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रामपुर के जागरूक पाठकों के लिए इतिहास के पन्नों से एक ऐसी खोज की कहानी प्रस्तुत है जिसने आज के डिजिटल युग की नींव दशकों पहले ही रख दी थी। आज हम जिस इंटरनेट और कंप्यूटर पर पूरी तरह निर्भर हैं, उसकी कल्पना इन तकनीकों के आविष्कार से बहुत पहले ही कर ली गई थी। पहले माइक्रोचिप के बनने से पच्चीस साल पहले, पहले पर्सनल कंप्यूटर से चालीस साल पहले और पहले वेब ब्राउज़र के आने से पचास साल पहले ही एक व्यक्ति ने आज के इंटरनेट जैसी संरचना का खाका तैयार कर लिया था। यह कहानी एक ऐसे दूरदर्शी की है जिसने बिना कंप्यूटर और बिना किसी डिजिटल सर्वर के, महज़ कागज़ों और अनुक्रमणिका कार्डों के ज़रिए पूरी दुनिया के ज्ञान को एक सूत्र में पिरोने का महात्वाकांक्षी सपना देखा था।
पॉल ओटले कौन थे और उन्होंने दुनिया का ज्ञान एक जगह कैसे इकट्ठा करना चाहा?
पॉल ओटले एक बेल्जियन आदर्शवादी, अन्वेषक और सूचना वैज्ञानिक थे जिनका जन्म तेईस अगस्त अठारह सौ अड़सठ को हुआ था। उनका मुख्य लक्ष्य दुनिया भर की सूचनाओं को व्यवस्थित करना और हर महत्वपूर्ण प्रकाशित विचार को सूचीबद्ध करना था। अठारह सौ पचानवे में उन्होंने वकील और अंतर्राष्ट्रीयतावादी हेनरी ला फोंटेन के साथ मिलकर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बिब्लियोग्राफी की स्थापना की। इस संस्थान का उद्देश्य संपूर्ण मानव ज्ञान और दस्तावेज़ों पर एक व्यवस्थित नियंत्रण स्थापित करना था। ज्ञान को वर्गीकृत करने के लिए ओटले और ला फोंटेन ने उन्नीस सौ चार में 'यूनिवर्सल डेसिमल क्लासिफिकेशन' नामक एक क्रांतिकारी प्रणाली प्रकाशित की। इस प्रणाली में दुनिया भर के ज्ञान को नौ मुख्य श्रेणियों में बांटा गया था और इसके सत्तर हज़ार से अधिक विस्तृत उपखंड बनाए गए थे। ओटले का सपना केवल ज्ञान को व्यवस्थित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक ऐसा नया विश्व शहर बनाना चाहते थे जो दुनिया भर के देशों के बीच शांति और बौद्धिक विकास का केंद्र बन सके। उनकी इस महात्वाकांक्षी योजना का एक हिस्सा लीग ऑफ नेशंस के निर्माण से भी जुड़ा हुआ था।

सूचनाओं को एक जगह इकट्ठा करना ज्ञान और फ़ैसलों के लिए क्यों ज़रूरी है?
मानव इतिहास में जब से लेखन की शुरुआत हुई है, तभी से ज्ञान को व्यवस्थित करने की कोशिशें भी होती रही हैं। प्राचीन काल में इसका सबसे बड़ा उदाहरण मिस्र के अलेक्जेंड्रिया शहर का पुस्तकालय था जहाँ करीब सात लाख पेपिरस के स्क्रॉल रखे गए थे, जो आज के समय की एक लाख किताबों के बराबर माने जाते हैं। आज के समय में सूचनाओं का विस्फोट इतना भयानक हो चुका है कि केवल साल दो हज़ार ग्यारह में ही मानवता ने करीब दो ट्रिलियन गीगाबाइट का विशाल डेटा उत्पन्न किया था। यह अथाह डेटा हर दो साल में दोगुना हो रहा है। इस भारी और अव्यवस्थित डेटा के कारण आज के व्यवसायियों, लेखकों और शोधकर्ताओं को अपने काम की सही जानकारी निकालने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ओटले ने इस समस्या को बहुत पहले ही भांप लिया था। उनका मानना था कि किसी भी दस्तावेज़ या सूचना को अकेले नहीं समझा जा सकता, बल्कि उसका अर्थ अन्य दस्तावेज़ों के साथ उसके संबंधों से स्पष्ट होता है। उनका लक्ष्य ज्ञान को एक ऐसी सुगठित प्रणाली में पिरोना था जहाँ तथ्यों की पुष्टि की जा सके और भ्रामक जानकारियों के जाल से बचा जा सके।

