जानिए, भारत में उत्पन्न हुए कबड्डी खेल को ग्रामीण खेल से वैश्विक पहचान कैसे मिली?

गतिशीलता और व्यायाम/जिम
16-06-2026 09:21 AM
जानिए, भारत में उत्पन्न हुए कबड्डी खेल को ग्रामीण खेल से वैश्विक पहचान कैसे मिली?

शाहजहांपुर, चलिए आज कबड्डी के इतिहास को समझते हैं, और देखते हैं कि, यह एक प्राचीन भारतीय खेल के रूप में कैसे उत्पन्न हुआ। फिर हम यह पता लगाएंगे कि, कबड्डी को एक ग्रामीण खेल से वैश्विक पहचान कैसे मिली? आगे, हम कबड्डी के नियम और खेल पर नजर डालेंगे। फिर हम अंतरराष्ट्रीय कबड्डी में भारत के प्रभुत्व की जांच करेंगे। अंत में, हम देखेंगे कि, स्थानीय प्रतियोगिता और प्रशिक्षण के माध्यम से, हमारे राज्य उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इस खेल को कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है।

कबड्डी की शुरुआत, दरअसल इसके दर्ज इतिहास से पहले की है, जब शुरुआती मानवों को सुरक्षा के लिए एक दूसरे के सहयोग की आवश्यकता थी। यह अवधारणा 4,000 वर्ष से अधिक पुराने खेल कबड्डी में विकसित हुई, जिसे दुनिया की सबसे पुरानी एथलेटिक गतिविधियों में से एक के रूप में जाना जाता है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड दुर्लभ होने के बावजूद भी, कबड्डी खेल का विकास स्पष्ट है, जो एक साधारण खोज से एक रणनीतिक प्रयास में परिवर्तन को चिह्नित करता है।

किंवदंती है कि, कबड्डी की शुरुआत बच्चों के किसी का पीछा करने और उसे हाथ लगाने के मधुर व्यवहार से हुई। एक प्रचलित धारणा, इस खेल का उगम दक्षिण भारत में तमिलनाडु के अयार आदिवासी लोगों से बताती है। कबड्डी खेल, दक्षिण एशिया के इतिहास और संस्कृति के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। इस खेल की जड़ें मुल्लाई नामक स्थान से है, और यह जल्लीकट्टू खेल के समान है। प्राचीन काल में सदुगुडु नाम से जाना जाने वाला एक खेल, कबड्डी से मिलता जुलता था।

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भारत ने इस खेल को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1920 के दशक में संगठित कबड्डी प्रतियोगिताओं का उदय हुआ, जिसकी परिणति 1938 में भारतीय ओलंपिक खेलों में कबड्डी को शामिल करने के रूप में हुई। 1950 में अखिल भारतीय कबड्डी महासंघ की स्थापना ने, इस खेल को औपचारिक रूप दिया। इस प्रकार, कबड्डी गांव के मनोरंजन से, एक वैध अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बदल गई।

1990 तक, कबड्डी को एशियाई खेलों में शामिल किया गया, जो इसकी बढ़ती वैश्विक अपील का संकेत था। बीसवीं सदी में कबड्डी की लोकप्रियता भारत की सीमाओं से परे बढ़ गई, और 1972 में बांग्लादेश ने भी इसे अपने राष्ट्रीय खेल के रूप में मान्यता दी।

कबड्डी की वैश्विक पहुंच का विस्तार आज भी जारी है। इस खेल को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खेल समारोहों में प्रदर्शित किया गया है, और ‘कबड्डी विश्व कप’ एक महत्वपूर्ण आयोजन बन गया है। हालांकि, ओलंपिक खेलों में कबड्डी को शामिल करने के प्रयास चल रहे हैं। कबड्डी की वैश्विक मान्यता ने न केवल इसकी लोकप्रियता को बढ़ाया है, बल्कि खिलाड़ियों के लिए नए अवसर भी खोले हैं।

