भाषा किसी भी राष्ट्र की अस्मिता, संस्कृति और उसके नागरिकों के पारस्परिक संबंधों की संवाहिका होती है। भारतीय उपमहाद्वीप में सदियों से संवाद और चेतना के केंद्र में रही हिंदी आज न केवल देश के 1.3 अरब से अधिक लोगों के बीच संपर्क की प्रमुख भाषा है, बल्कि यह सात समंदर पार भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है। इंडो-आर्यन भाषा परिवार की सदस्य और देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी का इतिहास अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण रहा है। 10वीं शताब्दी की आरंभिक बोलियों से लेकर 21वीं सदी के डिजिटल (digital) युग तक, हिंदी ने अपनी अद्भुत ग्रहणशीलता (assimilation power) के बल पर क्षेत्रीय सीमाओं को लाँघकर वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा का दर्जा प्राप्त किया है।
10वीं शताब्दी से लेकर स्वतंत्रता के बाद तक कैसे विकसित हुई हिंदी भाषा?
हिंदी भाषा के ऐतिहासिक विकास को मुख्य रूप से तीन कालखंडों में विभाजित किया जाता है। पहला पूर्व-आधुनिक काल (10वीं से 18वीं शताब्दी) माना जाता है। इस दौर में हिंदी मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत में बोली जाती थी, जिस पर संस्कृत और स्थानीय बोलियों का गहरा प्रभाव था। हिंदी के प्राचीनतम ज्ञात प्रमाण दिल्ली और उसके निकटवर्ती क्षेत्रों में बोली जाने वाली खड़ी बोली में मिलते हैं, जो आधुनिक मानक हिंदी का मूल आधार बनी। 11वीं शताब्दी में धार्मिक स्वरूप के जो प्राचीन ग्रंथ मिलते हैं, उन्हें 'पुरानी हिंदी' या 'हिंदवी' के नाम से जाना गया।
दूसरा आधुनिक काल (19वीं से 20वीं शताब्दी के मध्य तक) औपनिवेशिक काल के प्रभाव में विकसित हुआ। इस दौरान अंग्रेज़ों के शासनकाल में हिंदी का मानकीकरण हुआ और साक्षरता बढ़ाने के उद्देश्य से देवनागरी लिपि के स्वरूप को सुव्यवस्थित किया गया। तीसरा कालखंड 1947 में स्वतंत्रता के बाद का है, जब हिंदी को स्वतंत्र भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया।
साहित्यिक दृष्टि से हिंदी का भंडार अत्यंत वैभवशाली रहा है। 15वीं शताब्दी के रहस्यवादी कवि कबीर की साखियों से लेकर भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त मीराबाई की भक्ति रचनाओं तक, इस भाषा ने जन-जन को आध्यात्मिक प्रेरणा दी। आधुनिक काल में हरिवंश राय बच्चन, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा जैसे मूर्धन्य रचनाकारों ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई। इसके अलावा, ब्रजभाषा, भोजपुरी और अवधी जैसी समृद्ध बोलियों ने इसके शब्दकोश को विस्तार दिया। हिंदी ने फ़ारसी के 'शराब', 'दरबार' और 'मज़ार' जैसे शब्दों को अपनाया, तो अरबी के 'नमाज़', 'कुरान' व 'मौलवी' तथा आधुनिक युग में अंग्रेज़ी के कंप्यूटर (computer), मोबाइल और ईमेल जैसे शब्दों को भी सहजता से आत्मसात कर लिया।
क्या संविधान में हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया है या यह केवल राजभाषा है?
