समय - सीमा 283
मानव और उनकी इंद्रियाँ 1091
मानव और उनके आविष्कार 845
भूगोल 276
जीव-जंतु 331
मध्यकालीन इतिहास के अनुसार, हमारा शहर रामपुर दिल्ली क्षेत्र का एक हिस्सा था और बदायूँ तथा संभल जिलों के बीच विभाजित था। बाद में, मुगल काल की शुरुआत में रोहिलखंड की राजधानी बदायूँ से बदलकर बरेली कर दी गई, जिसके कारण रामपुर का महत्व अधिक बढ़ गया। वर्ष 1774–75 का रोहिल्ला युद्ध तब शुरू हुआ, जब इस क्षेत्र में प्रभावशाली रोहिल्ला पठानों ने 1772 में मराठों के खिलाफ दी गई सैन्य सहायता के लिए अवध के नवाब को देय ऋण चुकाने से इनकार कर दिया। वारेन हेस्टिंग्स (Warren Hastings) द्वारा प्रदान की गई ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की सहायता से, तब नवाब ने रोहिल्लाओं को पराजित कर दिया और उन्हें उनकी पूर्व राजधानी बरेली से खदेड़ दिया।

रामपुर के रोहिल्ला राज्य की स्थापना 7 अक्टूबर 1774 को ब्रिटिश कमांडर कर्नल चैंपियन (Colonel Champion) की उपस्थिति में नवाब फैजुल्ला खान द्वारा की गई थी। इसके बाद, यह ब्रिटिश संरक्षण में एक स्वायत्त राज्य बना रहा। फैजुल्ला खान ने रामपुर में नए किले की पहली ईंट रखी और इस प्रकार 1775 में रामपुर शहर की स्थापना हुई। पहले नवाब ने इस शहर का नाम 'फैजाबाद' रखने का प्रस्ताव रखा था। किंतु 'फैजाबाद' नाम से पहले से ही कई अन्य स्थान मौजूद थे, इसलिए इसका नाम बदलकर मुस्तफाबाद उर्फ रामपुर कर दिया गया। नवाब फैजुल्ला खान ने 20 वर्षों तक यहाँ शासन किया। वे विद्या और विद्वता के बहुत बड़े संरक्षक थे और उन्होंने अरबी, फारसी, तुर्की और उर्दू पांडुलिपियों का संग्रह शुरू किया था, जो आज रामपुर रजा लाइब्रेरी का मुख्य हिस्सा हैं। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे मोहम्मद अली खान ने सत्ता संभाली, किंतु 24 दिनों के भीतर ही रोहिल्ला नेताओं द्वारा उनकी हत्या कर दी गई। फिर दिवंगत नवाब के भाई गुलाम मोहम्मद खान को नवाब घोषित किया गया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस बात पर आपत्ति जताई और महज 3 महीने 22 दिन के शासन के बाद गुलाम मोहम्मद खान कंपनी की सेनाओं द्वारा पराजित कर दिया गया। गवर्नर-जनरल ने दिवंगत मोहम्मद अली खान के पुत्र अहमद अली खान को नया नवाब नियुक्त किया। उन्होंने 44 वर्षों तक शासन किया। चूँकि उनका कोई पुत्र नहीं था, इसलिए गुलाम मोहम्मद खान के पुत्र मोहम्मद सईद खान ने नए नवाब के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने एक नियमित सेना का गठन किया, अदालतों की स्थापना की और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए अनेक कार्य किए। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र मोहम्मद यूसुफ अली खान ने सत्ता संभाली। जबकि वर्ष 1865 में उनके पुत्र कल्ब अली खान नए नवाब बने।

