जानें, विश्व शांति व प्रेम के प्रतीक के रूप में कैसे हुई रक्षाबंधन जैसे मित्रता दिवस की शुरुआत?

विचार II - दर्शन/गणित/चिकित्सा
28-08-2026 10:09 AM
जानें, विश्व शांति व प्रेम के प्रतीक के रूप में कैसे हुई रक्षाबंधन जैसे मित्रता दिवस की शुरुआत?

हर साल, लोग राखी और मित्रता दिवस (फ्रेंडशिप डे) को लेकर बहुत उत्साह और उमंग महसूस करते हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक भाई अपनी बहन की रक्षा करने का आजीवन वादा करता है। इसके विपरीत, दोस्त, कोई औपचारिक वादा तो नहीं करते हैं, लेकिन इसके लिए दोनों व्यक्तियों में एक गहरी और पक्की मानसिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। राखी हमारा पारंपरिक और सांस्कृतिक त्योहार है, जबकि मित्रता दिवस आधुनिक समय की देन है।

दुनिया भर में हर किसी द्वारा मित्रता के गुण की सराहना की जाती है। लोगों के बीच मित्रता के वैश्विक बंधन को प्रोत्साहित करने के लिए, विभिन्न देशों द्वारा अलग-अलग तारीखों पर मित्रता दिवस मनाया जाता है। भारत जैसे अधिकांश देशों ने इस अवसर के लिए संयुक्त राज्य द्वारा निर्धारित तारीख का अनुसरण किया है, जो हर साल अगस्त के पहले रविवार को आती है।

मित्रता दिवस का विचार सबसे पहले 1930 में ‘हॉलमार्क कार्ड्स’ (Hallmark Cards) के संस्थापक जॉयस हॉल (Joyce Hall) द्वारा दिया गया था। इससे पहले, ग्रीटिंग कार्ड, उपहार और अन्य वस्तुएँ भेजकर 2 अगस्त को मित्रता दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया था। इस विचार को 1920 के दशक के दौरान ‘ग्रीटिंग कार्ड नेशनल एसोसिएशन’ द्वारा अधिक बढ़ावा दिया गया था। लेकिन इसे बहुत सकारात्मक रूप से नहीं लिया गया, क्योंकि यह मित्रता दिवस के नाम पर व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देने वाला एक हथकंडा प्रतीत होता था।

इस दिशा में वास्तविक और आधिकारिक प्रयास तब स्पष्ट हुए, जब अमेरिकी कांग्रेस ने वर्ष 1935 में दोस्तों के सम्मान में एक दिन समर्पित करने का निर्णय लिया। हालांकि मित्रता दिवस मनाने का सटीक कारण स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है, लेकिन इसकी आवश्यकता प्रथम विश्व युद्ध के विनाशकारी प्रभावों के बाद महसूस की गई थी। इस अवसर को एक ऐसे माध्यम के रूप में सोचा गया था, जो वैश्विक मित्रता के मजबूत बंधनों के माध्यम से विभिन्न देशों के लोगों के बीच अविश्वास, घृणा और दुश्मनी की दीवारों को मिटा सके।

इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी कांग्रेस ने 1935 में एक औपचारिक उद्घोषणा के माध्यम से, अगस्त के पहले रविवार को मित्रता दिवस के रूप में चिह्नित किया, ताकि मित्रता के सम्मान के लिए एक विशेष अवकाश हो सके। बाद में, अन्य देश भी इस उत्सव में शामिल हो गए। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2011 में अपनाए गए प्रस्ताव के अनुसार ‘अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस’ 30 जुलाई को मनाने का निर्णय लिया गया था। यह तय किया गया था कि जाति, रंग, लिंग, धर्म, नस्ल और अन्य किसी भी भेदभाव की परवाह किए बिना विभिन्न देशों के लोगों के बीच मित्रता का एक मजबूत बंधन स्थापित किया जाए।

अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस 2011 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इस दूरदर्शी सोच के साथ घोषित किया गया था कि लोगों, देशों, संस्कृतियों और व्यक्तियों के बीच दोस्ती शांति के प्रयासों को प्रेरित कर सकती है और समुदायों के बीच एक मजबूत पुल का निर्माण कर सकती है। यह प्रस्ताव भावी नेताओं के रूप में युवाओं को उन सामुदायिक गतिविधियों में शामिल करने पर विशेष जोर देता है, जिनमें विभिन्न संस्कृतियाँ शामिल हों और जो अंतर्राष्ट्रीय समझ व विविधता के लिए सम्मान को बढ़ावा देती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस को चिह्नित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज समूहों को ऐसे कार्यक्रमों, गतिविधियों और पहलों को आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो सभ्यताओं के बीच संवाद, एकजुटता, आपसी समझ और सुलह को बढ़ावा देने की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों में योगदान करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस एक ऐसी पहल है, जो ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO)’ द्वारा शांति की संस्कृति को मूल्यों, दृष्टिकोणों और व्यवहारों के एक ऐसे समूह के रूप में परिभाषित करने वाले प्रस्ताव का अनुसरण करती है, जो हिंसा को पूरी तरह अस्वीकार करते हैं और समस्याओं को रोकने का प्रयास करते हैं। इसे बाद में 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था।