ओटले ने ब्रुसेल्स में एक वैश्विक लाइब्रेरी की योजना कैसे बनाई और ज्ञान तक सार्वभौमिक पहुँच के लिए उनका नज़रिया क्या था?
उन्नीस सौ दस में ओटले और ला फोंटेन ने ज्ञान का एक विशाल केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा जिसे मुंडेनम नाम दिया गया। इस मुंडेनम को शुरुआत में बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स के पले डु सिनक्वांटेनेयर नामक सरकारी इमारत में रखा गया था। ओटले ने एक विशाल प्रणाली विकसित की जिसमें एक करोड़ पचास लाख से अधिक इंडेक्स कार्ड और दस्तावेज़ों का संग्रह शामिल था। ये इंडेक्स कार्ड अमेरिकी लाइब्रेरियन मेल्विल डेवी द्वारा मानकीकृत तीन गुणा पाँच इंच के आकार के थे। मुंडेनम में लोगों के लिए एक डाक सेवा भी शुरू की गई थी जहाँ लोग एक निश्चित शुल्क देकर अपने सवालों के जवाब मंगवा सकते थे। उन्नीस सौ बारह तक ओटले की टीम हर साल ऐसे पंद्रह सौ से अधिक सवालों के जवाब दे रही थी। इसके बाद उन्नीस सौ चौंतीस में ओटले ने 'इलेक्ट्रिक टेलीस्कोप' नामक नेटवर्क की कल्पना की। इस प्रणाली के तहत एक उपयोगकर्ता टेलीफोन के ज़रिए अपना सवाल भेज सकता था और उसका जवाब एक निजी स्क्रीन पर दिखाई देता था। उन्होंने कल्पना की थी कि लोग दूर बैठकर भी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे, जानकारी साझा कर सकेंगे और सामाजिक नेटवर्क बना सकेंगे।

इस महान परियोजना का पतन कैसे हुआ और द्वितीय विश्व युद्ध का मुंडेनम पर क्या असर पड़ा?
ओटले की यह महान परियोजना समय के साथ कई राजनीतिक और आर्थिक मुश्किलों में घिर गई। उन्नीस सौ चौबीस तक बेल्जियम सरकार का इस परियोजना से मोहभंग होने लगा था क्योंकि लीग ऑफ नेशंस ने अपना नया मुख्यालय ब्रुसेल्स की बजाय जिनेवा में बना लिया था। इसके कारण मुंडेनम को कई छोटी और अजीबोगरीब जगहों पर स्थानांतरित होना पड़ा, यहाँ तक कि एक समय इसे पार्किंग गैराज में भी रखा गया था। उन्नीस सौ उनतीस में वास्तुकार ली कोर्बुसीयर को जिनेवा में एक नया मुंडेनम डिज़ाइन करने का काम सौंपा गया, लेकिन यह परियोजना कभी ज़मीन पर नहीं उतर सकी। लगातार वित्तीय संकट के कारण उन्नीस सौ चौंतीस में ओटले को मुंडेनम के संचालन को बंद करना पड़ा। जब उन्नीस सौ चालीस में नाज़ी जर्मनी ने बेल्जियम पर कब्ज़ा किया, तो हालात और बदतर हो गए। नाज़ी सैनिकों ने मुंडेनम को महज़ कबाड़ का ढेर समझा और तिरेसठ टन से अधिक अनमोल दस्तावेज़ों को नष्ट कर दिया ताकि वहाँ थर्ड रीच की कला प्रदर्शनी लगाई जा सके। ओटले ने अमेरिकी राष्ट्रपति रूज़वेल्ट को टेलीग्राम भेजकर इस ज्ञान के खज़ाने को अमेरिका ले जाने की गुहार भी लगाई थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। ओटले का उन्नीस सौ चवालीस में निधन हो गया।

टिम बर्नर्स-ली ने वर्ल्ड वाइड वेब कैसे बनाया और वे ओटले के विचारों से कैसे जुड़े हैं?
आज हम जो वर्ल्ड वाइड वेब इस्तेमाल करते हैं, उसका आविष्कार टिम बर्नर्स-ली और उनके साथी रॉबर्ट कैलिआउ ने किया था। लेकिन ओटले के विचार इंटरनेट के इस आधुनिक स्वरूप से काफी पहले सामने आ चुके थे। ओटले ने वेब के जिस स्वरूप की कल्पना की थी, वह आज के इंटरनेट से थोड़ा अलग और ज़्यादा व्यवस्थित था। उन्होंने एक अत्यधिक नियंत्रित प्रणाली की परिकल्पना की थी जहाँ तथ्यों को विशेषज्ञों द्वारा वर्गीकृत किया जाता था। इसके विपरीत आज का इंटरनेट अनियंत्रित है जहाँ करोड़ों वेबसाइट्स और अरबों यूज़र्स का डेटा बिना किसी कठोर पदानुक्रम के मौजूद है। टिम बर्नर्स-ली ने साल दो हज़ार एक में 'सिमेंटिक वेब' का प्रस्ताव रखा था, जिसका उद्देश्य वेब पेजों में ऐसा डेटा जोड़ना था जिसे कंप्यूटर आसानी से पढ़ और समझ सकें। ओटले ने दशकों पहले ऐसे ही 'लिंक्स' की कल्पना की थी जो केवल दस्तावेज़ों को जोड़ते नहीं थे, बल्कि उनके बीच के गहरे अर्थ और वैचारिक संबंधों को भी स्पष्ट करते थे। आज ओटले का मुंडेनम मॉन्स शहर के एक संग्रहालय में तब्दील हो चुका है, जहाँ उनके पुराने इंडेक्स कार्ड आज भी लकड़ी की अलमारियों में सहेज कर रखे गए हैं जो हमें इस भूली-बिसरी विरासत की याद दिलाते हैं।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/273h8xlr
2. https://tinyurl.com/2aq8wlyh
3. https://tinyurl.com/ujsxbak
4. https://tinyurl.com/2aga2bq8
5. https://tinyurl.com/2y4l7qj5
6. https://tinyurl.com/2xrbncph
7. https://tinyurl.com/22lc9gad
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