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उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर रामपुर अपने प्रसिद्ध रामपुरी चाकू और मीठे ज़ायकों के लिए तो जाना ही जाता है, लेकिन इसका राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास इससे कहीं अधिक गहरा और दिलचस्प है। मध्यकाल में कभी दिल्ली क्षेत्र का हिस्सा रहा रामपुर, 18वीं शताब्दी में उत्तर भारत की एक प्रमुख शक्ति बन कर उभरा। यह शहर केवल नवाबों का शहर नहीं है, बल्कि यह उन अफ़ग़ान रोहिल्ला योद्धाओं की भी कहानी है जिन्होंने अपनी तलवारों और कूटनीति से इतिहास में एक अलग मुकाम बनाया और अंततः 1949 में स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में खुद को समाहित कर लिया।
रोहिल्ला कौन थे और रामपुर रियासत की स्थापना कैसे हुई?
रोहिल्ला मुख्य रूप से अफ़ग़ान पठान (Afghan Pashtuns) थे, जो 16वीं और 18वीं शताब्दी के बीच हिंदू कुश, खैबर और काबुल जैसे पहाड़ी इलाकों से भारत आए थे। 'रोह' का अर्थ होता है पहाड़, इसलिए इन्हें 'पहाड़ों के लोग' या रोहिल्ला कहा गया। वे भारत में मुख्य रूप से सैनिकों और घुड़सवारों के रूप में आए थे, लेकिन मुगल साम्राज्य के पतन के दौरान उन्होंने अपनी सैन्य शक्ति के बल पर बरेली, मुरादाबाद और बदायूं जैसे क्षेत्रों में अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिया, जिसे 'रोहिलखंड' कहा गया। अली मुहम्मद खान को रोहिलखंड का असली वास्तुकार माना जाता है, जिन्होंने बिखरे हुए अफ़ग़ान कबीलों को एकजुट किया।

लेकिन रोहिल्लाओं का यह स्वतंत्र शासन लंबे समय तक नहीं चल सका। 1774 में 'प्रथम रोहिल्ला युद्ध' (First Rohilla War) हुआ। यह युद्ध तब शुरू हुआ जब रोहिल्लाओं ने मराठों के खिलाफ सैन्य सहायता के बदले अवध के नवाब को चुकाए जाने वाले कर्ज से इनकार कर दिया। वारेन हेस्टिंग्स (Warren Hastings) द्वारा भेजी गई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) की सेना की मदद से अवध के नवाब ने रोहिल्लाओं को हरा दिया और उन्हें उनकी राजधानी बरेली से खदेड़ दिया। इस युद्ध में महान रोहिल्ला नेता हाफिज रहमत खान मारे गए।
इसी हार के बाद, 7 अक्टूबर 1774 को ब्रिटिश कमांडर कर्नल चैंपियन (Commander Colonel Champion) की मौजूदगी में एक समझौते के तहत नवाब फैजुल्लाह खान ने रामपुर रियासत की स्थापना की। इसके बाद से रामपुर ब्रिटिश संरक्षण के तहत एक रियासत बन गया।
रामपुर शहर का विकास और नवाबों का शासन कैसा रहा?
नवाब फैजुल्लाह खान ने 1775 में रामपुर में एक नए किले की नींव रखी और इस तरह वर्तमान रामपुर शहर की स्थापना हुई। शुरुआत में इसे कठेर (Kather) नामक चार गांवों के समूह पर बसाया गया था। नवाब इसका नाम 'फैज़ाबाद' रखना चाहते थे, लेकिन इस नाम के अन्य शहर पहले से मौजूद थे, इसलिए इसका नाम मुस्तफाबाद उर्फ रामपुर रखा गया।
नवाब फैजुल्लाह खान ने 20 वर्षों तक शासन किया। वे एक महान विद्वान थे और उन्होंने अरबी, फारसी, तुर्की और उर्दू पांडुलिपियों का एक विशाल संग्रह शुरू किया, जो आज विश्व प्रसिद्ध 'रामपुर रज़ा लाइब्रेरी' (Rampur Raza Library) का मुख्य हिस्सा है। उनके बाद नवाब मुहम्मद सईद खान, यूसुफ अली खान, और कलब अली खान जैसे शासकों ने रामपुर को शिक्षा, न्याय और वास्तुकला का एक प्रमुख केंद्र बनाया। 1865 में नवाब बने कलब अली खान (Kalb Ali Khan) ने ही रामपुर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद का निर्माण कराया था।

1889 में नवाब बने हामिद अली खान (Hamid Ali Khan) ने 1905 में किले के भीतर एक शानदार 'दरबार हॉल' बनवाया, जहां आज रज़ा लाइब्रेरी की अनमोल पांडुलिपियां रखी हुई हैं। इन नवाबों ने संगीत को भी खूब बढ़ावा दिया। उस्ताद इनायत हुसैन खान जैसे दिग्गजों ने यहीं से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के 'रामपुर-सहसवान घराने' (Rampur-Sahaswan Gharana) की नींव रखी।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रामपुर की भूमिका क्या थी?
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान रामपुर के नवाबों की राजनीतिक स्थिति बहुत जटिल थी। चूंकि रामपुर रियासत ब्रिटिश संरक्षण के तहत चल रही थी, इसलिए नवाबों ने 1857 के विद्रोह में ब्रिटिश सरकार का साथ दिया था। इस वफादारी के कारण अंग्रेजों ने उन्हें उत्तर भारत में अपने राजनीतिक और सांस्कृतिक मामलों को जारी रखने की छूट दी। हालांकि, इसी दौरान नवाबों ने मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र के दरबार से विस्थापित हुए कई महान साहित्यकारों और शायरों को रामपुर में पनाह भी दी, जिससे रामपुर उर्दू अदब का एक बड़ा केंद्र बन गया।
ब्रिटिश शासन का अंत और रामपुर का भारत में विलय कैसे हुआ?
1930 में रज़ा अली खान (Raza Ali Khan) रामपुर के अंतिम शासक नवाब बने। वे एक प्रगतिशील शासक थे जिन्होंने हिंदुओं के समावेश में विश्वास किया और लेफ्टिनेंट कर्नल होरीलाल वर्मा को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
अगस्त 1947 में जब भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आज़ादी मिली, तब रामपुर सहित देश की 500 से अधिक रियासतों के सामने एक बड़ा सवाल था—स्वतंत्र भारत में शामिल होना या अलग रहना। तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की कूटनीति और भारत के एकीकरण की प्रक्रिया के तहत, रामपुर रियासत ने स्वतंत्र भारत में विलय का फैसला किया।
1 जुलाई 1949 को रामपुर रियासत आधिकारिक तौर पर भारत गणराज्य (Republic of India) में विलीन हो गई और बाद में इसे उत्तर प्रदेश (पहले संयुक्त प्रांत) के एक ज़िले के रूप में मान्यता मिली। आज रामपुर के किले के द्वार और नवाबों के महल भले ही जर्जर हो रहे हों, लेकिन इस शहर की रज़ा लाइब्रेरी, इसका संगीत और इसकी मिली-जुली अफ़ग़ान-भारतीय संस्कृति आज भी दुनिया भर के विद्वानों और पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है। रामपुर की यह कहानी एक कबीले के संघर्ष, कूटनीति और अंततः एक मजबूत लोकतंत्र के प्रति समर्पण की अद्भुत मिसाल है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/24mfvl4a
2. https://tinyurl.com/2a689cyt
3. https://tinyurl.com/25dg69bf
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