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हमारे रामपुर जैसे समुद्र से दूर स्थित जिलों में आने वाली भीषण लू (गर्म हवा), तीव्र सौर विकिरण के क्षेत्रीय वायुमंडलीय स्थितियों के साथ प्रभाव का परिणाम है। हालांकि सूर्य से पृथ्वी की औसत निकटता अपेक्षाकृत स्थिर रहती है, लेकिन स्थानीय भू-तापन इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि सीधी सौर किरणें वायुमंडल से कैसे गुजरती हैं। जब सीधी धूप सूखी मिट्टी पर पड़ती है, तो ऊष्मीय विकिरण सतह के पास फंस जाते हैं, जिससे जमीन का तापमान काफी बढ़ जाता है।
सौर ऊर्जा अवशोषण, विकिरण ताप स्थानांतरण (Radiation heat transfer) की वह प्रक्रिया है, जहाँ कोई सतह गिरने वाली सूरज की रोशनी को दूर परावर्तित करने के बजाय, उसे अवशोषित कर लेती है। यह अवशोषित विकिरण, ऊष्मीय ऊर्जा बन जाता है, जिससे सतह का तापमान बढ़ सकता है और फिर चालन (conduction), संवहन (convection), और पुन:विकिरण (re-radiation) हानियों को बढ़ावा मिल सकता है।
यदि विकिरण किसी सतह पर पड़ता है, तो उसका कुछ हिस्सा परावर्तित हो जाता है, कुछ हिस्सा उससे गुजर सकता है, और बाकी हिस्सा अवशोषित हो जाता है। सूरज की ओर अधिक सीधे भाग वाली सतह को उससे दूर झुकी हुई सतह की तुलना में अधिक प्रभावी ऊर्जा प्राप्त होती है, भले ही दोनों की सामग्री एक ही हो। एक बार ऊर्जा अवशोषित हो जाने के बाद, सतह गर्म हो जाती है और फिर ऊष्मीय विकिरण उत्सर्जित करती है। इसके अलावा, यदि कोई सतह अन्य सतहों से घिरी हुई है, तो उसे प्राप्त होने वाला कुछ विकिरण ज्यामिति के आधार पर अवरुद्ध, पुनर्निर्देशित या विनिमय किया जा सकता है। साथ ही, गहरे रंगों वाली सतहें अधिक विकिरण अवशोषित करती हैं और फीके रंगों वाली सतहें कम अवशोषण करती हैं।
एक हीट डोम (Heat dome) अर्थात गर्मी का कवच जैसा क्षेत्र, तब विकसित होता है, जब उच्च दबाव का एक व्यापक क्षेत्र किसी अन्य क्षेत्र पर स्थापित हो जाता है और लंबी अवधि तक वहीं रहता है। उच्च दबाव के तहत, हवा वायुमंडल से नीचे रहती है। जैसे-जैसे यह नीचे आती है, यह संपीड़ित (Compressed) होती है और गर्म होती है। साथ ही, बादलों का निर्माण रुक जाता है, जिससे तेज धूप जमीन तक पहुँच पाती है। यह पैटर्न जितनी देर तक बना रहता है, ऊष्मा का प्रभाव उतना ही अधिक होता है। साफ आसमान, दिन के समय तापमान के बढ़ने को प्रेरित करता है, जबकि मिट्टी धीरे-धीरे सूख जाती है। जैसे-जैसे ज़मीन की नमी कम होती है, वाष्पीकरण के लिए कम सौर ऊर्जा का उपयोग होता है। इससे अधिक ऊर्जा ज़मीन की सतह तथा इसके ऊपर की हवा को सीधे तौर पर गर्म करने के लिए उपलब्ध हो जाती है।

बाद में, सूखी ज़मीन अतिरिक्त वार्मिंग को बढ़ावा देती है, जो बदले में अधिक सूखे को प्रोत्साहित करती है। चूंकि गर्म हवा, ठंडी हवा की तुलना में वायुमंडल की गहरी परत में आती है, इसलिए परिणामी पैटर्न हीट डोम हो सकता है, जिसका हटना मुश्किल हो जाता है। जब ये पैटर्न होते हैं, तो वे गर्म जलवायु और अक्सर सूखी ज़मीन में योगदान देते हैं। इस प्रकार बढ़ी गर्मी में, सामान्य गर्मी की तुलना में अधिक तीव्र होने की क्षमता है। दूसरे शब्दों में, भले ही मौसम के पैटर्न स्वयं काफी नहीं बदलें हो, लेकिन उनके प्रभाव तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं। साथ ही, स्थानीय इलाके और शहरी घनत्व इस बात को संशोधित करते हैं कि विकिरणीय सौर ऊर्जा कैसे संग्रहीत होती है।
कई शहर, आज शहरी ताप द्वीप (Urban Heat Island) प्रभाव का अनुभव कर रहे हैं। यह शहरों में, मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ती अत्यधिक गर्मी से संबंधित अवधारणा है। जैसे-जैसे प्राकृतिक और कृषि भूमि कंक्रीट, इमारतों, और सड़कों जैसी पक्की संरचनाओं में बदलती है, स्थानीय तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। इससे शहरी ताप द्वीप प्रभाव बनता है। कंक्रीट और डामर जैसी सामग्री दिन के समय गर्मी को अवशोषित कर लेती है और रात में इसे उत्सर्जित करती है। इससे स्थानीय सूक्ष्म जलवायु (Microclimates) प्रभावित होती है। इस कारण, शहरी क्षेत्रों में भूमि उपयोग, उसकी संरचना और स्थानीय तापीय गतिकी (Localized thermal dynamics) के बीच मौजूद संबंधों का विश्लेषण करना जरूरी है।
पेड़ों, पार्कों और वनस्पतियों की कमी के कारण वाष्पोत्सर्जन की प्राकृतिक शीतलन प्रक्रिया रुक जाती है। इससे शहरी इलाकों में गर्मी का असर और अधिक तीव्र हो जाता है। स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली यह अतिरिक्त गर्मी और बिगड़ी हुई तापीय गतिकी मिलकर, क्षेत्रीय स्तर पर लू के प्रभाव को ज्यादा खतरनाक व गंभीर बना देती हैं। इस कारण, क्षेत्रीय स्तर पर गर्मी के प्रकोप को कम करने के लिए शहरी नियोजन में हरे भरे स्थान और प्राकृतिक वनस्पतियों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/3ft4cx46
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