डिटर्जेंट पाउडर का प्रयोग, निर्माण और पैकेजिंग शुरू किया था। तब वे अपनी साइकिल पर घर-घर जाकर इसे बेचते थे। बाद में, 1970 के दशक में हिंदुस्तान यूनिलीवर द्वारा, बाज़ार में सर्फ़ लाया गया। परंतु, यह केवल अमीर लोगों के लिए ही लक्षित था। तब, यह सर्फ़ पाउडर, 13 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेचा जा रहा था। इसलिए, कसानभाई ने अपना डिटर्जेंट, 3.50 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेचना शुरू किया। निरमा के इस अनूठे मूल्य बिंदु ने मध्यम और निम्न-आय वर्ग का ध्यान आकर्षित किया। इससे हमें पता चलता है कि, यदि आप बाज़ार में प्रवेश करना चाहते हैं, तो मूल्य निर्धारण, इसके लिए एक प्रवेश द्वार हो सकता है।
इस प्रकार, 90 के दशक में, इस ब्रांड की भारी लोकप्रियता के कारण, भारत में इसकी 15% बाज़ार हिस्सेदारी संभव हो सकी। जबकि, सर्फ़ 65% बाजार हिस्सेदारी और लक्षित वर्ग के साथ, डिटर्जेंट का निर्विवाद नाम बना रहा था । हालांकि, 1985 में निरमा ने सर्फ़ को भी पीछे छोड़ दिया। इसके पश्चात, निरमा ने नहाने के साबुन, सोडा ऐश(Soda ash) और अन्य सफ़ाई उत्पादों को पेश करके, अपना विस्तार किया।
1987 में, हिंदुस्तान यूनिलीवर ने ‘ वील (Wheel)’ नामक एक डिटर्जेंट बार पेश किया था। लेकिन, खराब बिक्री के कारण इसे बंद करना पड़ा। हालांकि, कानूनी बाधाओं के कारण, उन्हें फिर से ‘ वील’ नाम ही चुनना पड़ा। A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.
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