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आज के लेख में हम समझेंगे कि, सॉवरेन एआई (Sovereign AI) या संप्रभु एआई क्या है, और इससे संबंधित प्रमुख पहलू क्या हैं। फिर, हम उन देशों की सूची देखेंगे, जिनके पास स्वतंत्र नियंत्रित इंटरनेट सिस्टम (Internet System) हैं। इसके अलावा, हम पूरी तरह से संप्रभु इंटरनेट के बिना, संप्रभु एआई प्राप्त करने की चुनौतियों का पता लगाएंगे। अंततः हम जांच करेंगे कि, क्या एक परस्पर जुड़ी वैश्विक प्रणाली में सच्ची डिजिटल संप्रभुता वास्तव में संभव है या नहीं।
सॉवरेन या संप्रभु एआई का उद्देश्य, एआई के देशज उत्पादन को सुनिश्चित करना है। इसमें एआई को प्रशिक्षित करने हेतु उपयोग किया जाने वाला डेटा, किसी क्वेरी (Query) या प्रश्न पर शोध करते समय एआई द्वारा खोजा गया डेटा, और किसी प्रश्न के जवाब में एआई द्वारा आउटपुट के रूप में उत्पन्न डेटा शामिल है।
इस संदर्भ में, संप्रभु एआई में "कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)" के रूप में लेबल की गई किसी भी या सभी प्रकार की प्रौद्योगिकियां शामिल हो सकती हैं। इसमें डेटा रुझानों को समझने और विसंगतियों को पहचानने के लिए मशीन लर्निंग (Machine Learning) भी शामिल है। ऐसे एआई में, एआई प्रौद्योगिकियों के उपयोग को नियंत्रित करने वाले नियम भी शामिल हो सकते हैं, जैसे कि गोपनीयता (Privacy) से संबंधित नियम।
संप्रभु एआई, डेटा संप्रभुता से संबंधित है। किसी कंपनी या संगठन को राष्ट्रीय नियमों पर विचार करना चाहिए कि, उनका डेटा कहां संग्रहीत और संसाधित किया जा सकता है। आज अधिकांश संगठनों के पास डेटा प्रशासन नीतियां मौजूद हैं। परीक्षण के आरंभ में ही उन नीतियों को एआई तक विस्तारित करने से, भविष्य में आने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है। इसी के साथ, इन्हें स्वीकार्य उपयोग को निर्देशित किया जा सकता है। यहां यह विचार भी महत्वपूर्ण है कि, एल्गोरिदम (Algorithm) को प्रशिक्षित करने के लिए डेटा का उपयोग कैसे किया जाता है, और तैयार एआई मॉडल क्या उत्तर प्रदान करते हैं।
संप्रभु एआई से संबंधित विचार करने के लिए, छह मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं: आपके संगठन पर लागू होने वाले नियमों को समझना; आपके पसंदीदा एआई बुनियादी ढांचे का निर्धारण करना; डेटा स्थानीयकरण नियंत्रण लागू करना; डेटा गोपनीयता नियंत्रण स्थापित करना; कानूनी नियंत्रण स्थापित करना और अपने एआई स्टैक (Data stack) को सुरक्षित करना। उदाहरण के तौर पर, वांछित एआई बुनियादी ढांचे के निर्धारण में क्लाउड (Cloud) शामिल है, जिसमें एआई बुनियादी ढांचे का निर्माण, संकलन और प्रबंधन करना अक्सर आसान होता है। इसके साथ ही, यदि आपका क्लाउड डेटा संप्रभुता मुद्दों को प्रबंधित करने में आपकी सहायता कर सकता है, तो आपके लिए एआई संप्रभुता के साथ काम करना आसान हो जाएगा।
एक तरफ डेटा गोपनीयता, डेटा के प्रकार और इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है, पर केंद्रित है। इसके लिए, आपके सॉफ़्टवेयर को एक लचीली नियंत्रण प्रणाली की आवश्यकता हो सकती है, जो जटिल उपयोग के मामलों को संभालने में सहायक हो। जबकि, एआई स्टैक को सुरक्षित करना, आखिरी पहलू है। कभी-कभी कंपनियां चाहती हैं कि एआई उनके सुरक्षा नियमों के अंदर काम करे। लेकिन इसके लिए ज्यादा जांच और परीक्षण करना पड़ता है। इसलिए वे ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए टेस्ट करती हैं, जहां यूज़र (user) गलत तरीके से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
चलिए, अब राष्ट्रीय इंट्रानेट (National intranet) के बारे में पढ़ते हैं। यह एक इंटरनेट शिष्टाचार-आधारित बंद नेटवर्क होता है, जिसे एक राष्ट्र द्वारा वैश्विक इंटरनेट के राष्ट्रीय विकल्प के रूप में बनाए रखा जाता है। इसका उद्देश्य अपने निवासियों के संचार को नियंत्रित करना और उसकी निगरानी करना है। साथ ही, बाहरी मीडिया तक उनकी पहुंच को यह प्रतिबंधित करता है। ईरान (Iran) में इसके लिए ‘हलाल इंटरनेट’ शब्द का उपयोग किया गया है। ऐसे नेटवर्क आम तौर पर राज्य-नियंत्रित मीडिया और विदेशी संचालित इंटरनेट सेवाओं के राष्ट्रीय विकल्पों तक पहुंच के साथ आते हैं, जैसे कि - खोज इंजन (search engine), वेब-आधारित ईमेल (Web-based email), इत्यादि।
राष्ट्रीय इंट्रानेट वाले देशों की सूची निम्नलिखित है-
1. म्यांमार (Myanmar),
2. क्यूबा (Cuba),
3. उत्तर कोरिया (North Korea),