प्रायः जनसामान्य में यह धारणा देखने को मिलती है कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है, किंतु वैधानिक दृष्टि से यह तथ्य सही नहीं है। भारतीय संविधान के तहत किसी भी एक भाषा को 'राष्ट्रभाषा' (National Language) का दर्जा प्रदान नहीं किया गया है।

संविधान के भाग 17 के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की आधिकारिक भाषा के संबंध में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। अनुच्छेद 343 के अनुसार, देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी भारतीय संघ की 'राजभाषा' (Official Language) है, जिसका उपयोग केंद्र सरकार के प्रशासनिक कार्यों में किया जाता है। इसके साथ ही, अहिंदी भाषी राज्यों से संवाद और प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए अंग्रेज़ी को सह-राजभाषा का दर्जा दिया गया है।
भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को संरक्षित रखने के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है। वर्ष 1950 में जब संविधान लागू हुआ था, तब मूल रूप से इसमें केवल 14 भाषाएँ शामिल थीं। इसके बाद समय-समय पर संवैधानिक संशोधन किए गए:
यह संवैधानिक व्यवस्था स्पष्ट करती है कि सभी अनुसूचित भाषाएँ देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं, जबकि हिंदी और अंग्रेज़ी प्रशासनिक संवाद के साधन हैं।
1971 से 2011 तक की जनगणना के आंकड़े हिंदी के विस्तार के बारे में क्या बताते हैं?
जनगणना के ऐतिहासिक आंकड़े यह सिद्ध करते हैं कि स्वतंत्र भारत में हिंदी बोलने वालों की संख्या और प्रतिशत में निरंतर वृद्धि हुई है। शोध पत्र में संकलित भारतीय जनगणना के आंकड़ों के अनुसार:
राज्यों के आधार पर देखा जाए तो देश के कुल हिंदी भाषियों में उत्तर प्रदेश का योगदान सर्वाधिक 35.58 प्रतिशत है। इसके बाद बिहार (15.27 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (12.17 प्रतिशत), राजस्थान (11.60 प्रतिशत), हरियाणा (4.22 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (4.04 प्रतिशत), झारखंड (3.87 प्रतिशत), महाराष्ट्र (2.74 प्रतिशत), दिल्ली (2.70 प्रतिशत) और उत्तराखंड (1.70 प्रतिशत) का स्थान आता है। वर्ष 1997 के एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, देश के 66 प्रतिशत नागरिक हिंदी समझ और बोल सकते हैं, जबकि 77 प्रतिशत लोगों का मानना है कि हिंदी समूचे देश में सबसे अधिक प्रयुक्त होने वाली संपर्क भाषा है।
भारत के बाहर किन आठ प्रमुख देशों में सबसे ज्यादा बोली जाती है हिंदी?
हिंदी की लोकप्रियता केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। विश्व में 42.5 करोड़ से अधिक लोग हिंदी को अपनी पहली भाषा के रूप में और लगभग 12 करोड़ लोग इसे दूसरी भाषा के रूप में बोलते हैं। भारत के अतिरिक्त आठ ऐसे प्रमुख देश हैं, जहाँ हिंदी व्यापक रूप से बोली जाती है:
नेपाल (Nepal): भारत के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी हिंदी भाषी आबादी नेपाल में रहती है। यहाँ लगभग 80 लाख लोग हिंदी बोलते हैं। वर्ष 2016 में नेपाल की संसद में हिंदी को आधिकारिक दर्जा देने पर विचार किया गया था, क्योंकि वहाँ की लगभग 80 प्रतिशत आबादी हिंदी समझने अथवा बोलने में सक्षम है।
संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America): अमेरिका में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी हिंदी भाषी आबादी (लगभग 6.49 लाख) निवास करती है। यह अमेरिका में बोली जाने वाली 11वीं सबसे बड़ी विदेशी भाषा है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि अमेरिका में चिकित्सकों के बीच अंग्रेज़ी और स्पैनिश के बाद हिंदी तीसरी सबसे लोकप्रिय भाषा बन चुकी है।
मॉरीशस (Mauritius): मॉरीशस में लगभग 4.5 लाख लोग हिंदी बोलते हैं। भारतीय मूल के लोगों की बहुलता के कारण यहाँ हिंदी का गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव है।
फ़िजी (Fiji): फ़िजी में लगभग 3.8 लाख लोग फ़िजी हिंदी बोलते हैं, जिसका आरंभ औपनिवेशिक काल में गिरमिटिया श्रमिकों के आगमन के साथ हुआ था।
दक्षिण अफ़्रीका (South Africa): 19वीं शताब्दी से बसे भारतीय समुदाय के कारण यहाँ लगभग 2.5 लाख लोग हिंदी बोलते हैं।
सूरीनाम (Suriname): डच उपनिवेश काल में 1873 से बसे भारतीय प्रवासियों के कारण यहाँ लगभग 1.5 लाख लोग 'सरनामी हिंदी' बोलते हैं।
युगांडा (Uganda): पूर्वी अफ़्रीका के इस देश में पीढ़ियों से बसे भारतीय मूल के लगभग 1 लाख लोग अपने घरों और सामाजिक कार्यक्रमों में हिंदी बोलते हैं।
यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom): ब्रिटेन के प्रवासी भारतीय समुदाय में लगभग 45,800 लोग दैनिक जीवन में हिंदी का प्रयोग करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक कूटनीति के मंच पर हिंदी ने कैसे बनाई अपनी विशिष्ट पहचान?
