रामपुर, चलिए आज मुरादाबाद के सुंदर व कुशल पीतल बर्तनों की शिल्पकारी पर करते हैं गौर

मिट्टी के बर्तन से काँच व आभूषण तक
03-07-2026 09:34 AM
रामपुर, चलिए आज मुरादाबाद के सुंदर व कुशल पीतल बर्तनों की शिल्पकारी पर करते हैं गौर

आज, हम पढ़ेंगे कि कुशल कारीगरों, कच्चे माल तक पहुंच और मजबूत वैश्विक व्यापार संबंधों के कारण मुरादाबाद एक प्रमुख धातु हस्तशिल्प निर्यात केंद्र कैसे बना। यहां अक्सर ही, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से अर्ध-तैयार बर्तन लाए जाते हैं, और स्थानीय स्तर पर उत्कीर्णन, परिष्करण और सजावटी कार्यों के माध्यम से उनकी सुंदरता को बढ़ाया जाता हैं। इसलिए, हम जांच करेंगे कि मशीन से बने धातु के बर्तनों को यहां कारीगरों द्वारा कैसे परिष्कृत किया जाता है, क्योंकि यह एक अनूठा मिश्रित विनिर्माण मॉडल दिखाता है।

File:Rotterdam stad heijplaat containers.jpg

हस्तशिल्प उद्योग, भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है, जिसमें सात मिलियन से अधिक लोग कार्यरत हैं। देश में लकड़ी के बर्तन, धातुकला के बर्तन, हस्तमुद्रित वस्त्र, कढ़ाई के सामान, ज़री के सामान, नकली आभूषण, मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, कांच के बर्तन, इत्र, अगरबत्ती आदि हस्तशिल्पों का उत्पादन होता है। हमारे देश में 744 हस्तशिल्प केंद्र हैं, जो लगभग 2,12,000 कारीगरों को रोजगार प्रदान करते हैं, और 35,000 से अधिक उत्पाद पेश करते हैं। सूरत, बरेली, वाराणसी, आगरा, हैदराबाद, लखनऊ, चेन्नई और मुंबई इन प्रमुख केंद्रों में से कुछ हैं। हालांकि, अधिकांश विनिर्माण इकाइयां ग्रामीण और छोटे शहरों में हैं, तथा सभी भारतीय शहरों और विदेशों में इस बाजार की अपार संभावनाएं हैं। विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर हस्तशिल्प उत्पादों की उपलब्धता में महत्वपूर्ण प्रगति, भारत में इसके बाजार की वृद्धि को बढ़ावा दे रही है।

चलिए, अब ऐसे एक केंद्र का उदाहरण देखते हैं, जो हमारे रामपुर के निकट भी है। ‘पीतल नगरी’ के नाम से प्रख्यात मुरादाबाद शहर, हस्तनिर्मित धातु के बर्तनों के लिए भारत का सबसे प्रसिद्ध केंद्र है। यह भारत के कुल हस्तशिल्प निर्यात में 40% से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार है। शिल्पकारों को मिले मुगल संरक्षण के रूप में शुरू हुआ यह उद्योग, आज 15,000 करोड़ मूल्य का बन गया है, जिसमें हजारों कुशल श्रमिक कार्यरत हैं। दुनिया भर में घरों, लक्जरी होटलों और जीवनशैली खुदरा विक्रेताओं को, यहां से हस्तनिर्मित बर्तनों व सजावट उत्पादों की आपूर्ति की जाती है।

दरअसल, शाहजहां के सबसे छोटे बेटे राजकुमार मुराद बख्श के सम्मान में इस शहर को "मुरादाबाद" नाम दिया गया था। मुगल संरक्षण के तहत, बनारस, लखनऊ, आगरा, जलेसर और कश्मीर से आए कुशल कारीगर इस शहर में बस गए। अपने साथ, वे भारतीय शिल्प कौशल के साथ फ़ारसी, तुर्की और मिस्र की सजावटी तकनीकों तथा धातुकर्म, उत्कीर्णन और मीनाकारी का ज्ञान लेकर आए। तांबे की परत वाले बर्तनों और पीतल के बर्तनों के लिए मुगल अभिजात वर्ग की प्राथमिकता ने, यहां तत्काल मांग पैदा की और मुरादाबाद इस शिल्प का घर बन गया।

शाहजहां के शासनकाल के दौरान ही, मुरादाबाद से पीतल के बर्तन ईरान, तुर्की और मध्य पूर्व में निर्यात किए जा रहे थे। हालांकि, ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान इस शिल्प को पहला मजबूत अंतर्राष्ट्रीय मंच मिला। ब्रिटिश व्यापारी, इस कला को सक्रिय रूप से विदेशी बाजारों में ले गए, और मुरादाबाद की निर्यात कहानी शुरू हुई।

मोरादाबाद के शिल्प के बारे में एक उल्लेखनीय और अल्पज्ञात तथ्य यह है कि, यहां बहने वाली रामगंगा नदी की रेत, धातु उत्पादों की गुणवत्ता में प्रत्यक्ष भूमिका निभाती है। चूंकि यह रेत असामान्य रूप से महीन और मुलायम है, यह वैशिष्ट्य इसे धातु ढलाई के जटिल सांचों के लिए प्राकृतिक रूप से बांधने वाली सामग्री बनाती है। यह एक ऐसा भौगोलिक लाभ है, जो किसी अन्य शहर में नहीं पाया जाता है। इसी कारण, इस शिल्प को जीआई टैग (GI tag) मिला है।

