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तितलियों को अक्सर फूलों पर मंडराते और अमृत (nectar) पीते देखा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक ऐसी तितली भी पाई जाती है जिसका नाम 'नवाबों' पर रखा गया है और जिसका खान-पान अन्य तितलियों से बिल्कुल अलग है? 'ब्लू नवाब' (Polyura schreiber) नाम की यह तितली न केवल अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के स्वास्थ्य की एक बड़ी संकेतक भी है। कीट विज्ञानियों के अनुसार, जहाँ ब्लू नवाब मौजूद होती है, वहाँ का वातावरण अत्यंत शुद्ध और संतुलित माना जाता है।
ब्लू नवाब क्या है और इसकी वैज्ञानिक पहचान क्या है?
ब्लू नवाब, जिसे वैज्ञानिक भाषा में पॉलीउरा श्रेइबर (Polyura schreiber) कहा जाता है, निम्फालिडे (Nymphalidae) परिवार की सदस्य है। यह मुख्य रूप से 'ब्रश-फुटेड' तितलियों की श्रेणी में आती है। इसकी पहचान इसके मजबूत शरीर और तेज उड़ान से होती है। इस तितली के पंखों का फैलाव 92 से 116 मिलीमीटर तक हो सकता है। इसके पिछले पंखों पर दो छोटी पूंछ जैसी संरचनाएं (tails) होती हैं, जो इसे अन्य प्रजातियों से अलग और आकर्षक बनाती हैं।

इसे 'ब्लू नवाब' ही क्यों कहा जाता है?
इस तितली का नाम इसकी उपस्थिति और भारत के सांस्कृतिक इतिहास का एक अनूठा संगम है। 'ब्लू' शब्द इसके पंखों पर दिखने वाली सुंदर नीली चमक को दर्शाता है, जबकि 'नवाब' शब्द भारतीय इतिहास के उन शासकों और रईसों के लिए उपयोग किया जाता था जो अपनी भव्यता और गरिमा के लिए जाने जाते थे। चूँकि इस तितली की उड़ान अत्यंत शालीन, तेज और इसके रंगों में एक शाही चमक होती है, इसलिए इसे 'ब्लू नवाब' का नाम दिया गया। यह नाम इसकी राजसी सुंदरता और प्रकृति में इसके 'रॉयल' दर्जे का प्रतीक है।
भारत के किन इलाकों में यह पाया जाता है?
ब्लू नवाब मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय एशिया (Tropical Asia) में पाई जाती है। भारत की बात करें तो यह दक्षिण भारत, असम और हिमालय की तलहटी वाले क्षेत्रों में देखी जाती है। इसके अलावा, यह म्यांमार, दक्षिण-पूर्वी एशिया और चीन के कुछ हिस्सों तक फैली हुई है। भारत में इसकी अलग-अलग उप-प्रजातियां भी मिलती हैं, जैसे दक्षिण भारत में Polyura schreiber wardii और असम से लेकर दक्षिण-पूर्वी एशिया तक Polyura schreiber assamensis पाई जाती है।
यह किस तरह के वातावरण में रहना पसंद करता है?
अध्ययनों से पता चलता है कि ब्लू नवाब को घने वन क्षेत्र (Forested habitats) अधिक पसंद हैं। यह विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय जंगलों, पेड़ों से घिरे इलाकों और जल स्रोतों के पास वाले क्षेत्रों में रहती है। इसे शहरी पार्कों, बगीचों और मैंग्रोव दलदलों में भी देखा जा सकता है। यह तितली अक्सर पेड़ों की ऊँचाइयों पर बैठना पसंद करती है और सुबह के समय जंगल के निचले हिस्सों में तेजी से उड़ते हुए देखी जा सकती है।
ब्लू नवाब का आहार अन्य तितलियों से अलग क्यों है?
जहाँ अधिकांश तितलियाँ केवल फूलों के रस पर निर्भर रहती हैं, वहीं ब्लू नवाब के वयस्क सदस्यों की पसंद काफी अलग है। ये तितलियाँ पेड़ों के रस (tree sap), सड़े हुए कार्बनिक पदार्थों और कभी-कभी पशुओं के अवशेषों (carrion) या उनके मल तक से पोषक तत्व प्राप्त करती हैं। पेड़ों का रस इन्हें वे खनिज और पोषक तत्व प्रदान करता है जो फूलों के अमृत में नहीं मिलते। नर तितलियों को अक्सर गीली जमीन पर खनिज सोखते हुए भी देखा जा सकता है।
इस तितली का जीवन चक्र और प्रजनन कैसे होता है?
ब्लू नवाब का जीवन चक्र किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसकी शुरुआत मादा द्वारा मेजबान पौधों (host plants) की पत्तियों के ऊपरी हिस्से पर दिए गए पीले, गोलाकार अंडों से होती है। एक अंडे का व्यास लगभग 1.9 मिमी होता है।
लार्वा (Caterpillar): अंडे से निकलने वाला लार्वा शुरू में सुनहरा भूरा होता है, लेकिन जल्द ही हरा हो जाता है। इसके सिर पर चार सींग जैसी संरचनाएं होती हैं, जो इसे किसी छोटे 'ड्रैगन' जैसा लुक देती हैं। यह मुख्य रूप से 'रेड सागा' (Adenanthera pavonina), 'रंबूटन' और 'वागटिया' जैसे पौधों की पत्तियां खाता है।
प्यूपा (Pupa): पूरी तरह विकसित होने के बाद, इल्ली प्यूपा में बदल जाती है। यह प्यूपा हरे रंग का होता है और देखने में किसी बेरी जैसा लगता है।
वयस्क: लगभग 10 से 11 दिनों के बाद प्यूपा से एक सुंदर तितली बाहर आती है।

पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी क्या भूमिका है?
बटरफ्लाई कंजर्वेशन जैसी संस्थाओं का मानना है कि तितलियाँ जैव विविधता की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ब्लू नवाब जैसे जीव 'स्वास्थ्य संकेतक' के रूप में कार्य करते हैं। इनका मौजूद होना इस बात का प्रमाण है कि उस क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है और वहाँ प्रदूषण का स्तर कम है। इसके अलावा, ये परागण (pollination) में मदद करती हैं और खाद्य श्रृंखला (food chain) का एक अहम हिस्सा हैं, जहाँ पक्षी और चमगादड़ इनका शिकार करते हैं।
दुर्भाग्य से, ब्लू नवाब को सबसे बड़ा खतरा आवास विनाश (Habitat destruction) से है। जंगलों की कटाई और शहरीकरण के कारण इनके रहने और प्रजनन के स्थान कम हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हमें इन 'शाही तितलियों' को बचाना है, तो हमें उनके प्राकृतिक आवासों और उन विशिष्ट मेजबान पौधों का संरक्षण करना होगा जिन पर इनका जीवन निर्भर है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/2db6n7l2
2. https://tinyurl.com/29q3qkal
3. https://tinyurl.com/2dw65blm
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