नवाब कल्ब अली खान (1832–1887) अरबी और फारसी के विद्वान थे। उनके शासनकाल में राज्य ने शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। वे वायसराय लॉर्ड जॉन लॉरेंस (Lord John Lawrence) के कार्यकाल में काउंसिल के सदस्य भी रहे थे। उन्होंने 22 वर्ष और 7 महीने तक शासन किया और रामपुर में भव्य जामा मस्जिद का निर्माण कराया। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र मुश्ताक अली खान ने सत्ता संभाली। उन्होंने डब्ल्यू. सी. राइट (W. C. Wright) को राज्य का मुख्य अभियंता नियुक्त किया और कई नई इमारतों तथा नहरों का निर्माण कराया। उनके पश्चात, नवाब हामिद अली खान 1889 में रामपुर के नए शासक बने। उनके शासनकाल में कई नए विद्यालय खोले गए। वर्ष 1905 में उन्होंने किले के भीतर एक भव्य दरबार हॉल का निर्माण कराया, जिसमें आज रामपुर रजा लाइब्रेरी द्वारा संरक्षित प्राच्य पांडुलिपियों का विशाल संग्रह मौजूद है। उनके पुत्र रजा अली खान 1930 में इस रियासत के अंतिम शासक नवाब बने।

1 जुलाई 1949 को रामपुर राज्य का भारतीय गणराज्य में विलय कर दिया गया। तथापि, यह लाइब्रेरी आज भी दुनिया भर के विद्वानों के लिए अपार महत्व रखने वाली एक समृद्ध संस्था के रूप में विद्यमान है। रामपुर के आखिरी नवाब रजा अली खान की भगवान श्रीराम में गहरी आस्था थी। उन्होंने रामपुर में 1947 में पहली बार रामलीला के मंचन की शुरुआत कराई थी। इसके लिए उन्होंने कोसी मंदिर मार्ग पर 80 बीघा भूमि उपलब्ध कराई थी। रामलीला का इतना विशाल मैदान आसपास के किसी अन्य जिले में नहीं है। विजयादशमी (दशहरा) पर रामलीला देखने हेतु यहाँ संपूर्ण जिले से लोग आते हैं। रामपुर में लंबे समय तक नवाबों का शासन रहा। नवाबों ने सभी धर्मों का सम्मान करते हुए उनके धार्मिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने का भी निरंतर प्रयास किया। नवाब रजा अली खान ने स्वयं होली के गीत लिखे थे। उन्होंने भमरौआ में श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर के लिए भी भूमि उपलब्ध कराई थी।
पहले 30 से 35 हजार लोग यहाँ रामलीला देखने हेतु एकत्रित होते थे। उस समय सभी दर्शक जमीन पर बैठकर ही इस कार्यक्रम का आनंद लेते थे। उस वक्त पनवड़िया के पास नुमाइश मैदान में इसका आयोजन किया गया था, किंतु शहर से अधिक दूरी पर होने के कारण दर्शकों को वहाँ पहुँचने में असुविधा होती थी। इसके बाद, वर्ष 1949 में नवाब रजा अली खान ने कोसी मंदिर मार्ग पर 80 बीघा भूमि उपलब्ध कराई। तब से लेकर आज तक वहाँ अनवरत रूप से रामलीला का मंचन होता आ रहा है।
रामपुर में रामलीला के मंचन के लिए देश के नामचीन कलाकार आते रहे हैं। अयोध्या से भी कई बार कलाकार पधारे हैं। इसके बाद मथुरा से और पिछले कई वर्षों से लगातार वृंदावन से यहाँ कलाकार आ रहे हैं। वृंदावन और मथुरा के कलाकार रामपुर आने के लिए हमेशा अत्यंत उत्सुक रहते हैं।
नवाब परिवार ने सदैव 'गंगा-जमुनी तहजीब' को बढ़ावा दिया है। ब्रिटिश राज के दौरान देश में 28 मुस्लिम राजघराने थे, किंतु रामपुर एकमात्र ऐसा राजघराना था, जहाँ नवाब को गद्दी पर बैठाने वाले राजपुरोहित एक ब्राह्मण होते थे। रामपुर रियासत के अंतिम राजपुरोहित वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के ससुर थे। उन्होंने ही अंतिम शासक नवाब रजा अली खां का राजतिलक कर उन्हें गद्दी पर बैठाया था।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/58a27t9m
2. https://tinyurl.com/mvfduwjh
A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.
B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.
D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.
E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.