आज, मुरादाबाद धातु शिल्प अपनी उच्च गुणवत्ता, स्थायित्व, सौंदर्य डिजाइन और कुशल शिल्प कौशल के कारण बहुत मांग में है। इसके डिज़ाइन, इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, विरासत, इतिहास और विविधता को दर्शाते हैं।

भारत से हस्तशिल्पों के निर्यात में एक अन्य बात भी निर्णायक रही है। 1980 के दशक से, लक्जरी ब्रांडों ने अपने अधिकांश कढ़ाई काम का हमारे देश में ठेका दिया है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (India Brand Equity Foundation) के अनुसार, हमारा देश दुनिया के सबसे बड़े परिधान निर्यातकों में से एक है।

भारत के कशीदाकारी अर्थात कारीगर, दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में गिने जाते हैं। मुगल शासन के दौरान औपचारिक रूप से, कारीगरों ने पीढ़ियों तक अपनी कला को आगे बढ़ाया है। पश्चिमी डिजाइनरों ने भी, हाल के वर्षों में अपना कुछ सबसे महत्वपूर्ण कढ़ाई का काम भारत को ही दिया है। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, 2019 तक भारत का कढ़ाई निर्यात 230 मिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। इसी प्रकार, मुरादाबाद में भी शिल्पों की आधार सामग्री विदेशों से आती है।

शुरूआत में स्टैम्पिंग(Stamping), प्रेसिंग(Pressing) या कास्टिंग(Casting) जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग करके, कारखानों में धातु के बर्तनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। यहां स्टेनलेस स्टील या पीतल जैसे कच्चे धातुओं को एक समान प्लेट, कटोरे और ट्रे में आकार दिया जाता हैं। फिर, इन मशीन-निर्मित बर्तनों को काटा जाता है, चिकना किया जाता है, और उन्हें अधिक निखारने के लिए बुनियादी तौर पर परिष्कृत किया जाता है। फिर, इन अर्ध-तैयार उत्पादों को मुरादाबाद भेजा जाता है, जहां कुशल कारीगर उन्हें हाथ से पॉलिश करने, उत्कीर्णन और जड़ाई कार्य जैसी सजावटी तकनीकों के माध्यम से निखारते हैं। औद्योगिक दक्षता और पारंपरिक शिल्प कौशल का यह संयोजन, मानकीकृत वस्तुओं को सौंदर्य और सांस्कृतिक अपील के साथ विशिष्ट एवं उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदल देता है।

आज वैश्विक बाजारों में बढ़ती भारतीय भागीदारी को प्रोत्साहन देने हेतु, हमारी सरकार भी काम कर रही है। भारत के शीर्ष निर्यातक राज्यों में से एक के रूप में,  हमारा राज्य उत्तर प्रदेश एक उदाहरण बना है। उतर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला एक ऐसी ही सरकारी पहल है। इस मेले का उद्देश्य, खरीदारों को विभिन्न क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं का पता लगाने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करना है। यह हजारों प्रदर्शकों, वैश्विक खरीदारों, उद्योग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और व्यावसायिक पेशेवरों को एक साथ लाता है। अत्याधुनिक नवाचारों से लेकर पारंपरिक शिल्प कौशल तक, उभरते स्टार्टअप्स से लेकर स्थापित उद्यमों तक, यह व्यापार मेला असीमित अवसरों का प्रवेश द्वार है, जो उत्तर प्रदेश को वैश्विक व्यापार केंद्र बनने की ओर ले जा रहा है।

मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप, यह कार्यक्रम विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, हस्तशिल्प, कृषि और अन्य क्षेत्रों सहित विभिन्न उद्योगों में निवेश, व्यापार सहयोग और क्षेत्रीय प्रगति को बढ़ावा देता है।

नोएडा में आयोजित होने वाला यह व्यापार मेला, आमतौर पर कारीगरों और निर्माताओं के लिए अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक संरचित मंच बनाने हेतु सरकारी निकायों, निर्यात संवर्धन परिषदों और निजी कार्यक्रम आयोजकों के बीच सहयोग के माध्यम से आयोजित किया जाता है। इंडिया एक्सपो सेंटर और मार्ट जैसे बड़े स्थान, इन आयोजनों की मेजबानी करते हैं, जहां प्रदर्शक स्टॉल तथा डिजाइन डिस्प्ले के लिए पंजीकरण करते हैं, और देशज एवं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने अपने उत्पाद पेश करते हैं। मुरादाबाद से कई कारीगर, दृश्यता हासिल करने, थोक ऑर्डर सुरक्षित करने और व्यावसायिक संबंध बनाने के लिए इनमें भाग लेते हैं। इस प्रकार, ये मेले बाजार पहुंच और निर्यात वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

संदर्भ

1. https://tinyurl.com/3eu5vcf5 

2. https://tinyurl.com/y3d45zkw 

3. https://tinyurl.com/44fm8rdv 

4. https://tinyurl.com/27uptct5 

5. https://tinyurl.com/bdhevua 

6. https://tinyurl.com/2vvypwt8 

 

 

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