मित्रता दिवस पर हम कई लोगों के हाथों में ‘फ्रेंडशिप बैंड (Friendship Band)’ बंधा हुआ पाते हैं। ऐसे फ्रेंडशिप बैंड, हमारे दिलों में एक विशेष स्थान रखते हैं। ये बैंड, केवल धागे या धातु के टुकड़ों से कहीं अधिक बढ़कर हैं। वे हमारे दोस्तों के साथ साझा किए जाने वाले मजबूत और अटूट बंधनों का प्रतीक हैं।

जब हम अपनी कलाई पर एक फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं या इसे किसी दोस्त को भेंट करते हैं, तो हम जुड़ाव का एक सुंदर संकेत दे रहे होते हैं। इन बैंडों को पहनने और आदान-प्रदान करने का कार्य हमारे बीच के भावनात्मक संबंधों की एक दृश्य याद दिलाता है। यह इस बात को स्वीकार करने का भी एक तरीका है कि भले ही हम शारीरिक रूप से दूर हों, हमारे दिल हमेशा जुड़े हुए हैं।

इसके अलावा, समय के साथ, ये बैंड संजोए जाने वाली अमूल्य निशानियाँ बनते हैं। वे सिर्फ साधारण वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि साझा अनुभवों, हँसी-मजाक और समर्थन की अनगिनत यादें अपने साथ रखते हैं। यह हँसी, मुश्किल समय में सहारा देने के लिए कंधे और हमारे दोस्तों द्वारा प्रदान की जाने वाली संगति के प्रति कृतज्ञता दिखाने का भी एक तरीका है।

दरअसल, फ्रेंडशिप बैंड अक्सर विभिन्न प्रकार के आकर्षक रंगों में आते हैं, और प्रत्येक रंग का अपना एक विशेष महत्व होता है। उदाहरण के लिए, लाल रंग प्रेम और जोश का प्रतीक हो सकता है, जबकि पीला रंग खुशी और सकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है। अपने मित्र के व्यक्तित्व से मेल खाने वाले रंग को चुनना, इस हाव-भाव में एक व्यक्तिगत स्पर्श जोड़ता है। इसी तरह, खुद अपने हाथों से बनाए गए बैंड का अक्सर एक गहरा और अनूठा अर्थ होता है, क्योंकि वे उन्हें बनाने में लगाए गए प्रयास, समय और भावनाओं को अपने साथ समेटे होते हैं।

जब कोई व्यक्ति अपनी किशोरावस्था में कदम रखता है, तो वह अक्सर ही अपना अधिकांश समय, भाई-बहनों के साथ बिताने के बजाय अपने दोस्तों के साथ बिताना पसंद करता है। लेकिन यह भी एक सत्य है कि इस गतिशील और बदलती दुनिया में, कई बार हमारे सबसे अच्छे दोस्तों की जगह दूसरे लोग ले लेते हैं। इसके बावजूद, दोस्त हमारे सबसे बड़े विश्वासपात्र होते हैं, जिन पर हम भरोसा कर सकते हैं और अपने सबसे गहरे रहस्य साझा कर सकते हैं। कभी-कभी, हम उनसे वे बातें भी साझा करते हैं, जिन्हें हम अपने सगे भाई-बहनों के साथ साझा करने से हिचकिचाते हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर कई बार दोस्तों से तुरंत मदद मिलना कठिन हो सकता है, जबकि भाई-बहन हर परिस्थिति में सबसे अधिक भरोसेमंद साबित होते हैं।

संक्षेप में कहा जाए तो, फ्रेंडशिप डे और रक्षाबंधन दोनों का अपना-अपना अनूठा और विशिष्ट महत्व है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में दोनों ही मूल्यवान हैं। जहाँ एक ओर दोस्त जीवन रूपी बगीचे में खिले हुए सुंदर फूलों की तरह हैं, वहीं दूसरी ओर भाई-बहन उसी बगीचे के सच्चे संरक्षक होते हैं। दोस्त वे लोग होते हैं, जिनसे हमारा कोई खून का रिश्ता नहीं होता है, फिर भी वे हमारी असीम परवाह करते हैं। दूसरी ओर, भाई-बहनों के बीच का पवित्र बंधन जीवनभर हमारे साथ रहता है। हमें इन दोनों ही विशेष दिवसों को पूरे जोश और उल्लास के साथ मनाना चाहिए, क्योंकि किसी भी मनुष्य के जीवन में इन दोनों का ही अत्यधिक और अतुलनीय महत्व है।

 

संदर्भ

1. https://tinyurl.com/3p4zpdyc 

2. https://tinyurl.com/bdef5624 

3. https://tinyurl.com/49eje4v6 

4. https://tinyurl.com/hw3bukxj 

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