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दरअसल, कबड्डी के नियमों के अनुसार, एक मैच की शुरुआत एक संघ द्वारा दूसरे संघ के मैदान में रेड (Raid) डालने से होती है। रेड डालने वाला खिलाड़ी - रेडर, कबड्डी शब्द का उच्चारण करते हुए, दूसरे संघ के मैदान में प्रवेश करता है। रेडर का उद्देश्य, जितना संभव हो उतने विपक्षी खिलाड़ियों, अर्थात एंटी (Anti) या डिफेंडर (Defender) को टैग करना या छूना होता है। इस दौरान, एक सांस के साथ ही उसे अपनी स्थिति जारी रखते हुए, मध्य रेखा को पार करके अपने मैदान में लौटना होता है।

इस बीच, एंटी या डिफेंडर, रेडर से निपटकर या उसे कोर्ट से बाहर धकेलकर, उसे अपने मैदान हिस्से में लौटने से रोकने की कोशिश करते हैं। संघ बारी-बारी से एक-दूसरे पर रेड डालते हैं, और समय समाप्त होने पर अधिक अंक प्राप्त करने वाला संघ मैच जीत जाता है। 2014 में ‘प्रो कबड्डी’ के आगमन के बाद, खेल को अधिक आकर्षक बनाने के लिए इसके नियमों में कुछ बदलाव किए गए। उदाहरण के लिए, प्रो कबड्डी में प्रत्येक रेड पर 30 सेकंड की समय सीमा होती है। लगातार तीन खाली रेड के परिणामस्वरूप, रेडर आउट हो जाता है, और विपक्षी संघ एक अंक अर्जित करता है।

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हमारे लिए गर्व की बात है कि, 1972 में स्थापित, ‘एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया (Amateur Kabaddi Federation of India)’ द्वारा शासित, भारतीय पुरुष कबड्डी संघ, इतिहास में सबसे सफल राष्ट्रीय कबड्डी संघ है। इसने एशियाई खेलों के नौ संस्करणों में से आठ संस्करणों में स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। भारत ने 2004, 2007 और 2016 में तीनों कबड्डी विश्व कप भी जीते हैं। भारत का यह प्रभुत्व, इस खेल की गहरी सांस्कृतिक जड़ों, कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से संरचित कोचिंग और 2014 के बाद से प्रो कबड्डी लीग द्वारा समर्थित प्रतिभाओं पर बना है। राकेश कुमार, अनुप कुमार और अजय ठाकुर जैसे खिलाड़ियों ने संघ की विरासत को आकार दिया है। जबकि, पवन सहरावत और प्रदीप नरवाल जैसे मौजूदा खिलाड़ी भारत की सर्वोच्चता बनाए हुए हैं।

प्रो कबड्डी लीग

अब तो, प्रो कबड्डी लीग की नोएडा स्थित शाखा – यू पी योद्धाज़ ने, हमारे राज्य उत्तर प्रदेश कबड्डी लीग के साथ, एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस प्रकार, राज्य में प्राथमिक स्तर की कबड्डी प्रतिभाओं को उजागर करने के लिए, एक राज्यव्यापी लीग के रूप में संघ ने पहली बार प्रवेश किया।

उत्तर प्रदेश की शाखा होने के नाते, हमारा यह कर्तव्य है कि, हम क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं का समर्थन करें, उनके खेल को विकसित करने और उसे एक पेशा बनाने के लिए सही मंच खोजें। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे राज्य से नितेश कुमार, सुमित और सुरेंद्र गिल जैसे कुछ प्रतिभाशाली युवा सामने आए हैं। और हम जानते ही हैं कि, भारत के सबसे बड़े और सबसे अधिक आबादी वाले राज्य के रूप में, उत्तर प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

संदर्भ

1. https://tinyurl.com/2fahff5s

2. https://tinyurl.com/yd9xt6by

3. https://tinyurl.com/y88uvr6b

4. https://tinyurl.com/38ke55a4

5. https://tinyurl.com/r7xyf4j9

 

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