4. रूस (Russia),
5. चीन (China),
6. ईरान।
एआई स्टैक पर पूर्ण स्वायत्तता का विचार, अधिकांश उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए आर्थिक और संस्थागत रूप से निषेधात्मक है। हर चीज़ स्वयं बनाना भी महंगा है। जब कोई राष्ट्र एआई स्टैक के हर स्तर का मालिक बनना चुनता है, तो जरूरी नहीं कि वह अपनी स्वतंत्रता प्राप्त कर रहा हो। एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि, अमेरिकी कंपनियों ने 18% डेटा सेंटर (Data Center) परियोजनाओं के लिए ऑपरेटर (Operator) के रूप में काम किया है। "संप्रभु" सुविधाओं का निर्माण करने वाले देश भी संचालन के लिए, अक्सर अमेरिकी हाइपरस्केलर्स (Hyperscalers) जैसे एडब्ल्यूएस (AWS), माइक्रोसॉफ्ट एज्यूर( Microsoft Azure), या गूगल क्लाउड (Google Cloud) पर निर्भर रहते हैं। जब क्षेत्रीय और परिचालन क्षेत्राधिकार पर विचार किया जाता है, तो एआई क्षमता सहित वैश्विक गणना पर अमेरिका का पर्याप्त प्रभाव है। व्यवहार में, अधिकांश "संप्रभु गणना" अमेरिकी प्रौद्योगिकी पर निर्भर रहती है। यह प्रश्न मौजूद है कि, एआई आपूर्ति श्रृंखला के किन हिस्सों पर एक राष्ट्र का स्वामित्व, नियंत्रण या शासन होना चाहिए; और एक राष्ट्र किन हिस्सों के साथ सुरक्षित रूप से साझेदारी कर सकता है, किराए पर ले सकता है या साझा कर सकता है? इस प्रश्न का उत्तर परिस्थिति के आधार पर बदलता रहता है। सामान्य रूप से संप्रभुता पाने के बजाय, इन परिस्थितियों को सही करना ही 2026 की रणनीतिक चुनौती है।
हाल ही में, यूरोपीय संघ (European Union) और भारत ने एआई विकास के लिए अधिक संप्रभु दृष्टिकोण की इच्छा व्यक्त की है। हालांकि अभी के लिए, यूरोपीय संघ और भारत के ‘एआई स्टैक’ आपूर्ति श्रृंखलाओं में मजबूती से अंतर्निहित हैं, जो कुछ अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा नियंत्रित हैं। चीन द्वारा नियंत्रित महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण और हार्डवेयर विनिर्माण (Hardware manufacturing) पर इनकी निर्भरता है। अमेरिका और भारत के बीच सहयोग, बुनियादी ढांचे, कॉर्पोरेट भागीदारी और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण पर केंद्रित है। उन्नत प्रोसेसर (Processor) और अच्छी कंप्यूटिंग क्षमता (Computing capacity) पर ध्यान देने के साथ, भारतीय कंपनियों को अमेरिकी अग्रणी एआई कंपनियों के साथ जोड़ने के लिए समझौते किए गए हैं। इससे भारत मौजूदा वैश्विक एआई आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक गहराई से एकीकृत होगा। इस प्रवृत्ति को भारत के अमेरिकी पहल ‘पैक्स सिलिका (Pax Silica)’ में शामिल होने से स्पष्ट किया गया है। इसका उद्देश्य चयनित भागीदारों के बीच एआई आपूर्ति श्रृंखलाओं में समन्वय और लचीलेपन को मजबूत करना है।

पूर्ण-स्टैक एआई संप्रभुता, लगभग किसी भी देश के लिए संरचनात्मक रूप से अव्यवहार्य है। क्योंकि एआई खनिजों, ऊर्जा, कंप्यूट हार्डवेयर, नेटवर्क, डिजिटल बुनियादी ढांचे (digital infrastructure), डेटा परिसंपत्तियों, मॉडलों, अनुप्रयोगों, प्रतिभा के क्रॉसकटिंग एनबलर्स (Crosscutting enablers) तथा शासन में केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय स्टैक है। इसलिए, विकल्प यह है कि एआई स्टैक में जोखिमों को कम करने के लिए रणनीतिक गठबंधन और साझेदारी पर काम करना चाहिए। अगर आपसी निर्भरता को सही तरीके से संभाला जाए, तो खुले बाजार और देशों के सहयोग के फायदे बने रहते हैं और साथ ही मजबूती भी बढ़ती है।
भारत डिजिटल संप्रभुता की बात करता है, और हमने डेटा स्थानीयकरण और देशज स्टार्टअप को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए हैं। रूस, ब्राज़ील (Brazil) और अन्य देशों ने अपने डिजिटल ढांचे को अधिक नियंत्रित करने की इच्छा व्यक्त की है। विश्व में आज विदेशी प्रौद्योगिकी पर कम निर्भर होने की चाहत, काफी सार्वभौमिक हो गई है। आधुनिक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र वैश्वीकृत है, और कोई भी एक राष्ट्र संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को नियंत्रित नहीं करता है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/zwhcj5xj
2. https://tinyurl.com/4ratzyea
3. https://tinyurl.com/4zdunpvb
4. https://tinyurl.com/3mbhjrnh
5. https://tinyurl.com/4j6nk324
6. https://tinyurl.com/5cccbf7f
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