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हिंदी को प्रतिष्ठा दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। वर्ष 1977 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहली बार हिंदी में भाषण देकर इतिहास रचा था। इसके बाद, सितंबर 2014 में 69वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा और सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी में अपना संबोधन प्रस्तुत किया, जिससे विश्व मंच पर भाषा का गौरव बढ़ा।
वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार और शोध के लिए वर्ष 1997 में महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई, जिसका एक प्रमुख लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दिलाने का प्रयास करना भी है। वर्तमान में विश्व के 180 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी के अध्यापन की व्यवस्था है, जिनमें से 100 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान अकेले अमेरिका में स्थित हैं।
डिजिटल युग और कंप्यूटर तकनीक ने हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने में क्या भूमिका निभाई है?
सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार ने हिंदी को एक नई शक्ति प्रदान की है। 20 जून 2005 को सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत संस्था सी-डैक (C-DAC) ने हिंदी का निःशुल्क सॉफ्टवेयर (software) जारी किया। इस पैकेज में ओपनऑफिस (OpenOffice) के लिए 525 हिंदी फॉन्ट, वेब ब्राउज़र, ईमेल, ओसीआर (OCR), हिंदी-अंग्रेज़ी शब्दकोश, टाइपिंग ट्यूटर और 'लेखवानी' जैसी ऑडियो टाइपिंग प्रणाली उपलब्ध कराई गई। माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) कंपनी ने भी हिंदी में एमएस ऑफिस जारी किया, और कंपनी के प्रवर्तक बिल गेट्स (Bill Gates) ने कंप्यूटर के लिए हिंदी की उपयुक्तता को स्वीकार किया।

यूनिकोड (Unicode) प्रणाली के आगमन से इंटरनेट पर हिंदी क्रांति आ गई। आज इंटरनेट पर 15 से अधिक हिंदी सर्च इंजन कार्यरत हैं। भारत सरकार के राजभाषा विभाग ने 'लीला' (LILA - Learning Indian Language through Artificial Intelligence) नामक पैकेज विकसित किया है, जिसके माध्यम से देश की 14 प्रमुख भाषाओं (असमिया, बोडो, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु) की सहायता से कोई भी व्यक्ति सरलता से हिंदी सीख सकता है।
ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (ओसीआर) तकनीक की सहायता से प्राचीन संस्कृत और पुरानी देवनागरी पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। गूगल इनपुट टूल्स, यूनिनागरी, कृतिदेव-टू-यूनिकोड कन्वर्टर जैसे साधनों ने लेखन को सुगम बना दिया है। यही कारण है कि आज हॉलीवुड में 'अवतार' (Avatar) जैसे शीर्षक से फ़िल्में बनती हैं और वैश्विक कंपनियाँ अपने उत्पादों के दिशा-निर्देशों में हिंदी को अनिवार्य स्थान दे रही हैं। यह तकनीकी सामर्थ्य यह सिद्ध करता है कि हिंदी आने वाले समय में विश्व भाषा बनने की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/28sjtos4
2. https://tinyurl.com/26sjmzht
3. https://tinyurl.com/24wshyn2
4. https://tinyurl.com/28oas2cn
A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.
B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.
D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.
E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.